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संस्था के दिवंगत संस्थापक स्व अनिरूद्ध सिंह को दी गयी श्रद्धांजलि

Updated at : 09 Dec 2024 11:59 PM (IST)
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संस्था के दिवंगत संस्थापक स्व अनिरूद्ध सिंह को दी गयी श्रद्धांजलि

संस्था के दिवंगत संस्थापक स्व अनिरूद्ध सिंह को दी गयी श्रद्धांजलि

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डीएलएड के प्रशिक्षु छात्र-छात्राओं के स्वागत में फ्रेशर पार्टी आयोजित कटोरिया. कटोरिया के मुक्ति निकेतन स्थित महात्मा गांधी शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय के सभागार में डीएलएड के नए सत्र 2024-26 के प्रशिक्षु अध्यापक-अध्यापिकाओं के स्वागत व सम्मान में फ्रेशर पार्टी का आयोजन हुआ. कार्यक्रम की शुरूआत मुख्य अतिथि सह मुक्ति निकेतन के सचिव चिरंजीव सिंह, डीएलएड संकाय के उपाध्यक्ष अमर कुमार साहा, प्राचार्य डा सतीश प्रसाद साह व डीएलएड संकाय के एचओडी पंचम कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया. फिर मुक्ति निकेतन के दिवंगत संस्थापक स्व अनिरूद्ध प्रसाद सिंह की तस्वीर पर उपस्थित अतिथियों ने बारी-बारी से श्रद्धा-सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया. डीएलएड की प्रशिक्षु छात्राओं द्वारा स्वागत गीत व सरस्वती वंदना की बेहतरीन प्रस्तुति दी गयी. इससे पहले उपस्थित सभी अतिथियों व प्रशिक्षुओं को बारी-बारी से तिलक लगाकर व गुलाब भेंटकर स्वागत किया गया. प्रशिक्षु छात्र-छात्राओं को अतिथियों के हाथों आइडी कार्ड, प्रॉस्पेक्टस, रसीद, डायरी, पेन एवं फाइल देकर सम्मानित किया गया. मंच का सफल संचालन सौरभ अश्क ने किया. इस मौके पर व्याख्याता संगीता झा, लाइब्रेरी विभाग की प्राची सिंह, अंजन सिंह, संजय सिंह, शत्रुघ्न सिंह, शाद्दभ अंसारी, सुमंत कुमार, प्रभाष पासवान, मोती, सुबोध कुमार आदि मौजूद थे. पूर्वजों के संस्कार व व्यवहार को लेकर बढें आगे : चिरंजीव फ्रेशर पार्टी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सह मुक्ति निकेतन के सचिव चिरंजीव कुमार सिंह ने कहा कि सभी प्रशिक्षु अध्यापक व अध्यापिका कॉलेज के नियमों का अनुसरण करते हुए नियमित रूप से क्लास करें. शिक्षा ग्रहण करने के साथ-साथ अपने पूर्वजों के संस्कार व व्यवहार को भी लेकर आगे बढें. चूंकि आधुनिक युग में पुर्वजों का संस्कार खोता जा रहा है. सिर्फ किताबी ज्ञान से एक सभ्य इंसान बनना संभव नहीं है. ‘कहां है मेरा हिंदुस्तान’ गीत की प्रस्तुति के उपरांत उन्होंने कहा कि सभी प्रशिक्षु छात्र-छात्राएं अपने समाज व राष्ट्र के लिए जागृति का भाव पैदा करें. समाज को कुशल ज्ञान, व्यवहार, नैतिकता व संस्कार जैसी अच्दी चीजें परोसेंगे, तो आने वाली पीढी हमारे ही संस्कार व संस्कृति का अनुसरण कर आगे बढेंगे. प्राचार्य डा सतीश प्रसाद ने कहा कि शिक्षक की सबसे बड़ी भूमिका समाज सुधारक के रूप में होती है. शिक्षक का कार्य सिर्फ पढाना ही नहीं है, बल्कि समाज की बुराईयों व कुरीतियों को भी दूर करने में अपनी सहभागिता निभाना है.

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