सजने लगा माता भवानी का दरबार

Published at :03 Oct 2016 4:13 AM (IST)
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सजने लगा माता भवानी का दरबार

शारदीय नवरात्र . दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की गयी जिले भर में पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है. दुर्गा सप्तशती के पाठ से भक्तिमय माहौल हो रहा है. बांका : जिले भर के दुर्गा मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए सुबह से ही श्रद्धालु की […]

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शारदीय नवरात्र . दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की गयी

जिले भर में पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है. दुर्गा सप्तशती के पाठ से भक्तिमय माहौल हो रहा है.
बांका : जिले भर के दुर्गा मंदिरों में पूजा अर्चना के लिए सुबह से ही श्रद्धालु की भीड़ लगने लगी है. रविवार को शहर स्थित चोरों दुर्गा मंदिरों में पूजा अर्चना विधि-विधान से की गयी. करहरिया मुहल्ला स्थित दुर्गा मंदिर में दिन भर पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी रहा. यहां के विभिन्न मंदिरों में नवरात्र के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने दुर्गा के दूसरे स्वरुप ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की.
शास्त्रों के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में अक्ष माला और बाएं हाथ में कमंडल है. मां दुर्गा ने पार्वती के रूप में पर्वतराज के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और नारद के कहने पर पार्वती ने शिव को पति मानकर अनको पाने के लिए कठोर तपस्या की. वर्षों तक तपस्या करने के बाद इनका नाम तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी पड़ा. जो नवरात्र के दूसरें दिन इसी तप को प्रतीक के रूप में पूजा की जाती है. देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है. मां ब्रह्मचारिणी देवी की कृपा से सर्वसिद्धि प्राप्त होती है. नवरात्र के तीसरे दिन तीसरी शक्ति चंद्रघंटा देवी की पूजा अर्चना होगी.
मां का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है. इसी लिए कहा जाता है कि श्रद्धालुओं को निरंतर उनके पवित्र विग्रह को ध्यान में रखकर साधना करना चाहिए. उनका ध्यान हमारे इहलोक और परलोक दोनों के लिए कल्याणकारी और सद्गति देने वाली है. मां के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है. इसीलिए देवी को चंद्रघंटा कहा गया है. इनके शरीर का रंग सोने के समान बहुत चमकीला है. इस स्वरूप में मां के दसों हाथ खड्ग व अस्त्र-शस्त्र से विभूषित हैं. इसके घंटे की भयानक ध्वनि से अत्याचारी दानव-दैत्य और राक्षस कांपते रहते हैं. नवरात्रि में तीसरे दिन इसी देवी की पूजा का महत्व है. इस देवी की कृपा से साधक को अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं. दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और कई तरह की ध्वनियां सुनाईं देने लगती हैं. इन क्षणों में साधक को बहुत सावधान रहना चाहिए. देवी की आराधना से साधक में वीरता और निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का विकास होता है. श्रद्धालुओं को चाहिए कि मन, वचन और कर्म के साथ ही काया को विहित विधि-विधान के अनुसार परिशुद्ध-पवित्र करके चंद्रघंटा के शरणागत होकर उनकी उपासना-आराधना करना चाहिए.
मां के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की हुई पूजा . शंभुगंज : प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न दुर्गा मंदिर में शनिवार को कलश स्थापना के साथ ही शारदीय नवरात्र शुरू हो गया है. रविवार को इन दुर्गा मंदिर में मां भगवती के ब्रह‍्मचारिणी स्वरूप की पूजा की गयी. इसको लेकर कसबा, मिर्जापुर, गुलनी कुशाहा, भरतशिला, चटमाडीह, वैदपुर, प्रतापपुर, शंभुगंज व तिलडीहा दुर्गा मंदिरों में भक्तों द्वारा किये जा रहा दुर्गा सप्तशती पाठ से यहां का वातावरण भक्तिमय हो गया है. सप्तशती पाठ करने वाले श्रद्धालु संतोष कुमार, रौशन कुमार, कैलाश झा, गौरी झा, शिवानंद झा आदि कहते हैं कि मां की भक्ति से ही शक्ति मिलती है.
बौंसी. रविवार को दुर्गा मंदिरों में ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की गयी. बाजार के पुरानी हाट देवी मंदिर, कुड़रो देवी मंदिर, फागा मंदिर, शक्तिनगर देवी मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी.
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