3 किमी सड़क बनी दलदल, स्कूल जाना मुश्किल; सीमावर्ती गांवों के लोगों का संपर्क टूटा

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दलदल में तब्दील हुआ चकदहवा मार्ग

चकदहवा मार्ग पर भरा पानी

लगातार मानसूनी बारिश ने भारत-नेपाल सीमा के कई गांवों को मुश्किलों में डाल दिया है. करीब तीन किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क दलदल में तब्दील हो गई है, जिससे आवागमन लगभग बंद हो गया है. ग्रामीणों की समस्याएं हर साल दोहराई जा रही हैं.

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Valmikinagar News: लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने भारत-नेपाल सीमा से सटे चकदहवा, बिन टोली, झंडू टोला समेत कई गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. लक्ष्मीपुर रमपुरवा पंचायत के रोहुआ टोला से इन गांवों को जोड़ने वाली करीब तीन किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क जलभराव और कीचड़ के कारण पूरी तरह दलदल में तब्दील हो गई है.

सड़क पर जगह-जगह पानी भर जाने से सैकड़ों ग्रामीणों का आवागमन जोखिमभरा हो गया है और कई गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया है.

पैदल चलना भी बना चुनौती

हालात ऐसे हैं कि सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है. सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और मरीजों को उठानी पड़ रही है.

बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जबकि बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है. बाजार जाने वाले लोगों को भी फिसलन और जलभराव के बीच जोखिम उठाकर सफर करना पड़ रहा है.

हर मानसून में दोहराई जाती है समस्या

ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क वर्षों से कच्ची है और हर बरसात में इसकी स्थिति बदतर हो जाती है. सड़क के पक्कीकरण की मांग को लेकर कई बार सांसद, विधायक, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका.

ग्रामीणों का आरोप है कि विकास के दावों के बावजूद सीमावर्ती क्षेत्र अब भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं.

एसएसबी की आवाजाही भी प्रभावित

बारिश का असर सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है. इसी मार्ग से आने-जाने वाले सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

जलभराव के कारण पूरा इलाका टापू जैसा दिखाई देने लगा है. इससे मवेशियों के लिए चारा लाने, आवश्यक सामान की खरीदारी और आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ा है.

ग्रामीणों ने की स्थायी समाधान की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क का शीघ्र पक्कीकरण, समुचित जलनिकासी व्यवस्था और स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है. उनका कहना है कि हर वर्ष बरसात में यह समस्या दोहराई जाती है और समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो लोगों की परेशानियां और बढ़ेंगी.


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