भगवान मधुसूदन और भक्त के बीच खेली जायेगी अबीर और गुलाल की होली

Updated at : 12 Mar 2025 9:50 PM (IST)
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भगवान मधुसूदन और भक्त के बीच खेली जायेगी अबीर और गुलाल की होली

होलिका दहन के कार्यक्रम के साथ-साथ कल रंगोत्सव का कार्यक्रम किया जायेगा.

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फोटो 12 बौंसी 4. होली के मौके पर मधुसूदन मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़( फाइल तस्वीर)

संजीव पाठक, बौंसी. अंग क्षेत्र के सुप्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मधुसूदन मंदिर में ब्रज के तर्ज पर होली खेलने की तैयारी पूरी कर ली गयी है. जानकारी हो कि आज होलिका दहन के कार्यक्रम के साथ-साथ कल रंगोत्सव का कार्यक्रम किया जायेगा. जबकि 15 मार्च को भगवान मधुसूदन के दरबार में महाभंडारे का आयोजन होगा. स्थानीय पंडा समाज के साथ-साथ श्रद्धालुओं और समाज सेवियों के द्वारा इसकी तैयारी की गयी है. मालूम हो कि भगवान मधुसूदन की होली खेलने की परंपरा वर्षों पुरानी है. इस मौके पर प्रखंड क्षेत्र के अलावे बिहार, झारखंड से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और भगवान से गुलाल की होली खेलते हैं. होली को लेकर पिछले 15 दिनों से यहां पर श्रद्धालुओं के द्वारा होली गाने का कार्य किया जा रहा है.

सुबह में होगी विशेष पूजा अर्चना

जानकारी देते हुए पंडित अवधेश ठाकुर ने बताया कि मधुसूदन मंदिर में ब्रज की तर्ज पर भक्त और भगवान के बीच अबीर गुलाल खेलने की परंपरा है. होली के दिन दोपहर में रंगोत्सव जबकि शाम में अबीर खेलने का काम किया जाएगा. होली के दिन शाम में भगवान मधुसूदन को गर्भ गृह से छतरी के नीचे पुजारी के द्वारा भगवान को गोद में लेकर होली का भजन कीर्तन गाते हुए श्रद्धालुओं और भक्तों द्वारा उन्हें मंदिर के सामने बने फगदोल मंदिर में विराजमान कराया जायेगा. मालूम हो की मंदिर से फलदोल के चंद मिनट की दूरी तय करने में करीब तीन से चार घंटे का समय लगता है. इस पल का इंतजार श्रद्धालु पूरी श्रद्धा से करते हैं. इस दिन भगवान को होली की पारंपरिक मिठाई के साथ-साथ पुआ, खीर, पूड़ी के साथ-साथ 56 तरह के व्यंजन पड़ोसे जायेंगे. इसके पूर्व भगवान को स्नान कराकर नये वस्त्र पहनाये जायेंगे.

जय मधुसूदन जय मंदार की गूंजेंगे नारे

भगवान के गर्भ गृह से बाहर आते ही चारों ओर जय मधुसूदन जय मंदार के नारे श्रद्धालुओं द्वारा गुंजायमान किए जाते हैं. जयकारा लगाते हुए श्रद्धालु भगवान मधुसूदन को अबीर और गुलाल चढ़ाते हैं. जबकि भोली बाबा आश्रम के साथ-साथ मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं के द्वारा पारंपरिक ढोल, झाल, मृदंग सहित अन्य वाद्य यंत्रों के साथ भजन कीर्तन किया जाता है. इस दौरान बुजुर्ग, जवान, बच्चे, महिलाएं सब एक रंग में रंग जाते हैं. वृंदावन के तर्ज पर देर रात तक भगवान और भक्तों के बीच होली खेली जाती है. मौके पर मधुसूदन मंदिर को आकर्षक तरीके से रंगीन पताका से सजाया गया है. दूसरी ओर श्रद्धालुओं को पारंपरिक पाग के साथ-साथ राजस्थानी पगड़ी भी पंडा समाज के द्वारा पहनाई जाती है.

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SHUBHASH BAIDYA

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