बांका के ग्रामीण इलाकों में बिजली फॉल्ट से त्राहि-त्राहि: 5-6 घंटे भी नहीं मिल रही आपूर्ति

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बिजली की समस्या से परेशान है जिलेवासी, विभाग रोज करता है बहाना

फोटो कैप्शन- विद्युत सब स्टेशन, फुल्लीडुमर | Prabhat Khabar Network

बांका जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में डिमांड के अनुरूप बिजली उपलब्ध होने के सरकारी दावों के बीच जमीनी हकीकत बेहद परेशान करने वाली है. आंधी और बारिश के नाम पर घंटों बिजली गुल रहने की समस्या अब आम हो चुकी है. विभाग द्वारा हर बार 'फॉल्ट' का बहाना बनाए जाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ता खासे परेशान हैं और उनका धैर्य अब जवाब दे रहा है.

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बिजली संकट की यह भयावह स्थिति जिले के आधे से अधिक प्रखंडों में बनी हुई है, जहां चौबीस घंटे में महज 5 से 6 घंटे भी बिजली नसीब नहीं हो पा रही है. इस बेपटरी बिजली आपूर्ति का सबसे सीधा और बुरा असर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी 'हर घर नल-जल योजना' पर पड़ा है. बिजली न रहने से पानी की मोटरें बंद हैं, जिससे आधे से अधिक जिले में पेयजल (पीने के पानी) की घोर किल्लत पैदा हो गई है.

नल-जल योजना ठप, दिनचर्या के साथ पानी के लिए हाहाकार

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की आंख-मिचौली ने लोगों की जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है:

  • मोटरें पड़ीं बंद: अधिकतर प्रखंडों में नल-जल योजना की जलापूर्ति पूरी तरह बिजली पर ही निर्भर है. लगातार घंटों बिजली गायब रहने से पानी का भंडारण और सप्लाई नहीं हो पा रही है.
  • दैनिक कार्य प्रभावित: पानी न मिलने से लोगों को अपनी सामान्य दिनचर्या पूरी करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. लोग पानी के लिए पारंपरिक कुओं और चापाकालों पर निर्भर होने को मजबूर हैं.

इन प्रखंडों में सबसे बदतर हैं हालात, दफ्तरों में पहुंच रहा आक्रोश

बिजली और पानी की इस दोहरी मार से जिले के कई प्रखंड बुरी तरह प्रभावित हैं. मुख्य रूप से:

  1. अमरपुर और फुल्लीडुमर
  2. रजौन और धोरैया
  3. चांदन एवं कटोरिया

इन क्षेत्रों के ग्रामीण उपभोक्ताओं का कहना है कि वे अक्सर अपनी नाराजगी और खीझ सोशल मीडिया साइट्स पर पोस्ट लिखकर या सीधे बिजली कार्यालय (विद्युत सब-स्टेशन) जाकर अधिकारियों के सामने निकालते हैं, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर बिजली व्यवस्था में कोई सुधार नहीं के बराबर दिख रहा है.

शहर और गांव के बीच भेदभाव, विभाग का अजीब तर्क

बिजली विभाग की दोहरी नीति को लेकर भी ग्रामीण उपभोक्ताओं में भारी रोष है. ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी इलाकों में काफी बेहतर और ज्यादा समय तक बिजली दी जा रही है. जब ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों बिजली कटी रहती है, तो विभाग के कर्मी तकनीकी फॉल्ट को ठीक करने में घंटों का समय लगा देते हैं, जिससे लोगों की परेशानी दोगुनी हो जाती है.

विद्युत विभाग की आधिकारिक सूचना: ग्रिड से आपूर्ति सुचारू

विद्युत कार्यपालक अभियंता और विभागीय कंट्रोल रूम से मिली आधिकारिक सूचना के अनुसार, ग्रिड स्तर पर बिजली की कोई कमी नहीं है:

जिले के शहरी और कस्बाई क्षेत्रों में निर्बाध रूप से बिजली आपूर्ति जारी रखने के निर्देश हैं. विभाग की ओर से जानबूझकर किसी भी प्रकार की आधिकारिक बिजली कटौती (पावर कट) की कोई सूचना जारी नहीं की गई है. अमरपुर और बांका मुख्य ग्रिड से बिजली की आपूर्ति पूरी तरह सुचारू और सामान्य है. केवल आंधी, तूफान या तेज बारिश आने की स्थिति में सुरक्षा के लिहाज से या तकनीकी फॉल्ट आ जाने के कारण कुछ देर के लिए आपूर्ति बाधित होती है, जिसे पेट्रोलिंग टीम द्वारा जल्द से जल्द ठीक करने का प्रयास किया जाता है.


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सुभाष वैद्य

लेखक के बारे में

By सुभाष वैद्य

सुभाष वैद्य प्रिंट माध्यम में 20 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत वर्ष 2005 में की. अभी प्रभात खबर के बांका कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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