सिरसी उर्दू स्कूल में कमरों की कमी से पढ़ाई प्रभावित, 216 बच्चों के लिए महज कुछ वर्ग कक्ष

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विद्यालय कार्यालय का जर्जर छत्त

Begusarai News : खोदावंदपुर के सिरसी उर्दू विद्यालय में कमरों की कमी और जर्जर भवन से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, सुरक्षा के लिए चाहरदीवारी की मांग.

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Begusarai News : खोदावंदपुर प्रखंड के बरियारपुर पूर्वी पंचायत अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय सिरसी उर्दू में वर्ग कक्षों की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. विद्यालय में एक ही कमरे में एक से अधिक कक्षाओं का संचालन करने की मजबूरी बनी हुई है. विद्यालय में पहली से आठवीं कक्षा तक कुल 216 बच्चे नामांकित हैं, जिनमें करीब 150 बच्चे नियमित रूप से विद्यालय आते हैं. इन बच्चों के लिए पर्याप्त वर्ग कक्ष उपलब्ध नहीं हैं. विद्यालय में प्रभारी प्रधानाध्यापक सहित कुल आठ शिक्षक पदस्थापित हैं.

दशकों से अर्धनिर्मित पड़ा है एक कमरा

विद्यालय का एक कमरा दशकों से अर्धनिर्मित अवस्था में पड़ा हुआ है. देखरेख के अभाव में भवन धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है. वर्ग कक्षों की कमी के कारण अर्धनिर्मित भवन और बरामदे में भी बच्चों की पढ़ाई करानी पड़ती है. वहीं, विद्यालय का कार्यालय कक्ष भी जर्जर स्थिति में है. ऐसे में शिक्षकों और विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

चाहरदीवारी और मुख्य गेट नहीं होने से सुरक्षा का खतरा

विद्यालय की सबसे बड़ी समस्या चाहरदीवारी और मुख्य गेट का नहीं होना है. विद्यालय मुख्य ग्रामीण सड़क के किनारे स्थित है. चाहरदीवारी नहीं होने के कारण विद्यालय परिसर असुरक्षित बना हुआ है. बच्चों के खेलते या विद्यालय परिसर से बाहर निकलकर सड़क की ओर चले जाने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.

विद्यालय से बच्चों के बाहर निकलने की बनी रहती है आशंका

शिक्षकों के अनुसार, परिसर की घेराबंदी नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं के विद्यालय से निकलकर घर चले जाने की स्थिति भी बन जाती है. विद्यालय परिसर में चाहरदीवारी नहीं होने का फायदा असामाजिक तत्व भी उठाते हैं. स्थानीय स्तर पर बताया गया है कि रात के समय विद्यालय परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है.

नल तोड़ने से पेयजल की समस्या

स्थानीय लोगों के अनुसार, असामाजिक तत्वों द्वारा विद्यालय का नल कई बार तोड़ा जा चुका है. नल खराब होने के कारण बच्चों को पेयजल के लिए परेशानी होती है. साथ ही शौचालय में भी पानी की समस्या उत्पन्न हो जाती है. विद्यालय में शौचालयों की संख्या भी बच्चों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त नहीं है, जिससे छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है.

कम से कम छह अतिरिक्त वर्ग कक्षों की जरूरत

विद्यालय प्रधान के अनुसार, वर्तमान में विद्यालय को कम से कम छह अतिरिक्त वर्ग कक्षों की आवश्यकता है. अतिरिक्त कमरों के निर्माण से सभी कक्षाओं का सुचारु रूप से संचालन किया जा सकेगा और एक ही कमरे में एक से अधिक कक्षाओं को संचालित करने की मजबूरी खत्म होगी.

ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग से लगाई गुहार

ग्रामीणों और विद्यालय के शिक्षकों ने शिक्षा विभाग एवं संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से विद्यालय की स्थिति का जायजा लेकर आवश्यक वर्ग कक्षों का निर्माण कराने की मांग की है. इसके साथ ही अर्धनिर्मित भवन को पूरा कराने तथा विद्यालय परिसर में चाहरदीवारी और मुख्य गेट का निर्माण कराने की भी मांग की गई है. लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और बेहतर शैक्षणिक माहौल के लिए इन मूलभूत सुविधाओं का उपलब्ध होना बेहद जरूरी है.

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Rajesh Kumar

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