जीएमसीएच में नहीं दुरूस्त हुआ ड्रेनेज सिस्टम, कैंपस में बह रहा गंदा पानी

भले ही जीएमसीएच की इमारतें चकाचक है, मगर ड्रेनेज सिस्टम की अनदेखी ने पूरे अस्पताल परिसर की हालत खराब कर दी है.
बेतिया. भले ही जीएमसीएच की इमारतें चकाचक है, मगर ड्रेनेज सिस्टम की अनदेखी ने पूरे अस्पताल परिसर की हालत खराब कर दी है. अस्पताल के कई हिस्से पोस्टमार्टम रुम, जीएनएम कॉलेज, सी-ब्लॉक के दक्षिणी हिस्से, इस भवन के पिछले हिस्से व सी व बी ब्लॉक के पार्किंग स्थल में शौचालय का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, जिससे मरीजों, डॉक्टरों और उनके परिजनों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है. पानी से बदबू आने के कारण चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मियों के अलावे मरीज व उनके परिजनों को नाक पर हमेशा रुमाल रखकर आना-जाना पड़ता है. इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन की ओर से ड्रेनेज सिस्टम दुरूस्त करने के दिशा में अब तक पहल नहीं की गई है. अगर जल्द ही ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त नहीं किया गया, तो यह समस्या एक बड़े स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है. अब देखना होगा कि प्रशासन कब तक इस समस्या को हल करता है या फिर मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को इसी गंदगी के बीच काम करने और इलाज कराने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.
——————————————————- —ड्रेनेज को दुरुस्त करने के लिए अस्पताल प्रशासन को मिला एनओसी
अस्पताल प्रबंधक मो. शहनवाज ने बताया कि अस्पताल में ईटीपी, डब्लूटीपी व रैनवाटर सिस्टम काम करता है. जिसमें ईटीपी, डब्लूटीपी सुचारू रूप से काम कर रहा है. उन्होंने बताया कि रैन वाटर को दुरुस्त करने के लिए निर्माण कंपनी की ओर से काम चल रहा है. अस्पताल सूत्रों के मुताबिक रैन वाटर सिस्टम दुरुस्त करने के लिए लगभग 02 करोड़ रुपया लागत खर्च की जाएगी. जबकि, सी ब्लॉक के दक्षिण भाग में बिजली पोल रहने के कारण विभाग को एनओसी पत्र भेजा गया था. जिसका कुछ दिन पूर्व एनओसी मिल गया है. अब तेजी से काम होगा. जिससे पोस्टमार्टम रूम, जीएनएम कॉलेज के बाहर लगने वाले जल- जमाव से निजात मिलेगी.
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ओपीडी व आइपीडी में औसतन प्रतिदिन 2000 से ज्यादा पहुंचते हैं मरीज जीएमसीएच में प्रतिदिन औसतन दो हजार से अधिक मरीज इलाज के लिए आते हैं. इसके अलावा, सैकड़ों की संख्या में डॉक्टर, नर्स और स्वास्थ्यकर्मी भी यहां ड्यूटी पर रहते हैं. लेकिन अस्पताल परिसर में जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण जगह-जगह गंदा पानी जमा हो रहा है। खासतौर पर इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी और कुछ प्रमुख भवनों के पास शौचालय का गंदा पानी खुले में बह रहा है। मरीजों और उनके परिजनों को इस गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। —————————– बयान ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करने को लेकर निर्माण एजेंसी को निर्देश दिया गया है. एजेंसी ने जल्द से जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन दी है. डॉ सुधा भारती, अधीक्षक, जीएमसीएच बेतियाडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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