अतिक्रमण की भेंट चढ़ रही जमुआ जोर, अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा

शहर के नदी व नहर का अस्तिव तेजी से मिटता जा रहा है. अनियोजित शहरीकरण व अतिक्रमण के कारण जीवन रेखा कही जाने वाली नदियां अब केवल गंदे नालों में तब्दील हो गयी है.
बांका. शहर के नदी व नहर का अस्तिव तेजी से मिटता जा रहा है. अनियोजित शहरीकरण व अतिक्रमण के कारण जीवन रेखा कही जाने वाली नदियां अब केवल गंदे नालों में तब्दील हो गयी है. इसको लेकर जिला कांग्रेस सेवा दल के अध्यक्ष मो. शमी हाशमी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जिला प्रशासन से शहर के अतिक्रमित नहरों व तालाबों की मापी कराकर उसे अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की है. जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने कहा है कि शहर के बीचों-बीच गुजर रहे जमुआ जोर इन दिनों अतिक्रमणकारियों की चपेट में है. साथ ही इन दिनों जमुआ जोर पुल के समीप कचरे का ढेर लगा हुआ है, जो जिले की स्वच्छ भारत मिशन अभियान की पोल खोल रही है, जबकि इस पुल से होकर रोजाना जनप्रतिनिधियों व वरीय पदाधिकारियों का गुजरना होता है. लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नही है. पुल को दोनों ओर स्थानीय लोग अतिक्रमण कर पक्का मकान तक बना रहे है. इसकी जानकारी रहते हुए भी नगर प्रशासन बेखबर है. उन्होंने आगे कहा कि लापरवाही का आलम यह है कि जमुआ जोर के बगल एक नहर था. जिसका अब नामो निशान मिटते जा रहा है. इस मामले में भी अब तक किसी तरह की कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने डीएम से 1905 के नक्शेे के आधार पर शहर समेत नगर परिषद के सभी वार्डों के नहर व पोखर की मापी कराकर अतिक्रण मुक्त कराने की मांग की है. साथ ही अतिक्रमित स्थलों की साफ-सफाई कराने की बात कही है.
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