हड़ताल में शामिल हुए सैकड़ों मजदूर, भाकपा–माले व ऐक्टू के आंदोलनकारी, निकाला जुलूस, किया प्रदर्शन
Published by : SHUBHASH BAIDYA Updated At : 12 Feb 2026 7:31 PM
हड़ताल में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में महिला-पुरुष मजदूर स्थानीय गांधी चौक पर जुटे
चार लेबर कानून मजदूरों के अस्तित्व के लिए खतरा, वापस ले सरकार : एसके शर्मा
बांका. मजदूरों की कानूनी सुरक्षा को खत्म करने वाले चार लेबर कोड को लागू किये जाने समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर गुरुवार को हुई देशव्यापी आम हड़ताल का जिले में गहरा असर दिखा. हड़ताल में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में महिला-पुरुष मजदूर स्थानीय गांधी चौक पर जुटे. लाल झंडा, बैनर व मांग पट्टिकाओं के साथ जुलूस निकाला. सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों, कारगुजारियों के विरोध में नारों को बुलंद करते और अपनी मांगों के समर्थन में जोशपूर्ण प्रदर्शन किया. जुलूस वीर कुंवर सिंह मैदान, अलीगंज, बाजार, शिवाजी चौक, डोकनिया बाजार के रास्ते जिला समाहरणालय पहुंचा. जुलूस व प्रदर्शन का नेतृत्व ऐक्टू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व भाकपा (माले) के राज्य कमेटी सदस्य एसके शर्मा, भाकपा (माले) के जिला संयोजक रामचंद्र दास, किसान नेता रणवीर कुशवाहा, महिला नेत्री रेणु कुमारी और रीता देवी ने किया.ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (ऐक्टू) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एसके शर्मा ने बांका के स्थानीय शास्त्री चौक पर मजदूरों के प्रदर्शन को संबोधित करते हुए लेबर कोड को मजदूरों के अस्तित्व के लिए खतरा बताया. उन्होंने इस कानून को लेकर मोदी सरकार के झूठे प्रचार व दावों का भंडाफोड़ करते हुए कहा कि अब तक मजदूरों को कानूनी सुरक्षा और कुछ अधिकार देने वाले सभी 29 श्रम कानूनों को खत्म कर बनाये गये चार लेबर कोड मजदूरों पर सबसे बड़ा हमला हैं. इसके जरिये मजदूर वर्ग को सौ, डेढ़ सौ साल पुरानी गुलामी की स्थिति में धकेल दिया जायेगा. ये कोड श्रमिकों के बड़े हिस्से को मजदूर के दर्जे व दायरे से बाहर कर देगा. यह कानून संविधान पर भी बड़ा हमला है. कहा कि यह कोड औद्योगिक घरानों, मालिकों की मांग पर लाया गया है. आह्वान किया कि मजदूर वर्ग अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई में उतर पड़े हैं. सरकार को मुंहतोड़ जवाब दिया जायेगा. कहा कि बुलडोजर राज चल रहा है. गरीबों, दलितों, मजदूरों के वास-आवास और आजीविका को रौंदा जा रहा है. वहीं केंद्र की मोदी सरकार सबकुछ बेच देने पर उतारू है. सार्वजनिक उद्यमों का तेजी से निजीकरण किया जा रहा है. न्यूनतम मजदूरी कानून को कमजोर कर और काम के घंटे को बढ़ाकर मजदूरों का शोषण बढ़ाया जा रहा है ताकि अमीरों–कॉरपोरेटरों को सस्ता मजदूर मिल सके. इस हड़ताल में बैंक सेक्टर के भी कर्मियों ने हिस्सा लिया. कार्यक्रम में बिशेश्वर दास, विशेश्वर पंडित, शिव दास, वीरवल राय, सुरेश दास, नन्दिनी देवी, लक्ष्मी देवी, मीरा, गुड़िया देवी आदि बड़ी संख्या में महिला व पुरुष मजदूर शामिल हुए. दूसरी ओर इंटक अध्यक्ष विनय कापरी के नेतृत्व में भी कार्यकर्ताओं ने हड़ताल में अपनी सहभागिता दी. इंटक के रविंद्र कुमार यादव, उपेंद्र प्रसाद यादव, दिवाकर झा, मनेाज कुमार, रानी सोरेन आदि शामिल थे.
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