विस में गूंजा लक्ष्मीपुर मंदिर का मामला

Published at :30 Mar 2017 5:04 AM (IST)
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विस में गूंजा लक्ष्मीपुर मंदिर का मामला

पर्यटन विभाग ने पर्यटक स्थल के लिए डीएम से मांगी रिपोर्ट कटोरिया : कटोरिया प्रखंड मुख्यालय से लगभग 28 किलोमीटर दूर लक्ष्मीपुर गांव स्थित प्राचीन मंदिरों की उपेक्षा का मामला विधानसभा में भी गूंजा. कटोरिया की राजद विधायक स्वीटी सीमा हेंब्रम ने पर्यटन मंत्री को लगभग चार सौ वर्ष पुराने लक्ष्मीपुर के मंदिरों की दुर्दशा […]

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पर्यटन विभाग ने पर्यटक स्थल के लिए डीएम से मांगी रिपोर्ट

कटोरिया : कटोरिया प्रखंड मुख्यालय से लगभग 28 किलोमीटर दूर लक्ष्मीपुर गांव स्थित प्राचीन मंदिरों की उपेक्षा का मामला विधानसभा में भी गूंजा. कटोरिया की राजद विधायक स्वीटी सीमा हेंब्रम ने पर्यटन मंत्री को लगभग चार सौ वर्ष पुराने लक्ष्मीपुर के मंदिरों की दुर्दशा से अवगत कराते हुए बताया कि समुचित रखरखाव के अभाव में मंदिरों की हालत जीण-शीर्ण अवस्था में है. विधायक ने मंत्री से विधानसभा में सवाल किया कि क्या विभाग को इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने हेतु पहल नहीं करनी चाहिये. विधायक द्वारा उठाये गये सवाल को पर्यटन मंत्री ने गंभीरता से लिया है. पर्यटन विभाग ने डीएम से लक्ष्मीपुर मंदिर के विकास एवं पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. डीएम ने कटोरिया बीडीओ से इस संबंध में त्वरित प्रतिवेदन भी मंगायी है.
मूर्तियों की चोरी से वीरान है लक्ष्मीपुर: कटोरिया प्रखंड के बसमत्ता पंचायत अंतर्गत राज लक्ष्मीपुर के ठाकुर प्रताप नारायण देव ने काली देवी की मूर्ति को नरबलि देकर स्थापित किया था. ऐसी किंवदंती है कि कई वर्षों तक देवी को खुश रखने हेतु मंदिर परिसर में नरबलि दी जाती रही. गांव के लोगों का मानना है कि सिद्धदेवी के दरबार से कोई भी दुखियारी आज तक निराश नहीं लौटी है. लक्ष्मीपुर के राजा तांत्रिक थे, जिा कारण यहां हाल के दिनों तक दूर-दूर से तांत्रिक अपनी सिद्धि पूजा के लिये यहां आते रहे. लक्ष्मीपुर में कुल सात मंदिर है. जिसमें शिव, पार्वती, काली, भुवनेश्वरी, अन्नपूर्णा, दुर्गा व अनंत बासुदेव (ठाकुरबाड़ी) के मंदिर शामिल हैं. मूर्ति तस्करों ने यहां से गत 17 फरवरी 2001 को अनंत बासुदेव की मूर्ति एवं 10 सितंबर 2004 ई को भुवनेश्वरी व काली की बेशकीमती मूर्तियां चुरा ली.
ग्रामीणों में जगी आस: लक्ष्मीपुर के मंदिरों की देखरेख हेतु ग्रामीण स्तर पर गठित जीर्णोद्धार कमिटी द्वारा ही रंग-रोगण व साफ-सफाई का कार्य किया जाता है. कमिटी के सचिव भोलेशंकर साह व सक्रिय सदस्य सदाशिव भगत आदि मंदिर परिसर के तालाब में होने वाले मछली पालन की आमदनी से खर्च वहन करते हैं. मंदिर के पुजारी जगदेव मिश्र, मुखिया सच्चिदानंद यादव, सरपंच अरूण मिश्र, पंसस राधिका देवी, पूर्व मुखिया नारायण भगत, विभूति कुमार आदि ने भी लक्ष्मीपुर के प्राचीन मंदिर परिसर को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की मांग सरकार से की है.
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