बौंसी में भगवान मधुसूदन की ऐतिहासिक रथयात्रा की तैयारियां तेज: धर्मरथ की रंगाई-पुताई शुरू

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रंगाई पुताई करते कलाकार | Prabhat Khabar Network

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बांका जिले के बौंसी प्रखंड अंतर्गत भगवान मधुसूदन की ऐतिहासिक और पौराणिक रथयात्रा को लेकर प्रशासनिक व स्थानीय स्तर पर तैयारियां काफी तेज हो गई हैं. प्रशासन से मिले कड़े निर्देशों के बाद रविवार से भगवान के भव्य धर्मरथ की साफ-सफाई, मर्ममत और रंगाई-पुताई का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है, जिसे देखने के लिए स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ रही है.

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आगामी 16 जुलाई को निकलने वाली इस बहुप्रतीक्षित रथयात्रा में अब महज चार दिन का समय शेष रह गया है, जिससे पूरे क्षेत्र के श्रद्धालुओं में भारी उत्सुकता और उत्साह देखा जा रहा है. रथयात्रा के साथ-साथ आयोजित होने वाले पारंपरिक मेले का स्वरूप भी अब धीरे-धीरे धरातल पर दिखने लगा है. हालांकि, मेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए नागरिक सुविधाओं को समय पर पूरा करना अभी भी प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा है.

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मंदार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है यह यात्रा

भगवान मधुसूदन की यह रथयात्रा मंदार क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हुई है:

  • देशभर से आते हैं श्रद्धालु: हर वर्ष इस पावन अवसर पर बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा देश के अन्य राज्यों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु बौंसी पहुंचते हैं.
  • रथ खींचने की है परंपरा: भगवान मधुसूदन के दर्शन करने और पवित्र धर्मरथ की डोरी को अपने हाथों से खींचने के लिए भक्तों में विशेष आस्था और होड़ देखने को मिलती है.

सजने लगा मेला, पहुंचने लगे देश-दुनिया के झूले और दुकानदार

रथयात्रा के मुख्य मार्ग और मंदिर परिसर के आसपास अब पारंपरिक मेले की रौनक बढ़ने लगी है. देश के विभिन्न हिस्सों से आए दुकानदार, बच्चों के मनोरंजन के साधन, मिकी माउस और बड़े-बड़े झूले (जादू-तमाशे वाले) अपने स्टॉल लगाने के लिए आयोजन स्थल पर पहुंचने लगे हैं, जिससे मेला क्षेत्र गुलजार होने लगा है.

मूलभूत सुविधाओं को समय पर दुरुस्त करना अब भी बड़ी चुनौती

प्रशासनिक स्तर पर काम शुरू होने के बावजूद, स्थानीय बुद्धिजीवियों और ग्रामीणों का मानना है कि बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर अभी काफी काम किया जाना शेष है:

प्रशासनिक निर्देश के बाद धर्मरथ को सजाने का काम तो रविवार से शुरू हो गया है, जो कि एक अच्छी पहल है. लेकिन मेले में आने वाले हजारों-लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शुद्ध पेयजल (पीने का पानी), रात में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग), सुरक्षा के कड़े इंतजाम, चलंत शौचालय (स्वच्छता) और आपातकालीन चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधाओं को अगले चार दिनों के भीतर पूरी तरह दुरुस्त करना जिला प्रशासन और स्थानीय नगर पंचायत के लिए अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. इन सभी व्यवस्थाओं को समय रहते पूरा करना अनिवार्य है ताकि ऐतिहासिक मेला पूरी तरह सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके.


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