ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बेगूसराय में 1200 मेडिकल स्टोर बंद, मरीजों को भारी परेशानी
Published by : Nikhil Anurag Updated At : 20 May 2026 5:15 PM
धरना पर बैठे दुकानदार संघ के सदस्य
बेगूसराय में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में रिटेलर एसोसिएशन की हड़ताल के चलते करीब 1200 मेडिकल स्टोर बंद रहे. इससे मरीजों को दवाओं के लिए भारी परेशानी हुई. जन औषधि केंद्र और सरकारी अस्पताल खुले रहे, जिससे कुछ राहत मिली, लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं पूरे दिन प्रभावित रहीं.
Begusarai News: (विपिन मिश्र की रिपोर्ट) बेगूसराय जिले में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुधवार को लगभग 1200 मेडिकल स्टोर बंद रहे. रिटेलर एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस हड़ताल का असर पूरे जिले में देखने को मिला। हड़ताल मंगलवार रात 12 बजे से शुरू हुई, जिससे बरौनी, तेघड़ा, बीहट, बलिया, भगवानपुर, छौराही, गढ़पुरा और बखरी सहित अधिकांश क्षेत्रों में दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहीं.
मरीजों को हुई भारी परेशानी
अचानक मेडिकल स्टोर बंद होने से मरीजों और उनके परिजनों को गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ा. विशेष रूप से बुजुर्ग, गंभीर रोगों से पीड़ित मरीज और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार सबसे अधिक प्रभावित रहे. कई लोगों को जरूरी दवाओं के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान भटकना पड़ा, लेकिन अधिकांश जगहों पर ताले लगे मिले.
हड़ताल का कारण
केमिस्टों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री से छोटे मेडिकल दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है. साथ ही बिना उचित निगरानी दवाओं की बिक्री से मरीजों की सेहत पर भी खतरा बढ़ सकता है. इसी विरोध में यह एक दिवसीय बंदी आयोजित की गई.
जन औषधि केंद्र और सरकारी अस्पताल खुले रहे
प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र (PMBJK) इस हड़ताल से अलग रहे और सामान्य रूप से खुले रहे. इससे कुछ हद तक मरीजों को राहत मिली. इसके अलावा सदर अस्पताल सहित जिले के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी. अनुमंडलीय अस्पताल, पीएचसी और एपीएचसी को भी अलर्ट पर रखा गया था.
प्रशासन की व्यवस्था
जिला प्रशासन ने विभिन्न प्रखंडों और मुख्यालय में कुछ मेडिकल स्टोर्स को आपातकालीन स्थिति के लिए खुला रखने का निर्देश दिया था, लेकिन अधिकांश जगहों पर इन दुकानों पर भी सन्नाटा देखा गया.
असर
हड़ताल के कारण पूरे दिन जिले की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं. कई मरीजों ने बताया कि नियमित दवाएं नहीं मिलने से उन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ी.
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लेखक के बारे में
By Nikhil Anurag
मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर पलायन कर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.
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