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अप्रैल में ही सूख गयीं पंडई और हड़बोड़ा समेत दर्जनभर पहाड़ी नदियां

Updated at : 19 Apr 2024 9:10 PM (IST)
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अप्रैल में ही सूख गयीं पंडई और हड़बोड़ा समेत दर्जनभर पहाड़ी नदियां

शिवालिक की पहाड़ियों से निकल कर नरकटियागंज अनुमंडल होते हुए चंपारण के 60 फीसदी हिस्से को हरा भरा बनाने वाली और सालो भर बहने वाली पहाड़ी नदियां सूख गयी है.

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नरकटियागंज. शिवालिक की पहाड़ियों से निकल कर नरकटियागंज अनुमंडल होते हुए चंपारण के 60 फीसदी हिस्से को हरा भरा बनाने वाली और सालो भर बहने वाली पहाड़ी नदियां सूख गयी है. इनमें नरकटियागंज की दो अहम नदियां पंडई और हड़बोड़ा समेत मनियारी, बलोर, करताहा और ओरिया समेत दर्जन भर नदियां शामिल है. अनुमंडल क्षेत्र से होकर गुजरने वाली इन नदियों के बारे में ये धारणा रही है कि ये कभी सूखती नहीं हैं, लेकिन पिछले साल इन नदियों में मई माह में पानी की किल्लत थी जो इस बार एक माह पहले अप्रैल में ही दिखाई देने लगी है. इन नदिया में पानी नहीं रहने से चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है. खेती किसानी का संकट तो है ही अंतिम संस्कार तक के लिए नदियों में पानी नहीं है. अमूमन इन नदियों में पिछले कुछ सालों से ऐसा संकट देखने को मिल रहा था. लेकिन इस बार अप्रैल बीता भी नही की पानी का गंभीर संकट उठ खड़ा हुआ है. शिवालिक क्षेत्र से गंडक नदी में मिलने वाली नदियां हड़बोड़ा – 65 किलोमीटर पंडई – 150 किलोमीटर करताहा – 50 किलोमीटर ओरिया – 90 किलोमीटर चापाकल और खरीदी हुई पानी से हो रह अंतिम संस्कार जिन नदियों के किनारे अंतिम संस्कार किये जाते थे और लोग नदियों के पानी से मुंडन कराते थे. वहीं अब नदियों के पास से चापाकल से पानी भर कर लाना पड़ रहा है या फिर जार वाला पानी खरीदना पड़ रहा है. यहीं नहीं मरने के बाद जिन शवों को नदी के किनारे जलाया जाता रहा है. वहीं अब वें बीच नदी के पेट में जलाये जा रहे है. इसकी वजह साफ है कि नदियां पूरी तरह सुख चुकी हैं और पानी का कहीं नामोनिशान तक नहीं है. बढ़ती हुई जनसंख्या, ग्लोबल वार्मिंग में वृद्धि के कारण नदियां और कुएं सूख रहे हैं. पेड़ों की अंधाधुंध कटाई के कारण बारहमासी नदियां मौसमी नदियां बनती जा रही है. अगर यही हाल रहा और धरती हरी भरी नहीं रही तो और भी गंभीर संकट उत्पन्न होगा. डॉ अपर्णा झा, असिस्टेंट प्रोफेसर भूगोल विभाग टी. पी.वर्मा काॅलेज

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