बेगूसराय में मधुश्रावणी पर्व की धूम, नवविवाहिताओं ने शुरू की अखंड सुहाग के लिए पूजा-अर्चना

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नवविवाहिताओं ने शुरू की अखंड सुहाग के लिए पूजा-अर्चना

बेगूसराय में नवविवाहिताओं के बीच मधुश्रावणी पर्व का उत्साह अपने चरम पर है। महिलाएं अपने मायके में रहकर माता गौरी, भगवान शिव और नाग देवता की पूजा कर रही हैं। यह लोकपर्व मिथिलांचल की समृद्ध परंपरा और वैवाहिक जीवन के सौभाग्य का प्रतीक है।

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बेगूसराय में मिथिलांचल की समृद्ध परंपरा और नवविवाहित महिलाओं के अखंड सौभाग्य से जुड़े लोकपर्व मधुश्रावणी की शुरुआत होते ही जिले में उत्साह का माहौल बन गया है. खासकर गढ़पुरा प्रखंड क्षेत्र में नवविवाहिताओं के बीच इस पर्व को लेकर अलग ही उमंग देखने को मिल रही है. महिलाएं पारंपरिक परिधान में सज-धज कर पूरे विधि-विधान के साथ माता गौरी, भगवान शिव और नाग देवता की पूजा कर रही हैं और अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अटूट वैवाहिक जीवन की कामना कर रही हैं.

मायके में रहकर निभाई जाती है परंपरा

मधुश्रावणी पर्व की खास बात यह है कि नवविवाहिताएं इस दौरान अपने मायके में रहकर पूजा-अर्चना करती हैं. तय अवधि तक वे व्रत रखती हैं और रोजाना नियमपूर्वक पूजा करती हैं. इस परंपरा को लेकर महिलाओं में गहरी आस्था देखने को मिलती है. परिवार की बुजुर्ग महिलाएं भी इस दौरान अहम भूमिका निभाती हैं और नई बहुओं को परंपराओं के बारे में विस्तार से बताती हैं.

लोकगीतों और परंपराओं से गूंज रहा माहौल

इस पर्व के दौरान घर-आंगन में लोकगीतों की गूंज सुनाई दे रही है. महिलाएं पारंपरिक गीत गाकर पूजा-अर्चना करती हैं. साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक कथाओं का भी श्रवण कराया जाता है. इससे न सिर्फ पूजा का महत्व बढ़ता है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जुड़ने का अवसर भी मिलता है.

गांवों में दिख रही खास रौनक

गढ़पुरा प्रखंड के कुम्हारसों, मालीपुर, कोरई समेत कई गांवों में इस पर्व को लेकर खास रौनक देखी जा रही है. घरों में पूजा की तैयारियां जोर-शोर से की गई हैं. बाजारों में भी पूजा सामग्री की खरीदारी को लेकर चहल-पहल बढ़ गई है. हर तरफ पर्व की छटा देखने को मिल रही है.

वैवाहिक जीवन के लिए शुभ माना जाता है पर्व

स्थानीय महिलाओं का मानना है कि मधुश्रावणी पर्व वैवाहिक जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य लाने वाला होता है. यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मिथिला की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस पर्व के जरिए पारिवारिक परंपराएं और सामाजिक मूल्य भी मजबूत होते हैं.

सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने की परंपरा

मधुश्रावणी पर्व मिथिला की लोकसंस्कृति को पीढ़ी दर पीढ़ी जीवित रखने का माध्यम माना जाता है. यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था को दर्शाता है, बल्कि समाज में पारिवारिक एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी संदेश देता है. हर साल इस पर्व के माध्यम से नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ती है और परंपराओं को आगे बढ़ाती है.


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रागिनी शर्मा

लेखक के बारे में

By रागिनी शर्मा

वर्तमान में मैं, रागिनी शर्मा पटना स्थित प्रभात खबर डिजिटल की टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं. यहां मैं बिहार के विभिन्न जिलों से जुड़ी अहम खबरों, राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर काम कर रही हूं. मेरा उद्देश्य हर खबर को सरल, सटीक और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक न सिर्फ जानकारी प्राप्त करें बल्कि उससे जुड़ाव भी महसूस करें और डिजिटल पत्रकारिता को और अधिक सार्थक बनाया जा सके.

पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान ही मैंने प्रिंट और डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. अपने कॉलेज के समय में हिंदुस्तान के साथ इंटर्नशिप के दौरान मुझे पहली बार वेब पोर्टल पर खबर लिखने और डिजिटल न्यूज राइटिंग का व्यावहारिक अनुभव मिला. इसी दौरान मैंने न्यूज़ लेखन, हेडलाइन स्ट्रक्चर और डिजिटल स्टोरी प्रेजेंटेशन की बुनियादी समझ विकसित की.

इसके बाद वर्ष 2025 में पत्रकारिता में ग्रेजुएशन पूरा करने के साथ ही मैंने अपने प्रोफेशनल करियर की शुरुआत की. डिजिटल मीडिया में मेरी पहली भूमिका फर्स्ट बिहार झारखंड के साथ रही, जहाँ मैंने एंकरिंग और ग्राउंड रिपोर्टिंग के माध्यम से बिहार के जमीनी मुद्दों को कवर किया. इस दौरान मैंने राज्य की राजनीति, सामाजिक सरोकारों और आम जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सक्रिय रूप से रिपोर्टिंग की.

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