आस्था पर उपेक्षा का दाग : 40 लाख का मंदार मुक्तिधाम बदहाल, अंधेरे और गंदगी में हो रहा अंतिम संस्कार

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फोटो कैप्शन :जर्जर मुक्तिधाम की तस्वीर   | Prabhat Khabar Network

जर्जर मुक्तिधाम की तस्वीर. | Prabhat Khabar Network

Dilapidated Mandar Muktidham : विश्व प्रसिद्ध मंदार पर्वत की तराई स्थित मुक्तिधाम आज उपेक्षा का शिकार है. 20 साल पहले बने इस मुक्तिधाम की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है, जहां अंतिम संस्कार अंधेरे और गंदगी के बीच हो रहा है. स्थानीय लोग इसके जीर्णोद्धार की मांग कर रहे हैं.

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Dilapidated Mandar Muktidham : बांका जिले के विश्व प्रसिद्ध मंदार पर्वत की तराई स्थित मुक्तिधाम इन दिनों उपेक्षा का शिकार है. करीब 20 वर्ष पहले लगभग 40 लाख रुपये की लागत से बने इस मुक्तिधाम में अब जर्जर शेड, टूटे चबूतरे, अंधेरा, जलजमाव और गंदगी के बीच लोगों को अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है. स्थानीय लोग वर्षों से इसके जीर्णोद्धार की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है.

कभी आधुनिक सुविधाओं से लैस था मुक्तिधाम

करीब दो दशक पहले मुक्तिधाम का निर्माण इस उद्देश्य से कराया गया था कि अंतिम संस्कार के दौरान लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो. यहां शेड, गार्ड रूम, महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग शौचालय, स्नानागार, चापाकल और बिजली की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी. लेकिन समय पर रखरखाव नहीं होने के कारण अधिकांश सुविधाएं पूरी तरह निष्प्रभावी हो चुकी हैं.

रात में अंधेरे में होता है अंतिम संस्कार

स्थानीय लोगों के अनुसार मुक्तिधाम में रात के समय बिजली की व्यवस्था नहीं रहने से पूरा परिसर अंधेरे में डूब जाता है. ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे लोगों को मोबाइल की टॉर्च या अन्य वैकल्पिक रोशनी का सहारा लेना पड़ता है. वहीं बारिश के दिनों में जलजमाव और कीचड़ से शव लेकर आने वालों की परेशानी और बढ़ जाती है.

गंदगी और दुर्गंध से बिगड़ रहे हालात

परिसर में नियमित सफाई नहीं होने के कारण जगह-जगह कचरे का अंबार और दुर्गंध फैली रहती है. जर्जर भवन और टूटते चबूतरे किसी भी समय हादसे का कारण बन सकते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से मरम्मत नहीं होने के कारण सरकारी संपत्ति धीरे-धीरे खंडहर में बदलती जा रही है.

मंदार की छवि पर भी पड़ रहा असर

मंदार पर्वत बिहार का प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है, जहां वर्षभर हजारों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं. ऐसे महत्वपूर्ण स्थल के समीप स्थित मुक्तिधाम की बदहाल स्थिति न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि क्षेत्र की पर्यटन छवि को भी प्रभावित कर रही है.

स्थानीय लोगों ने रखीं ये प्रमुख मांगें

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मुक्तिधाम का अविलंब जीर्णोद्धार कराने, बिजली और पेयजल व्यवस्था बहाल करने, हाईमास्ट लाइट लगाने, नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने तथा स्थायी रखरखाव की व्यवस्था लागू करने की मांग की है. उनका कहना है कि जीवन की अंतिम यात्रा भी सम्मान और गरिमा के साथ पूरी होनी चाहिए.

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संजीव कुमार

लेखक के बारे में

By संजीव कुमार

संजीव कुमार पाठक प्रिंट माध्यम में 18 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बौंसी (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक गतिविधि, खेल, इतिहास और राजनीतिक गतिविधियों की खबरों में रुचि रखते हैं.

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