विकसित भारत जी रामजी योजनाओं से गांवों की बदलेगी तस्वीर, मजदूरों के चेहरे से बनेगी हाजिरी

मनरेगा के बदले स्वरूप विकसित भारत जी रामजी योजना से गांवों के विकास की तस्वीर बदलेगी. साथ ही अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी.
बांका. मनरेगा के बदले स्वरूप विकसित भारत जी रामजी योजना से गांवों के विकास की तस्वीर बदलेगी. साथ ही अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी. वीबी जीरामजी भ्रम बनाम तथ्य तथा रोजगार से परिसंपत्ति तक विषय पर डीडीसी कार्यालय वेश्म में बुधवार को संवाददाता सम्मेलन आयोजित हुई. मौके पर डीडीसी उपेंद्र सिंह ने बताया कि तेजी से बदलती 21वीं सदी में यंग इंडिया की जरूरतों, आकांक्षाओं और विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह कानून बनाया गया है. इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए समृद्ध, सक्षम और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की नींव मजबूत करना तथा गांव, गरीबों व किसानों के चौमुखी विकास के साथ जरूरतमंदों को ग्राम स्तर पर रोजगार दिलाना है. इस नई योजना से खेती किसानी के सीजन में मजदूरों की किल्लत अब नहीं होगी. फसल बुआई व कटनी के समय में 60 दिनों विकास आधारित योजनाओं के कार्याें में मजदूरों का इस्तेमाल होगा. इससे होगा कि बुआई व कटनी के समय मजदूर खेत में कार्य कर सकेंगे. इस नये नियम से भ्रष्टाचार में भी कमी आयेगी. फेशियल रिकग्निशयन से हाजिरी बनेगी. उन्होंने बताया कि कार्यों की योजना विकसित ग्राम पंचायत योजना के माध्यम से तैयार की जायेगी और इन्हें पीएम गति शक्ति जैसी राष्ट्रीय स्थानिक योजना प्रणालियों से तैयार की जायेगी, ताकि संसाधनों का बेहतर और पारदर्शी उपयोग हो सके. प्रशासनिक खर्चों की सीमा 6 से बढ़कर 9 प्रतिशत कर दिया गया है. जिसका उपयोग विशेषज्ञों की सेवाएं, रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए तकनीक के उपयोग, क्षमता निर्माण व प्रभाव मूल्यांकन में किया जायेगा. योजना को पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, मोबाइल आधारित निगरानी, कार्यों की योजना बनाने के लिए सैटेलाइट व मैप तकनीक का उपयोग, एआई आधारित विश्लेषण आदि तकनीक का उपयोग किया जायेगा. इस मौके पर निदेशक डीआरडीए सतीश कुमार, निदेशक लेखा प्रशासन सह जनसंपर्क पदाधिकारी श्रीनिवास के अलावा विभिन्न मीडिया हाउस के मीडिया कर्मी आदि मौजूद थे. वर्ष में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी ग्रामीण परिवारों में ऐसे वयस्क सदस्य, जो कुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं, उन्हें वर्ष में 125 दिनों की रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जायेगी. श्रमिकों व किसानों के बीच समन्वय को ध्यान में रखते हुए फसल कटाई व बुआई के समय 60 दिनों की छुट्टी का प्रावधान है. समय पर मजदूरी भुगतान व विलंब की स्थिति में मुआवजा तथा रोजगार की मांग करने के उपरांत रोजगार नहीं मिलने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देय होगा. यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार के सशक्तीकरण, समावेशी विकास और समृद्ध व सक्षम ग्रामीण भारत के निर्माण के लिए काफी महत्वपूर्ण है और विकसित भारत 2047 के विजन के पूर्णता अनुरूप है. इनमें जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण अवसंरचना से जुड़े कार्य, आजीविका से जुड़े कार्य व जलवायु आपदा निवारण से जुड़े कार्यों की प्राथमिकता दी जायेगी.
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