अमरपुर के किसान राजेश कुशवाहा ने पेश की नई मिसाल, 2 बीघे में 22 क्विंटल 'गरमा धान' की फसल का बंपर उत्पादन

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दो बीघा में22 क्विंटल उत्पादन, साल में दो बार धान की खेती कर बढ़ा रहे आमदनी

फोटो:खेतों में लहलहाते गरमा धान | Prabhat Khabar Network

Amarpur Farmer Success Story: बिहार के अमरपुर प्रखंड में किसान राजेश कुशवाहा ने गरमा धान की खेती कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है. मात्र दो बीघा खेत से 22 क्विंटल धान का बंपर उत्पादन कर उन्होंने अपनी आय दोगुनी करने का अचूक नुस्खा साबित किया है. उनकी इस सफलता से प्रेरित होकर आसपास के गांवों के किसान भी अब इस नई पद्धति को अपना रहे हैं.

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Amarpur Farmer Success Story: नकसोसा गांव निवासी राजेश कुशवाहा ने सीमित संसाधनों के बीच अपने दो बीघा खेत में गरमा धान की खेती कर इस सीजन में लगभग 22 क्विंटल धान का रिकॉर्ड उत्पादन प्राप्त किया है. कटिहार जिले से प्रेरित होकर शुरू की गई इस विशेष खेती की बदौलत वे अब साल में दो बार धान की फसल ले रहे हैं. उनकी इस अभूतपूर्व सफलता को देखने और तकनीकी गुर सीखने के लिए आसपास के गांवों से रोज दर्जनों किसान उनके खेतों पर पहुंच रहे हैं.

कटिहार यात्रा ने बदला राजेश का भाग्य, ऐसे मिली प्रेरणा

किसान राजेश कुशवाहा ने अपनी सफलता का सफर साझा करते हुए बताया कि कुछ वर्ष पूर्व वे कटिहार जिले में स्थित अपने एक मित्र के गांव गए थे. वहां उन्होंने पहली बार बड़े पैमाने पर गरमा धान की लहलहाती फसल और उससे किसानों को होने वाले तगड़े मुनाफे को देखा. इससे प्रभावित होकर उन्होंने वहां के स्थानीय किसानों से बीज चयन, रोपाई, सिंचाई चक्र और खाद प्रबंधन की पूरी बारीकियां समझीं और इसे अपने गृह प्रखंड अमरपुर में आजमाने का दृढ़ संकल्प लिया.

कड़ाके की ठंड में नर्सरी और गर्मी में बंपर कटाई

पारंपरिक धान के विपरीत, गरमा धान की खेती का चक्र बेहद चुनौतीपूर्ण और अलग होता है. राजेश कुशवाहा की कृषि पद्धति के मुख्य चरण इस प्रकार रहे:

  • नर्सरी (बिचड़ा) की तैयारी: वे कटिहार से उन्नत किस्म के बीज लाए और कड़ाके की ठंड के बीच दिसंबर माह में अपने खेतों में नर्सरी तैयार की.
  • रोपाई: पौधों के तैयार होने के बाद फरवरी माह में उन्होंने दो बीघा समतल खेत में वैज्ञानिक पद्धति से धान की रोपाई कर दी.
  • फसल चक्र: नियमित पटवन (सिंचाई) और उचित देखरेख के बाद मात्र चार महीने के भीतर फसल पूरी तरह पककर तैयार हो गई, जिसकी हाल ही में कटाई संपन्न हुई है.

साल में दो बार धान: आय दोगुनी करने का अचूक नुस्खा

"गरमा धान की खेती का सबसे बड़ा यूएसपी (लाभ) यह है कि इसके जरिए किसान एक ही खेत से वर्ष में दो बार धान की फसल काटकर अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकते हैं. इस वर्ष मुझे दो बीघे से 22 क्विंटल उपज मिली है, जो सामान्य सीजन के धान से कहीं ज्यादा बेहतर और कम लागत वाली है." — राजेश कुशवाहा, प्रगतिशील किसान

सरकारी सहयोग मिले तो अमरपुर बनेगा नया राइस हब

राजेश कुशवाहा ने बताया कि वर्तमान में वे निजी पंपसेट और सीमित संसाधनों के भरोसे यह खेती कर रहे हैं. उन्होंने बिहार सरकार और कृषि विभाग से गुहार लगाई है कि यदि क्षेत्र के किसानों को समय पर तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण बीज, बिजली-सिंचाई की शत-प्रतिशत सुविधा और वित्तीय अनुदान (आर्थिक सहायता) दी जाए, तो अमरपुर प्रखंड में गरमा धान का रकबा काफी बढ़ाया जा सकता है. इससे स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर कृषि रोजगार पैदा होंगे.

कृषि विशेषज्ञों की राय: वैकल्पिक फसलों को अपनाना समय की मांग

अमरपुर क्षेत्र के कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने भी राजेश कुशवाहा की इस पहल की मुक्तकंठ से सराहना की है. विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित मॉनसून के इस दौर में किसानों को केवल खरीफ फसलों पर निर्भर रहने के बजाय गरमा धान जैसे वैकल्पिक और कम समय वाले विकल्पों को अपनाना चाहिए, ताकि न्यूनतम जोत में भी अधिकतम आय सुनिश्चित की जा सके. नकसोसा गांव से शुरू हुआ कृषि का यह नया अध्याय अब पूरे अमरपुर क्षेत्र में कृषि क्रांति की नई राह दिखा रहा है.


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प्रीतम कुमार

लेखक के बारे में

By प्रीतम कुमार

प्रीतम कुमार प्रिंट माध्यम में 12 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं. अमरपुर (बांका) क्षेत्र में काम कर रहे हैं.

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