ड्रिप सिंचाई के क्षेत्र में जिले भर के किसान बढ़ाने लगे हैं कदम
Updated at : 28 Dec 2019 8:09 AM (IST)
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बेगूसराय : जिले में आधुनिक पद्धति की सिंचाई तकनीक ड्रिप , मिनी स्प्रिंकलर व पोर्टेबुल स्प्रिंकलर के बढ़ते कदम से सिंचाई के क्षेत्र में बड़े परिवर्तन हो रहे हैं जो इस क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा. एक और जहां परंपरागत सिंचाई व्यवस्था से जल की अधिक खपत, बिजली की अधिक खपत होती है […]
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बेगूसराय : जिले में आधुनिक पद्धति की सिंचाई तकनीक ड्रिप , मिनी स्प्रिंकलर व पोर्टेबुल स्प्रिंकलर के बढ़ते कदम से सिंचाई के क्षेत्र में बड़े परिवर्तन हो रहे हैं जो इस क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा. एक और जहां परंपरागत सिंचाई व्यवस्था से जल की अधिक खपत, बिजली की अधिक खपत होती है वहीं लागत भी अधिक आती थी.
ड्रीप व फव्वारा विधि स्प्रिंकलर से सिंचाई से गुणात्मक बचत होती है. जिला उद्यान विभाग द्वारा सकारात्मक प्रयास से इसमें उल्लेखनीय प्रगति हुई है. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत ड्रिप सिंचाई पद्धति के लिए 90 प्रतिशत तथा स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति में 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है.जिसका परिणाम जिले में बेहतर आया है.
ड्रिप व स्प्रिंकलर माध्यम से 16.5 हेक्टेयर में हो रही हैं सिंचाई :वर्ष 2019-20 में आधुनिक सिंचाई पद्धति के अंतर्गत कुल 16 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई हो रही है. जिले में ड्रिप सिंचाई के कुल नौ प्रोजेक्ट लगाये गये हैं.
वहीं मिनी स्प्रिंकलर की चार तथा पोर्टेबुल स्प्रिंकलर के दो प्रोजेक्ट लगाये जा चुके हैं. सिंचाई योजना के तहत 14 लाख 74 हजार 642 रुपये का अनुदान किसानों को भुगतान भी किये जा चुके हैं. साथ ही एक प्रोजेक्ट ड्रीप का 1.4 हेक्टेयर के लिए तथा मिनी स्प्रिंकलर के लिए 2.8 हेक्टेयर की और भी किसानों को स्वीकृति हो चुकी है.
ड्रिप सिंचाई से है बहुत लाभ : ड्रिप सिंचाई से किसानों को बहुत ही लाभ है. इस माध्यम से 60 प्रतिशत जल की बचत होती है. 25 से 30 प्रतिशत तक उर्वरक की खपत में कमी तथा 30 से 35 प्रतिशत की लागत में कमी आती है. इसके साथ-साथ 25 से 35 प्रतिशत अधिक उत्पादन भी होती है.उत्पाद की गुणवत्ता भी बेहतर होता है.
किस प्रकार किसान योजना का उठा सकते हैं लाभ :योजना के अंतर्गत अनुदान का लाभ लेने के लिए किसान खुद पूरी राशि लगाकर अपना अथवा अनुदान की राशि घटाकर शेष राशि भुगतान कर यंत्र का क्रय कर सकते हैं.
योजना की जानकारी या ऑनलाइन आवेदन के लिए अपने क्षेत्र के उद्यान पदाधिकारी या निबंधित कंपनियों से संपर्क कर लिया जा सकता है. योजना का लाभ लेने वाले किसान कृषि विभाग के बेवसाइट के डीबीटी पोर्टल पर आवेदन भर सकते हैं.
किन फसलों में कौन सा सिंचाई पद्धति का किसान कर रहे है उपयोग:पपीता, केला, आम, लीची, अमरूद, सब्जी, अनार, गन्ना, लत्तीदार फसल, अनानास, प्याज आदि फसलों में ड्रीप विधि से सिंचाई बेहतर होती है.
आलू, प्याज, धान, गेंहू,सब्जी एवं चाय आदि फसलों में मिनी स्प्रिंकलर तथा दलहन, तेलहन, धान, गेंहू व सब्जियों में पोर्टेबुल स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई करना उत्तम है. वहीं फलदार वृक्ष, मक्का, गन्ना इत्यादि फसल में किसान पोर्टेबुल रेनगन सिंचाई विधि का उपयोग करते हैं.
बोले पदाधिकारी
आधुनिक सिंचाई के प्रति किसानों की जागरूकता बढ़ रही है. सरकार द्वारा किसानों को लाभ देने के लिए योजना का संचालन किया जा रहा. अधिक से अधिक किसानों तक योजना का लाभ पहुंच सके विभाग इसके प्रति सक्रिय है.
राधेश्याम ,सहायक निदेशक उद्यान,बेगूसराय
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