भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय है आपातकाल : डॉ राजभूषण

Published by :MANISH KUMAR
Published at :27 Jun 2025 10:07 PM (IST)
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भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय है आपातकाल : डॉ राजभूषण

1975 में लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय है. 25-26 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सत्ता बचाने के लिए संविधान और देश की जनता के अधिकारों को कुचल दिया.

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बेगूसराय. 1975 में लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय है. 25-26 जून 1975 की रात तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सत्ता बचाने के लिए संविधान और देश की जनता के अधिकारों को कुचल दिया. महज 21 दिनों में 48 संशोधन किए गए. 1.11 लाख से अधिक लोगों को जेलों में डाल दिया गया. प्रेस की स्वतंत्रता पर ताले जड़ दिए गए और संजय गांधी के आदेश पर 60 लाख लोगों की जबरन नसबंदी की गई, जिनमें अविवाहित युवा भी शामिल थे. ये बातें केंद्रीय जल शक्ति राज्यमंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी ने गंगा ग्लोबल बीएड कॉलेज में शुक्रवार को कही. मौका था कांग्रेस द्वारा लगाए गए आपातकाल के काले अध्याय के 50वें वर्ष के अवसर पर मॉक पार्लियामेंट का. इससे पहले केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री, प्रदेश के खेल मंत्री सुरेंद्र मेहता, नगर विधायक कुंदन कुमार, भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव कुमार वर्मा, गंगा ग्लोबल बीएड कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीरज कुमार, एमबीए कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सुधा झा, जिला महामंत्री कुंदन भारती, मृत्युंजय वीरेश ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया. इसके बाद वंदे मातरम का गायन हुआ. खेल मंत्री सुरेंद्र मेहता ने कहा कि आपातकाल लागू कर भारतीय लोकतंत्र को नष्ट एवं कमजोर करने तथा भारत को जेल में बदलने के बेशर्म प्रयास किए गए. प्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, चंद्रशेखर, जार्ड फर्नाडिस जैसे नेताओं को आंतरिक सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया. कई शिक्षाविदों, अखबार वालों, ट्रेड यूनियन वादियों और छात्र नेताओं को भी सलाखों के पीछे डाल दिया गया. प्रेस सेंसरशिप के कारण स्वतंत्र पत्रकारिता भी प्रभावित हुई. जहां अखबार छपते थे वहां बिजली आपूर्ति बाधित की गई. कुलदीप नैयर जैसे पत्रकारों को भी मीसा के तहत गिरफ्तार किया गया. नगर विधायक कुंदन कुमार ने कहा कि भारत के लिए आजादी की रात जितनी छोटी थी, आपातकाल घोषणा की रात उतनी ही लम्बी साबित हुई. इंदिरा गांधी लोकतांत्रिक विकल्प के रूप में घोषणा कर सकती थी कि लोकसभा भंग कर दी जाएगी और शीघ्र ही नए चुनाव करवाए जाएंगे, लेकिन इंदिरा गांधी ने कुर्सी बचाए रखने के लिए आपातकाल लागू करवा दिया. इस घोषणा ने संविधान के संघीय प्रावधानों, मौलिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं को निलंबित कर दिया. भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव कुमार वर्मा ने कहा कि भारत भूमि लोकतंत्र की जन्मस्थली है जहां वैशाली जैसे महान गणराज्य थे. हमारा संविधान हमारे देश की इसी अंतर्निहित प्रकृति का परिणाम हैं. आपातकाल का समय यह बताता है कि सत्ता में बैठे लोग जब संविधान और संस्थाओं की अवहेलना करते हैं तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता है और लोकतंत्र केवल एक व्यवस्था नहीं, यह जनता का विश्वास है जिसे कायम रखने के लिए सभी नागरिकों को सतर्क, जिम्मेदार एवं जागरूक बने रहना होगा. मॉक पार्लियामेंट में प्रशिक्षुओं और छात्रों ने आपातकाल के संदर्भ में पक्ष और विपक्ष में अपनी बातें रखीं. मॉक पार्लियामेंट में गंगा ग्लोबल बीएड कालेज, गंगा ग्लोबल एमबीए कालेज तथा गंगा ग्लोबल स्कूल के प्रशिक्षु और छात्रों ने भाग लिया. कार्यक्रम के अंत में मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र देकर पुरस्कृत किया. कार्यक्रम में आगत अतिथियों का स्वागत बीएड कॉलेज के प्राचार्य डाॅ. नीरज कुमार, मंच संचालन भाजपा जिला युवा मोर्चा अध्यक्ष सुमित कुमार सन्नी और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. विपिन कुमार ने किया. इस अवसर पर डिप्टी मेयर अनिता राय, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश महामंत्री नवीन कुमार सिंह, युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री नीरज नवीन, जिला महामंत्री रामप्रवेश सहनी, राकेश पांडेय, जिला उपाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह, पुष्पा राम आदि मौजूद रहे.

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