बंगालगढ़ के लोगों के स्वास्थ्य में आया सुधार, तैयार की गयी रिपोर्ट

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 26 Jun 2024 11:00 PM

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जांच शिविर में तीन से 65 वर्ष के लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गयी

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जांच शिविर में तीन से 65 वर्ष के लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गयी कुपोषण उन्मूलन कार्यक्रम के तहत लगाया गया हेल्थ-कैंप कटोरिया. बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के तत्वावधान में कृषि विज्ञान केंद्र बांका व स्वयं सेवी संस्था मुक्ति निकेतन के सहयोग से बुधवार को चांदन प्रखंड के धनुवसार पंचायत अंतर्गत आदिवासी बाहुल बंगालगढ़ गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाया गया. इस दौरान शिविर में कृषि विज्ञान केंद्र बांका के नोडल सह कृषि वैज्ञानिक संजय कुमार मंडल व डा विकास कुमार सिंह मौजूद थे. वहीं शिविर में चांदन पीएचसी से पहुंची मेडिकल टीम ने तीन से 65 वर्ष तक के कुल 110 मरीजों का स्वास्थ्य जांच कर उन्हें आवश्यक दवा व उचित परामर्श भी दिये गये. इस क्रम में सभी मरीजों का हीमोग्लोबिन, हाईट, वजन, ब्लड प्रेशर आदि की जांच की गयी. साथ ही कुपोषण उन्मूलन कार्यक्रम के बाद बंगालगढ़ गांव के लोगों के स्वास्थ्य में आये सुधार की संबंधित रिपोर्ट भी तैयार की गयी. मेडिकल टीम में चिकित्सक डा भोलानाथ, हेल्थ मैनेजर परशुराम सिंह, सीएचओ मोहित कुमार, सुनील सिंह, एएनएम प्रियंका कुमारी, जयंती दोंगो, आशा कार्यकर्ता रानी टुडु आदि शामिल थे. स्वास्थ्य जांच शिविर को सफल बनाने में मुक्ति निकेतन के सचिव चिरंजीव कुमार सिंह व अध्यक्ष प्रणव कुमार सिंह ने अहम भूमिका निभायी. 25 परिवारों की जमीन पर बने हैं किचन-गार्डन कुपोषण उन्मूलन कार्यक्रम के तहत कृषि विज्ञान केंद्र बांका ने बंगालगढ़ गांव को अप्रैल 2024 में आगामी पांच वर्षों तक के लिए गोद लिया है. गांव के 25 परिवारों की जमीन पर किचन-गार्डन बनाया गया है. इसमें विभिन्न हरी व पौष्टिक सब्जियों जैसे भिंडी, करेला, कद्दू, खीरा के अलावा मौसमी फल जैसे केला, नींबू, अमरूद आदि लगाये गये हैं. महत्वपूर्ण बता यह है कि इन सब्जियों व फलों की खेती में सिर्फ जैविक खाद का ही प्रयोग किया जाता है. किचन गार्डन बनाने का मुख्य उद्देश्य बंगालगढ़ गांव के लोगों को कुपोषण से मुक्ति दिलाना और उनके स्वास्थ्य में बेहतर व सकारात्मक परिणाम लाना है. गांव के लोगों को नेचुरल विधि यानि हरी सब्जी व फलों का सेवन कराकर कुपोषण से मुक्ति दिलाने का लक्ष्य रखा गया है. चिहि्नत एनिमिक मरीजों की हेल्थ-रिपोर्ट में प्रत्येक माह सुधार को लेकर प्रयास किये जा रहे हैं. इसी कड़ी में बंगालगढ़ गांव में मोटा अनाज के रूप में मड़ुआ की खेती 65 हेक्टेयर में करायी जा रही है. जिंक व आयरन से भरपूर बायो-45 धान की भी खेती कराने की योजना बनायी गयी है. यहां पांच एकड़ भूमि में मूंग की फसल लगायी गयी है. कृषि विज्ञान केंद्र बांका के नोडल सह कृषि वैज्ञानिक संजय कुमार मंडल ने बताया कि बंगालगढ़ गांव का महीने में दो बार स्थल दा किया जाता है. कुपोषण से मुक्ति को लेकर लोगों को प्रशिक्षण देकर जागरूक किया जाता है. लोगों को हरी सब्जी व मौसमी फलों का सेवन करने के लिए प्रेरित भी किया जाता है.

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