राज्य में पूर्ण शराबबंदी. कैबिनेट के फैसले के बाद जिले में खुशी की लहर

Published at :06 Apr 2016 6:19 AM (IST)
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राज्य में पूर्ण शराबबंदी. कैबिनेट के फैसले के बाद जिले में खुशी की लहर

अब नहीं उजड़ेगा किसी का घर परिवार राज्य में पूर्ण शराबबंदी के नीतीश कुमार कैबिनेट के फैसले के बाद जिले में खुशी की लहर है. घोषणा के बाद शराब दुकान बंद रहे. वहीं महिलाअों ने सरकार के इस फैसले पर खुशी जाहिर की. बांका : अब नहीं उजड़ेगा किसी का घर परिवार…… शराब की वजह […]

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अब नहीं उजड़ेगा किसी का घर परिवार

राज्य में पूर्ण शराबबंदी के नीतीश कुमार कैबिनेट के फैसले के बाद जिले में खुशी की लहर है. घोषणा के बाद शराब दुकान बंद रहे. वहीं महिलाअों ने सरकार के इस फैसले पर खुशी जाहिर की.
बांका : अब नहीं उजड़ेगा किसी का घर परिवार…… शराब की वजह से. सूबे में सभी तरह की शराब पर पूरी तरह पाबंदी लग गयी है. राज्य में शराब युग का अंत हो गया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में राज्य कैबिनेट ने मंगलवार को इस आशय का ऐतिहासिक फैसला लिया. अब राज्य में देशी के साथ साथ विदेशी शराब पर भी पूरी तरह रोक लग गयी है.
इस फैसले के बाद होटलों और बारों में भी शराब नहीं मिल पायेगी. सरकार इसके लिए लाइसेंस ही नहीं देगी. देशी शराब पर प्रतिबंध के बाद शराब माफियाओं और ठेकेदारों में इस बात को लेकर उम्मीद की एक किरण जगी हुई थी कि विदेशी शराब के ठेके और लाइसेंस की आड़ में उनका कारोबार किसी तरह चल पायेगा. हालांकि सरकार ने तब भी स्पष्ट कर दिया था
कि विदेशी शराब की बिक्री सरकारी नियंत्रण में होगी और इसके लिए दुकानें चलाने के लाइसेंस बीएसबीसीएल यानि बिहार राज्य बेवरेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड को दिये जायेंगे. बांका जिले में देशी, विदेशी और कंपोजिट शराब की 42 लाइसेंसी दुकानें थीं. ये दुकानें 31 मार्च की रात 10 बजे से बंद हैं.
हालांकि जिले में चोरी छुपे अवैध शराब का कारोबार अब भी जारी है. देशी शराब पर प्रतिबंध लगाये जाने के चार दिनों के भीतर जिले के विभिन्न ठिकानों से करीब 450 लीटर अवैध शराब पुलिस द्वारा जब्त किये जा चुके हैं. सरकार की पूर्व नीतियों के मुताबिक बांका के नगर परिषद के तौर पर अधिसूचित हो जाने के बाद शहर में विदेशी शराब की 4 दुकानों के लाइसेंस दिये जाने के प्रस्ताव थे. लेकिन मंगलवार को राज्य में पूर्ण शराबबंदी के कैबिनेट के फैसले के बाद इस पर पूर्ण विराम लग गया है. अब न मिलेंगी और न कोई पी पायेगा शराब और न ही उजड़ेगा
किसी का घर परिवार……. ! शराब युग के खात्मे ने दशकों से चल रहे इस नशा मुक्ति नारे की प्रासंगिकता को भले ही फिलहाल कमतर कर दिया हो, लेकिन इस नारे को राज्य भर में इसकी मंजिल तो अब मिल ही गयी है.
हो गया शराब युग का अंत: पूर्ण शराबबंदी की राज्य सरकार की घोषणा के बाद जिले में चौतरफा खुशी का माहौल है. हर ओर सरकार के इस निर्णय का तहेदिल से स्वागत हो रहा है. पूर्ण शराबबंदी कर बिहार देश में गुजरात, नागालैंड और मिजोरम के बाद इस सूची में चौथे राज्य के रूप में शामिल हो गया है. बिहार अब ड्राय स्टेट बन चुका है. यह बिहार और बिहारियों के लिए गौरव की ब ात है. लोग इसी आशय की प्रतिक्रिया भी व्यक्त कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि राज्य सरकार ने इस फैसले के जरिये बिहार में सामाजिक परिवर्तन की आधारशिला रखी है.
नारी शक्ति की जीत है पूर्ण शराबबंदी : पूर्ण शराबबंदी राज्य की नारी शक्ति की जीत है. शराब के नशे ने जिस तबके को सर्वाधिक मर्माहत किया वह महिला समुदाय ही है. शराब ने हजारों लाखों परिवारों को कहीं नहीं छोड़ा. महिला शक्ति शराब के खिलाफ एकजुट होती जा रही थी. उन्होंने समय समय पर इस दिशा में आवाज भी बुलंद की. अंतत: उनकी आवाज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुन ली. राज्य को पूर्ण शराबबंदी का तोहफा देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा भी है कि यह निर्णय महिलाओं की जीत है. क्योंकि निर्णय के पीछे महिलाओं की मांग ही है.
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