अब चॉकलेट खाकर ज्यादा दूध देंगे मवेशी अनुसंधान. बढ़ेगी रोग प्रतिरोधक क्षमता

Published at :04 Oct 2016 4:29 AM (IST)
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अब चॉकलेट खाकर ज्यादा दूध देंगे मवेशी अनुसंधान. बढ़ेगी रोग प्रतिरोधक क्षमता

कृषि विज्ञान कें्द्र बांका ने पशुओं के लिए चॉकलेट का निर्माण किया है. घर में इसका आसानी से निर्माण किया जा सकता है. इसके उपयोग से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. कम लागत में आसानी से उपलब्ध है. बांका : अब जिले के पशुपालक ही तैयार करेंगे पशुओं के लिए मल्टी विटामिन व […]

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कृषि विज्ञान कें्द्र बांका ने पशुओं के लिए चॉकलेट का निर्माण किया है. घर में इसका आसानी से निर्माण किया जा सकता है. इसके उपयोग से पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. कम लागत में आसानी से उपलब्ध है.

बांका : अब जिले के पशुपालक ही तैयार करेंगे पशुओं के लिए मल्टी विटामिन व मिनरल्स. इसे आसान शब्दों में चॉकलेट कह सकते है. इसकी सभी तैयारी कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा की जा चुकी है. सोमवार को इसका ट्रायल भी किया गया, जो पूरी तरह सफल भी रहा. ट्रायल सफल होने पर कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों के बीच खुशी की लहर दौड़ पड़ी. बनाये गये चॉकलेट को मवेशी को खिला कर इसकी जांच की गयी. चॉकलेट को खिलाने के बाद मवेशी में किसी भी प्रकार का साइड इफैक्ट नहीं आया. लेकिन इसके खाने के बाद मवेशी में पॉजिटिव चीजें देखने को मिली. इससे मवेशी को काफी फायदा पहुंचा.
बढ़ती है गर्भधारण क्षमता
चॉकलेट दिखाते वैज्ञानिक.
पशुओं को कितनी दी जायेगी मात्रा: बड़े पशुओं में यानी गाय व भैंस को 300 ग्राम चॉकलेट की मात्रा दी जायेगी. जबकि बकरी व खस्सी को 50 ग्राम की मात्रा दी जानी है. लेकिन वर्तमान में जो चॉकलेट बनाया गया है उसका वजन दो किलोग्राम है. आगे इसके फरमे को छोटे रूप में तैयार कर कम मात्रा में बनाया जायेगा.
कहती हैं समन्वयक
मल्टी विटामिन्स एवं मिनरल्स से भरपूर इस चॉकलेट का निर्माण कृषि विज्ञान केंद्र के पशु वैज्ञानिक डॉ धर्मेंद्र कुमार एवं सहयोगी द्वारा किया गया है. इस प्रकार के चॉकलेट के निर्माण में बांका राज्य का पहला जिला है. कम लागत में अधिक फायदा इस चॉकलेट की पहचान है.
कुमारी शारदा, समन्वयक, कृषि विज्ञान केंद्र, बांका
चॉकलेट बनाने की सामग्री
चॉकलेट को बनाने के लिए छोइया गुड़, चोकर, चुन्नी, मिनरल्स, नमक, कुरथी, यूरिया एवं स्थानीय क्षेत्रों में उपलब्ध खाद्य सामग्री, जो आसानी से बाजारों में उपलब्ध होता है, को मिलाकर इसे तैयार किया जाता है. इसकी लागत फायदे के अनुरूप बहुत ही कम है. चॉकलेट के खाने से मवेशी को जितना फायदा हो रहा है, लागत उतनी ही कम है. कृषि विज्ञान केंद्र बांका द्वारा तैयार यह चॉकलेट पूरी तरह सफल है.
चॉकलेट के फायदे
चॉकलेट के निर्माण के बाद जब इसका प्रयोग मवेशियों पर किया गया, तो यह पूरी तरह सफल रहा. इस चॉकलेट के खाने के बाद सभी प्रकार के मवेशियों में विटामिन की पूर्ति हुई. जो मवेशी कम दूध दे रहे थे, उनमें दूध की मात्रा में अप्रत्याशित वृद्धि हो गयी. इस चॉकलेट का सेवन करने वाली गाय अन्य गायों की अपेक्षा समय पर गरम हो जा रही है. प्राय: यह देखा गया है कि पशु छोटी मोटी बीमारी की वजह से हमेशा बीमार रहते हैं. इस चॉकलेट का सेवन करने वाले पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है. यानी बीमारी से लड़ने की शक्ति अधिक हो जाती है. बकरी व खस्सी में प्राय: यह बीमारी रहती है कि वे रुक-रुक कर पेशाब करते हैं. इस चॉकलेट के सेवन से यह बीमारी नियंत्रित होकर लगभग नगण्य हो जाती है.
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