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आर्म्स एक्ट में पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर की जमानत याचिका खारिज

Updated at : 22 Jan 2019 7:44 PM (IST)
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आर्म्स एक्ट में पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर की जमानत याचिका खारिज

बेगूसराय : आर्म्स एक्ट मामले में जेल में बंद पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा की जमानत याचिका मंगलवार को मंझौल न्यायालय से खारिज हो गयी. चंद्रशेखर वर्मा 29 अक्टूबर से, जबकि मंजू वर्मा 20 नवंबर, 2018 से जेल में बंद हैं. ज्ञात हो कि पूर्व मंत्री की जमानत याचिका पहले ही मंझौल […]

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बेगूसराय : आर्म्स एक्ट मामले में जेल में बंद पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा की जमानत याचिका मंगलवार को मंझौल न्यायालय से खारिज हो गयी. चंद्रशेखर वर्मा 29 अक्टूबर से, जबकि मंजू वर्मा 20 नवंबर, 2018 से जेल में बंद हैं. ज्ञात हो कि पूर्व मंत्री की जमानत याचिका पहले ही मंझौल न्यायालय से खारिज हो चुकी है. वहीं, प्रथम बार उनके पति की ओर से दाखिल की गयी याचिका को भी न्यायालय ने खारिज कर दिया. बचाव पक्ष के अधिवक्ता सत्यनारायण महतो ने न्यायालय को बताया कि मेरे मुवक्किल निर्दोष हैं. उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है. चूंकि रिकवरी के दौरान हमारे मुवक्किल पटना में थे. उनके संज्ञान में कुछ नहीं था और वह 1997 से लगातार पटना में निवास करते आ रहे हैं, जबकि रिकवरी के दौरान बरामद कारतूसों से संबंधित एक भी हथियार बरामद नहीं हुआ. बिना हथियार के बरामद कारतूस खिलौनों के समान हैं. इसलिए मेरे मुवक्किल जमानत पाने के अधिकारी हैं. उन्हें जमानत दी जाये.

वहीं, सरकार की ओर से पीपीओ शैलेंद्र कुमार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला काफी संवेदनशील है. जिला एवं सत्र न्यायालय के लिए विचारणीय योग्य है. इसलिए जमानत याचिका को खारिज किया जाये. वहीं सुनवाई के उपरांत प्रभारी एसीजेएम धीरेंद्र कुमार राय ने मामले को गंभीर बताते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी. इस दौरान न्यायालय में वर्मा दंपती के समर्थक भी मौजूद थे.

विदित हो कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड के खुलासा होने के बाद वर्मा दंपति के जीवन में जैसे भूचाल आ गया. पूर्व समाज कल्याण मंत्री के विभाग में हुए उक्त कांड के खुलासा होने से पहले तक सब-कुछ ठीक-ठाक चल रहा था. लेकिन उक्त कांड का खुलासा होते ही जहां सरकार के अंदर व बाहर के लोगों के दबाव में पूर्व मंत्री को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी. जिसके बाद जदयू ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया. वहीं उनका विभाग होने के कारण सीबीआई के द्वारा वर्तमान दंपति के हरेक ठिकानों पर छापेमारी की गयी.

छापेमारी के क्रम में पूर्व समाज कल्याण मंत्री के पति चंद्रशेखर वर्मा के पैतृक आवास चेरियाबरियारपुर थाना क्षेत्र के अर्जुन टोल गांव से छापेमारी में 50 जिंदा कारतूस बरामद किया गया. वहीं बरामद जिंदा कारतूस मामले में सीबीआई के डीएसपी के द्वारा स्थानीय थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. जिसमे वर्म व उनकी पत्नी पूर्व समाज कल्याण मंत्री को आरोपित किया गया था.

जिसके वर्मा दंपति के द्वारा अग्रिम जमानत हेतु जिला सत्र न्यायालय से लेकर पटना हाईकोर्ट तक प्रयास किया गया मगर जमानत नहीं मिली. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया. इस बीच मंझौल न्यायालय से कुर्की जब्ती की कार्रवाई का आदेश निकल जाने के कारण पूर्व मंत्री के पति के द्वारा न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया गया. इसके बाद भी पूर्व मंत्री को राहत नहीं मिली और स्थानीय मंझौल न्यायालय के आदेश से दो दिनों तक चली कुर्की जब्ती की सौ फीसदी कार्रवाई के बाद पूर्व समाज कल्याण मंत्री भी बीमारी के हालत में आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

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