रब्बीडीह में विकास की आस

Published at :23 Oct 2016 2:09 AM (IST)
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रब्बीडीह में विकास की आस

ग्रामीण उत्साहित . मुख्यमंत्री करेंगे धोरैया विधानसभा क्षेत्र का दौरा कच्ची पगडंडी के सहारे हैं ग्रामीण. बरसात के समय में यह गांव टापू बन जाता है. प्रखंड मुख्यालय से महज पांच-छह किमी दूर स्थित यह अल्पसंख्यक बहुल गांव है. बांका : विकास पुरुष के नाम से पूरे भारत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले बिहार […]

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ग्रामीण उत्साहित . मुख्यमंत्री करेंगे धोरैया विधानसभा क्षेत्र का दौरा

कच्ची पगडंडी के सहारे हैं ग्रामीण.
बरसात के समय में यह गांव टापू बन जाता है. प्रखंड मुख्यालय से महज पांच-छह किमी दूर स्थित यह अल्पसंख्यक बहुल गांव है.
बांका : विकास पुरुष के नाम से पूरे भारत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आगामी 25 अक्तूबर को बांका पहुंच रहे हैं. मुख्यमंत्री बांका से धोरैया विधानसभा का भी दौरा करेंगे. इसी विधानसभा का एक प्रखंड है धोरैया, जहां का एक अल्पसंख्यक बाहुल्य गांव रब्बीडीह है
जो विकास से काफी दूर है. इस गांव में बिजली, पानी, सड़क व शिक्षा जैसी मूलभूत समस्या मुंह बाये खड़ी है. जहां लोगों को गांव से बाहर निकलने के लिए मिरचिनी नदी को पार करना पड़ता है. और तो और बरसात के समय में यहां के लोग घर से बाहर निकलने में असमर्थ हो जाते हैं. इस दौरान किसी भी तरह की अनहोनी होने पर गांव के लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. बताया जा रहा है कि किसी कि मौत तक हो जाने पर भी उसे कब्रगाह नसीब नहीं होती है.
और मजबूरन उन्हें घर व गांव के किसी कोने में ही दफन कर दिया जाता है. ऐसे में गांव के कई लोगों का कहना है कि गांव की बदहाली की कहानी इस बार मुख्यमंत्री को जरूर सुनाएंगे. वहीं कुछ लोगों का कहना था कि हो ना हो मुख्यमंत्री के आगमन से इस गांव की तसवीर व तकदीर बदल जाय. मुख्यमंत्री की आगमन की सूचना से गांव वासियों में उम्मीद की किरण जगी है.
गांव में मूलभूत सुविधाओं का भी है घोर अभाव
गांव में एक प्राथमिक विद्यालय है. जहां पर बच्चे भी नदी पार कर स्कूल जाते हैं. स्वास्थ्य उपकेंद्र गांव से दो किलोमीटर दूर है. गांव में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत लगाया गया ट्रांसफाॅर्मर जला पड़ा है. बिजली नहीं रहने से लोग लालटेन युग में जीने को विवश हैं. करीब 4500 की आबादी वाले अल्पसंख्यक बहुल इस गांव में दो टोला है. जिसमें एक टोला महादलित समुदायों का है.
बाढ़ के दौरान तीन-तीन शव दफनाये गये हैं घर में
स्थानीय ग्रामीण उमर फारूक ने बताया कि बरसात के दौरान उनलोगों को भगवान भरोसे ही रहना पड़ता है. नदी में पानी आने पर लोग भयाक्रांत हो जाते हैं. उन्होंने बताया कि बाढ़ के दौरान 15 दिनों तक पानी से घिरे रहने के कारण गांव के तीन लोगों की शव मजबूरी में घर में ही दफना दिया गया. पानी से घिरे रहने के कारण अपने आप को बेसहारा देख लोगों ने गत वर्ष गांव के मरहूम मो नसीबुल्ला, मो शहादत व मोहम्मद मियां के शव को घर में ही दफना दिया. ऐसी स्थिति यहां आज भी बनी हुई है. बताया जा रहा है कि जमीन के अभाव में नसीबुल्ला की कब्र के बगल में ही घर की महिलायें चूल्हा जला कर खाना पकाती हैं. वहीं मोहम्मद मियां की कब्र पर ही मकान बनाकर घरवाले रह रहे हैं.
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