बेगूसराय: बरौनी का मॉडल स्कूल आधी-अधूरी तैयारी के बीच शुरू, स्मार्ट क्लास से लैब तक अधूरी व्यवस्था

Author Bipin kumar raj|Edited by Vikash Jha
Updated:
विज्ञापन
अव्यवस्थित है माॅडल स्कूल | Prabhat Khabar Network

माॅडल स्कूल | Prabhat Khabar Network

बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी शिक्षा पहल के तहत बेगूसराय में सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल शुरू तो हो गए हैं, लेकिन सुविधाओं का हाल बदहाल है. स्मार्ट क्लास, लाइब्रेरी और लैब जैसी अहम व्यवस्थाएं अब तक अधूरी हैं.

विज्ञापन

Begusarai News: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी शिक्षा पहल के तहत सूबे के प्रत्येक प्रखंड में सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल शुरू किए गए हैं. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 19 जुलाई 2026 को आईओसीएल (IOCL) स्टेडियम से इन सभी 551 स्कूलों का वर्चुअल उद्घाटन किया. इन स्कूलों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है. मॉडल स्कूलों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षण, आधुनिक प्रयोगशालाएं, उन्नत पुस्तकालय और तकनीक आधारित शिक्षा व्यवस्था विकसित की जाएगी. इसी के तहत बरौनी प्रखंड अंतर्गत सिमरिया-एक के राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर स्मारक प्लस टू स्कूल को भी मॉडल स्कूल बनाया गया है.

उद्घाटन के उपरांत जब इस स्कूल का जायजा लेने पहुंचा तो पाया कि मॉडल के अनुरूप यहां अन्य स्कूलों से अलग कोई खासियत अथवा सुविधाएं नहीं हैं. लाइब्रेरी से लेकर लेबोरेट्री तक सरकार की प्रदत्त सुविधाएं कार्टून और बोरों में बंद पड़े हैं. खेल की सुविधाएं स्कूल से नदारद हैं. फिलहाल फर्क सिर्फ इतना दिखा कि पुराने रंग-रोगन को मिटाकर स्कूल की पुरानी बिल्डिंग पर नया रंग-रोगन आनन-फानन में चढ़ा दिया गया है. साथ ही स्कूल के नाम से ऊपर 'सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल' लिख दिया गया. यहां तक कि विद्यालय के मुख्य गेट पर अभी भी राष्ट्रकवि रामधारी सिंह का ही नाम विद्यालय के गौरवपूर्ण इतिहास को बयां कर रहा है.

नामांकन की कहानी

नामांकन के समय एक सूची राष्ट्रीय मेधा सह छात्रवृत्ति में शामिल छात्रों की मॉडल स्कूल को उपलब्ध कराई गई. इस प्रतियोगिता में शामिल प्रखंड के बच्चों के प्राप्तांक के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार कर उन्हें नामांकन के लिए आमंत्रित किया गया. कुल 40 बच्चों का नामांकन लेना था. प्रखंड के 40 बच्चों को सूचना मिली, लेकिन उनमें से केवल पांच बच्चे पोषक क्षेत्र के बाहर से नामांकन ले सके. ऐसी स्थिति में स्थानीय बच्चों को बुलाकर नामांकन कर सीट को फुल किया गया. प्रभारी प्राचार्य कुलदीप सिंह यादव बताते हैं कि बिना सुविधा मुहैया कराए बच्चे नामांकन लेने को तैयार नहीं हुए.

लाइब्रेरी में एक साथ बच्चों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं

स्कूल के बच्चों के लिए लाइब्रेरी में बैठकर पढ़ने की समुचित व्यवस्था नहीं है. लाइब्रेरी के नाम पर एक कमरा आवंटित है. इसी कमरे में किताबें रखी हैं और वहीं लाइब्रेरियन बैठती हैं. ऐसी स्थिति में बच्चों के लिए सेल्फ स्टडी के लिए अलग से कोई समुचित व्यवस्था नहीं है. वहीं अब तक सिलेबस की किताबें उपलब्ध नहीं होने से बच्चे इस ओर रुचि नहीं ले पा रहे हैं. लाइब्रेरियन लोपा मुद्रा ने बताया कि हर दिन 10 से 15 किताबें बच्चे निर्गत करा रहे हैं और कुछ बच्चे यहां बैठकर भी पढ़ते हैं. हाल ही में सिलेबस व प्रतियोगिता परीक्षा से संबंधित 837 पुस्तकें विभाग द्वारा भेजी गई हैं, जिसका कैटलॉग तैयार किया जा रहा है.

स्मार्ट क्लास में बच्चों की उपस्थिति नगण्य

दो स्मार्ट क्लास चालू कराने का विभागीय निर्देश दिया गया है. एक स्मार्ट क्लास चालू स्थिति में है जिसमें कम संख्या में बच्चे उपस्थित थे. दूसरा स्मार्ट क्लास अब तक तैयार नहीं हो पाया है. प्राचार्य ने बताया कि जल्द ही दूसरा स्मार्ट क्लास भी प्रारंभ हो जाएगा, इसके लिए सामग्री दी जा चुकी है. वहीं विद्यालय को अभी आईसीटी (ICT) लैब उपलब्ध नहीं कराया जा सका है.

प्रयोगशाला में बंधा हुआ है उपकरणों का पैकेट

स्कूल में प्रयोगशाला की स्थिति सबसे दयनीय है. विभाग द्वारा भेजे गए उपकरणों को बेतरतीब तरीके से रखा गया है. सभी उपकरण इधर-उधर बिखरे पड़े हैं. अधिकांश उपकरणों का बंडल अब तक नहीं खुला है. एक ही कमरे में उपकरणों के बंडल पर धूल की परत जम रही है और रख-रखाव की समुचित व्यवस्था नहीं है.

इस संबंध में प्राचार्य श्री यादव ने बताया कि सभी को जल्द ही दुरुस्त कर लिया जाएगा और बच्चों का प्रयोग शुरू हो जाएगा. उन्होंने बताया कि रिक्ति के मुताबिक तीन शिक्षकों को भेजा गया है. हालांकि, माध्यमिक स्तर पर संस्कृत विषय के शिक्षक अभी स्कूल में नहीं हैं, जिसके लिए विभाग को सूचित कर दिया गया है. जल्द ही सभी व्यवस्थाएं मॉडल स्कूल के अनुरूप दुरुस्त हो जाएंगी.

सवाल शिक्षक या नामांकन का नहीं, बल्कि स्कूलिंग मॉडल का है

बताते चलें कि इन विद्यालयों को नॉन-रेजिडेंशियल (गैर-आवासीय) मॉडल के रूप में विकसित किया गया है, जबकि इनका पोषक क्षेत्र पूरा प्रखंड निर्धारित किया गया है. इसका अर्थ है कि वर्तमान तय प्रावधानों के अनुसार यहां नामांकित होने वाले विद्यार्थियों को प्रतिदिन 10 से 30 किलोमीटर तक की दूरी तय कर विद्यालय पहुंचना होगा; क्योंकि इसके लिए आवासीय प्रावधानों के अनुसार छात्रावास से लैस किया नहीं गया है और डे स्कूलिंग के लिए सुरक्षित छात्र परिवहन की कोई स्पष्ट नीति घोषित नहीं है.

यही कारण है कि अनेक स्थानों पर चयनित विद्यार्थियों के बावजूद नामांकन अपेक्षित स्तर तक नहीं हो सका. बरौनी प्रखंड में मॉडल स्कूल सिमरिया प्रखंड के दक्षिण-पश्चिमी छोर पर स्थित है. छपकी, सहूरी, मिर्जापुर, चांद मैदा, बभनगामा, केशावे, मकरदही और सिसवा जैसे दूरस्थ गांवों से चयनित अनेक विद्यार्थियों के अभिभावकों ने केवल इस कारण नामांकन नहीं कराया कि प्रतिदिन सुरक्षित आवागमन की कोई विश्वसनीय व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी.

इन मॉडल स्कूलों में शामिल प्रमुख सुविधाएं और विशेषताएं ऐसी होंगी

इन आदर्श विद्यालयों में विद्यार्थियों को प्लस-टू (12वीं) तक की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाएगी और यहीं पर नीट (NEET) एवं जेईई (JEE) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष कोचिंग व तैयारी की सुविधा भी मिलेगी. स्कूलों में स्मार्ट क्लास, पूरी तरह से क्रियाशील आईसीटी (कंप्यूटर) लैब, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं और समृद्ध पुस्तकालय होगा. पढ़ाई के स्तर को सुधारने और शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए विशेष पारदर्शी तरीके से योग्य शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी. इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ शौचालय, खेल का मैदान और समावेशी शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा.

एक ही स्कूल में होगी दो तरह की शिक्षा व्यवस्था

प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी परिसरों में मॉडल स्कूल और सामान्य विद्यालय साथ-साथ चलेंगे. एक ही परिसर में दो संस्थागत पहचान विकसित होंगी. यदि संसाधनों और अवसरों के वितरण में पर्याप्त संतुलन नहीं रखा गया, तो बच्चों के बीच अनावश्यक मनोवैज्ञानिक विभाजन उत्पन्न होने का जोखिम रहेगा. विद्यालय समाज में समानता का पहला सार्वजनिक मंच होता है, वहां किसी भी प्रकार की अदृश्य दूरी बच्चों के भविष्य पर गहरा प्रभाव छोड़ सकती है.

हर स्कूल में हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर या डेडिकेटेड लीज्ड लाइन इंटरनेट चाहिए

एक तरफ सरकार निर्बाध वाई-फाई और स्मार्ट क्लास की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ स्कूलों में बुनियादी नेटवर्क तक की घोर कमी है. शिक्षकों को उपस्थिति दर्ज कराने के लिए स्कूल से बाहर निकलकर नेटवर्क तलाशना पड़ रहा है. ऐसे में सवाल लाजिमी है—जब एक मामूली सरकारी ऐप पर हाजिरी बनाने के लिए स्कूलों में इंटरनेट नहीं है, तो फिर घंटों चलने वाली हाई-स्पीड लाइव क्लास कैसे चलेगी? बिना बफरिंग के आईआईटी के प्रोफेसर बच्चों को कैसे पढ़ाएंगे? मुफ्त कोचिंग की इस व्यवस्था को सफल बनाने के लिए एक पूरे "इकोसिस्टम" की जरूरत है; सिर्फ घोषणाएं काफी नहीं हैं. इसके लिए निर्बाध बिजली और हर स्कूल में हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर या डेडिकेटेड लीज्ड लाइन इंटरनेट चाहिए.

क्या कहते हैं ग्रामीण

राष्ट्रकवि दिनकर के गांव के लोगों ने कहा कि अनेक विद्यालय स्थानीय समाज, भूमिदाताओं और जनसहयोग से विकसित हुए हैं. उनकी ऐतिहासिक पहचान और सामाजिक स्मृति के साथ उनकी सहमति का सम्मान भी इस परिवर्तन का हिस्सा होना चाहिए. सार्वजनिक संस्थानों के नामकरण और पुनर्संरचना से जुड़े मानदंड जितने स्पष्ट, पारदर्शी और समावेशी होंगे, समाज का विश्वास उतना ही मजबूत होगा.

उन्होंने कहा कि बिहार के मॉडल स्कूलों की सफलता का निर्णय उद्घाटन मंचों पर नहीं होगा; उसका निर्णय उस दिन होगा जब राज्य के सबसे दूर बसे गांव का अभिभावक निश्चिंत होकर यह विश्वास कर सकेगा कि उसका बच्चा प्रतिदिन सुरक्षित विद्यालय जाएगा, उत्कृष्ट शिक्षा पाएगा और सम्मानपूर्वक वापस घर लौटेगा. वही दिन इस योजना की वास्तविक सफलता का दिन होगा.

Also Read: बेगूसराय: बछवाड़ा में राजद की बैठक, सुमित कुमार को मिली नई जिम्मेदारी


विज्ञापन
Bipin Kumar Raj

लेखक के बारे में

By Bipin Kumar Raj

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन