चीर नदी के पूर्वी तट पर समतलीकरण से किसानों की गेहूं फसल हुई बर्बाद

एनएच-333 ए अंतर्गत प्रस्तावित बाईपास प्रोजेक्ट में चीर नदी के पूर्वी तट पर शनिवार सुबह अचानक कराये गये समतलीकरण कार्य से कई रैयतों की खड़ी गेहूं की फसल बर्बाद हो गयी.
एनएच-333 ए बाइपास प्रोजेक्ट में ‘जेसीबी कहर’
बिना सूचना रातों-रात चला दी मशीन, रैयतों ने किया विरोध
पंजवारा. एनएच-333 ए अंतर्गत प्रस्तावित बाईपास प्रोजेक्ट में चीर नदी के पूर्वी तट पर शनिवार सुबह अचानक कराये गये समतलीकरण कार्य से कई रैयतों की खड़ी गेहूं की फसल बर्बाद हो गयी. किसानों का आरोप है कि शुक्रवार देर रात से ही जेसीबी मशीन उनकी जमीन पर चला दी गयी और बिना किसी पूर्व सूचना के शनिवार को काम जारी रखा गया. सूचना मिलते ही किसान मौके पर पहुंचे और विरोध जताया. रैयत नितेश मिश्रा, भोली मंडल, अरविंद मिश्रा, राघव मंडल, कांति मंडल और मंदेश्वर मंडल समेत अन्य ने बताया कि विभाग या निर्माण कंपनी की ओर से न तो लिखित सूचना दी गयी और न ही मौखिक जानकारी. किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कंपनी के एक कर्मचारी सूरज कुमार सिंह ने विरोध करने पर उनके साथ अभद्रता की, इससे आक्रोश और बढ़ गया.
ग्रामीणों ने मांग की है कि फसल नुकसान का तत्काल आकलन कर उचित मुआवजा दिया जाए और भविष्य में बिना सूचना किसी भी प्रकार का कार्य न कराया जाए. इधर, भागलपुर डिवीजन के एसडीओ सुधीर कुमार ने बताया कि मामले की जानकारी मिलते ही निर्माण कंपनी के कर्मियों को कड़ी फटकार लगायी गयी है और फिलहाल समतलीकरण कार्य रोक दिया गया है. उन्होंने कहा कि रैयतों के भुगतान से संबंधित प्रक्रिया में तेजी लाई जायेगी. कई रैयतों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के भुगतान में देरी से वे पहले ही आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं. अब फसल बर्बादी ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी है. प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होगी और नियमानुसार कार्रवाई की जायेगी.प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी
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