अश्रुपूरित नेत्रों से मां सरस्वती को दी गई विदाई, शांतिपूर्ण रहा विसर्जन

बेतिया समेत जिलके शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में मां शारदे की पूजा के विसर्जन को लेकर चहल-पहल बना रहा.
बेतिया/मैनाटांड़/इनरवा/गौनाहा/साठी
बेतिया समेत जिलके शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में मां शारदे की पूजा के विसर्जन को लेकर चहल-पहल बना रहा. खासकर जिले के प्रखंड के विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों, पूजा पंडालों और चौक-चौराहों पर विराजमान मां सरस्वती की प्रतिमाओं का विसर्जन शनिवार को श्रद्धा, उल्लास और भावुक माहौल के बीच संपन्न हुआ. विसर्जन के दौरान “हंस वाहिनी की जय”,“मां सरस्वती की जय”,“वर दे वीणा वादिनी की जय”के जयघोष से पूरा इलाका गूंज उठा. श्रद्धालुओं की आंखें नम थीं, लेकिन चेहरे पर भक्ति और उल्लास की झलक साफ दिखाई दे रही थी.
मैनाटांड़ प्रखंड में सुबह करीब 11 बजे से ही विसर्जन जुलूस निकलने लगे. छात्र-छात्राएं गाजे-बाजे के साथ अबीर-गुलाल उड़ाते हुए मां की प्रतिमा को विसर्जन स्थल तक ले गए. इस दौरान “बाजे रे पायलिया”,“माई हो तनी आ जईब”जैसे भक्ति गीतों पर युवक-युवतियां झूमते नजर आए. कई स्थानों पर वसंतोत्सव का भी आयोजन किया गया, जिससे माहौल और भक्तिमय हो गया. इनरवा, गौनाहा और साठी क्षेत्रों में भी विसर्जन पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ. पूजा समितियों और स्थानीय लोगों के सहयोग से किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई. प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. मैनाटांड़, मानपुर, पुरुषोत्तमपुर, इनरवा, भंगहा तथा गौनाहा-सहोदरा थानों की पुलिस बल मुस्तैद रही और संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी गई. श्रद्धालुओं ने अनुशासन और भाईचारे का परिचय देते हुए मां सरस्वती को नम आंखों से विदाई दी. स्थानीय प्रशासन ने शांतिपूर्ण आयोजन के लिए पूजा समितियों, युवाओं और आम नागरिकों का आभार व्यक्त किया. पूरे क्षेत्र में सौहार्द और सामाजिक समरसता की मिसाल देखने को मिली.
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