खतरे में पड़ सकता है लोगों का स्वास्थ्य
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :20 Apr 2017 6:14 AM (IST)
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क्राइम . जिले में कई कंपनियां बिना लाइसेंस के बेच रहा है लोगों को पानी मैन्युफैक्चरिंग डेट से एक सप्ताह के अंदर विक्रेता को पानी का पाउच या जार बेचना होता है. बांका : गरमी की शुरुआत के साथ ही शहर के विभिन्न दुकानों में कोल्ड ड्रिंक व पानी जार की बिक्री तेज हो गयी […]
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क्राइम . जिले में कई कंपनियां बिना लाइसेंस के बेच रहा है लोगों को पानी
मैन्युफैक्चरिंग डेट से एक सप्ताह के अंदर विक्रेता को पानी का पाउच या जार बेचना होता है.
बांका : गरमी की शुरुआत के साथ ही शहर के विभिन्न दुकानों में कोल्ड ड्रिंक व पानी जार की बिक्री तेज हो गयी है. साथ ही साथ शहर में विभिन्न पानी विक्रेता बिना मानक के ही पानी का जार व पाउच को धड़ल्ले से बेज रहे हैं. जिसमें पैक पानी कहने को तो फिल्टर का होता है मगर जार के ऊपर मैन्युफेक्चरिंग डेट व निर्माताओं का नाम व पता भी नहीं दर्शाया जा रहा है, ताकि गड़बड़ी पाये जाने की स्थिति में लोग संबंधित निर्माता कंपनी की शिकायत दर्ज नहीं करा सके. इससे दुकानदारों में कार्रवाई का कोई भय नहीं है. वहीं दूसरी ओर पानी विक्रेता लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.
क्या है नियम : किसी भी कंपनी को पानी के पाउच निर्माण के लिए नगर प्रशासन व उद्योग विभाग के द्वारा जारी लाइसेंस की आवश्यकता होती है. वहीं पर्यावरण विभाग की अनुमति भी इसके लिए जरूरी होती है. डॉ अशोक कुमार सिंह ने बताया कि प्लास्टिक जार में पानी रखने की एक अवधि निश्चित होती है. इसके बाद उनका उपयोग करने से पीलिया, टाइफाइड जैसी बीमारी होने की आशंका बनी रहती है. स्थानीय लोगों की मानें तो जिले भर में रोज हजारों जार पानी की खपत हो रही है.
क्या कहते हैं अधिकारी : इस संबंध में नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी बीके तरूण ने बताया कि एक-दो जार विक्रेता को छोड़कर किसी ने ट्रेड लाइसेंस नहीं लिया है. वहीं उद्योग विभाग के महाप्रबंधक रतन कुमार ने बताया है कि जार विक्रेता ऑन लाइन कर लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं. बोतलबंद पानी के लिए बीएसआइ व आरएसआइ मार्का जरूरी है.
पानी के जार से जानकारी रहती है गायब
नियमत: पानी के डब्बा पर मैन्युफेक्चरिंग डेट होना अनिवार्य होता है. जिससे यह पता चल सके कि जार या पाउच में पानी कब भरा गया है और इनका इस्तेमाल कब तक किया जाना है. वहीं पानी के मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा है. जानकार बताते हैं कि एक व आधा लीटर की बोतल में आइएसआइ और वीएसआइ के द्वारा लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है. जबकि पानी जार के लिए यह आवश्यक नहीं है. इसको लेकर पानी जार के विक्रेता मशीन से पानी को फिल्टर कर टीडीएस को कम कर पानी को मीठा बनाकर बाजार में बेच रहे हैं. इन पानी विक्रेता के पास वाटर टेस्टिंग लैब नहीं है. जिसके कारण पानी के कई महत्वपूर्ण अवयव पानी से गायब रहते हैं. बावजूद शहरवासी इन पानी को धड़ल्ले से खरीद रहे हैं. शहर में ऐसे पानी विक्रेता के बीच आधा दर्जन के पास ही लाइसेंस व मानक युक्त पानी है. शेष कारोबारी के पास मानक की गारंटी नहीं है.
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