बकरीद से पहले गांवों के हाट में उमड़ी भीड़, 60 हजार तक बिके खस्सी

Published by : MD. TAZIM Updated At : 23 May 2026 3:28 PM

विज्ञापन

बकरीद (ईद-उल-अजहा) के करीब आते ही ग्रामीण इलाकों के हाट-बाजारों में रौनक बढ़ गयी है.

विज्ञापन

बौंसी (बांका) से संजीव पाठक की रिपोर्ट Banka News : बकरीद (ईद-उल-अजहा) के करीब आते ही ग्रामीण इलाकों के हाट-बाजारों में रौनक बढ़ गयी है. श्यामबाजार हाट में इस बार बकरों और खस्सियों की खरीदारी को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. दूर-दराज गांवों से पहुंचे खरीदारों ने अपने पसंद के जानवरों की खरीदारी की, जिससे पूरा बाजार दिनभर गुलजार बना रहा. खास तौर पर बड़े और तगड़े खस्सियों की भारी मांग रही, जिनकी कीमत 50 हजार से 60 हजार रुपये तक पहुंच गयी. भीषण गर्मी के बावजूद बाजार में लोगों की भीड़ कम नहीं हुई. कई खरीदार सुबह से ही हाट पहुंच गए थे ताकि अच्छी नस्ल और स्वस्थ बकरे खरीद सकें. विक्रेताओं ने बताया कि इस बार पशुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन पर्व को लेकर लोगों की आस्था और उत्साह के कारण खरीदारी पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ा. स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बताया कि 28 मई को सुबह ईदगाहों में विशेष नमाज अदा करने के बाद कुर्बानी की रस्म निभाई जाएगी. इससे पहले अंतिम जुम्मा की नमाज भी अकीदत के साथ पढ़ी जायेगी. लोगों ने कहा कि बकरीद सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि त्याग, इंसानियत और भाईचारे का संदेश देने वाला त्योहार है. कुर्बानी के बाद मांस को परंपरा के अनुसार तीन हिस्सों में बांटा जाता है. पहला हिस्सा अपने परिवार के लिए रखा जाता है, दूसरा रिश्तेदारों और परिचितों को दिया जाता है, जबकि तीसरा हिस्सा गरीब और जरूरतमंद लोगों में बांटा जाता है ताकि हर व्यक्ति पर्व की खुशियों में शामिल हो सके.

क्या है बकरीद का धार्मिक महत्व

जानकारी देते हुए बांका मल्लिक टोला निवासी डॉक्टर हसन ने बताया कि ईद-उल-अज़हा इस्लाम धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है. यह पर्व हजरत इब्राहिम की अल्लाह के प्रति अटूट आस्था और बलिदान की भावना की याद में मनाया जाता है. मान्यता है कि हजरत इब्राहिम ने अल्लाह के हुक्म पर अपने पुत्र हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने का निश्चय किया था. उनकी निष्ठा से प्रसन्न होकर अल्लाह ने उनके पुत्र को सुरक्षित रखा और उसकी जगह कुर्बानी के लिए एक जानवर भेजा. तभी से कुर्बानी की यह परंपरा चली आ रही है. बकरीद के मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोग कुर्बानी देकर त्याग, समर्पण और मानवता का संदेश देते हैं. साथ ही जरूरतमंदों की मदद कर सामाजिक भाइचारे को भी मजबूत करते हैं.

विज्ञापन
MD. TAZIM

लेखक के बारे में

By MD. TAZIM

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन