मुख्य पार्षद उपचुनाव: पूर्व सभापति संतोष सिंह व बालमुकुंद सिन्हा के बीच सीधी लड़ाई

Updated at : 28 Jun 2025 8:27 PM (IST)
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मुख्य पार्षद उपचुनाव: पूर्व सभापति संतोष सिंह व बालमुकुंद सिन्हा के बीच सीधी लड़ाई

मुख्य पार्षद उपचुनाव के लिए मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. चुनाव में इस बार छह प्रत्याशियों ने भाग्य आजमाया था.

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उपचुनाव में दो प्रत्याशियों के बीच सिमटी जीत-हार की लड़ाई

बांका. मुख्य पार्षद उपचुनाव के लिए मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. चुनाव में इस बार छह प्रत्याशियों ने भाग्य आजमाया था. वोटिंग के बाद आये रुझान और चर्चा से यह साफ हो गया कि इस पद के लिए मुख्य रूप से दो ही प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर है. यह लड़ाई पूर्व सभापति संतोष कुमार सिंह व बालमुकुंद सिन्हा के बीच आकर सिमट गयी है. इन्हीं दो में से किसी एक की जीत होगी. शेष अन्य प्रत्याशी रेस से बाहर हो गये हैं. ज्ञात हो कि नगर निकाय के इस चुनाव में साम, दाम, दंड-भेद यानी सभी पैंतरे आजमाये गये.

30 जून को आएंगे नतीजे

चुनाव के दो दिन पहले ही यहां की लड़ाई काफी रोमांचक स्थिति में आ गयी. वोटर तेजी से पसंदीदा प्रत्याशी के साथ गोलबंद होने लगे. इसी बीच यह भी देखा गया कि वोटर दिन-रात पलटते रहे. वोटरों को मनाने और अपने पक्ष में लामबंद करने में प्रत्याशियों के पसीने छूट गये. कुछ मतदाताओं के कभी हां, कभी ना ने प्रत्याशियों को खूब परेशान किया. वोटरों को साधने के लिए प्रत्याशियों की लंबी दौड़ लगानी पड़ी. मतदान समाप्त होने पर एक तरह से प्रत्याशियों ने राहत की सांस ली. सभी की नजर अब 30 जून को आने वाले चुनावी नतीजे पर टिकी हुई है.

ज्ञात हो कि विगत आम चुनाव में भी संतोष कुमार सिंह और बालमुकुंद सिन्हा प्रत्याशी रह चुके हैं. पिछली बार संतोष कुमार सिंह दूसरे स्थान और बालमुकुंद सिन्हा ने तीसरे स्थान पर थे. दोनों प्रत्याशियों के लिए यह दूसरा चुनाव है, जिसमें सीधे जनता वोट करती है. कहा जाता है कि बालमुकुंद सिन्हा के साथ मजदूर वर्ग का भारी समर्थन रहता है. इस बार न केवल मजदूर, वंचित वर्ग, पिछड़ा बेहतर रूप से उनके साथ थे, बल्कि सवर्ण समाज में भी उन्होंने काफी वोट बटोरने में कामयाबी हासिल की है. जबकि, संतोष सिंह भी नगर निकाय की राजनीति के पुराने खिलाड़ी हैं, इनके साथ भी वोटरों का बड़ा कुनबा शुरु से जुड़ा रहता है. खास बात यह है कि विगत चुनाव में इन्होंने अपने रुतबे को वोट के माध्यम से साबित कर दिखाया है, जिसमें महज 77 वोट से यह पिछड़े थे. मसलन यह भी कि पिछला आम चुनाव काफी टस्ल के साथ आन का संघर्ष हो गया था. इसके अतिरिक्त खास बात यह है कि इन्हें हर वर्ग में वोट होने के साथ सवर्ण की कुछ खास जातियों का व्यापक समर्थन मिलने की बात कही जा रही है. इसलिए दोनों का सिक्का अबतक मजबूत बताया जा रहा है. देखना होगा कि इन दोनों में से किसके सिर जीत का ताज सजता है. जानकारों का मानना है कि नतीजे नजदीकी या कुछ हजार वोट के अंतर से भी आ सकते हैं.

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SHUBHASH BAIDYA

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