अप्रैल की शुरुआत में ही रिकॉर्ड तोड़ गरमी. हलकान हो रहा जनजीवन

Published at :06 Apr 2016 6:15 AM (IST)
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अप्रैल की शुरुआत में ही रिकॉर्ड तोड़ गरमी. हलकान हो रहा जनजीवन

चैत में जेठ की दोपहरी का एहसास गरमी ने मजबूती से धमक दी है. प्रारंभिक दिनों में ही तापमान 49 डिग्री सेल्सियस जा पहुंचा है. यह लगातार बढ़ रहा है. वहीं उमड़ते-घुमड़ते बादल देख किसान परेशान हैं. गरमी के साथ उमस से बीमारियों में भी वृद्धि हुई है. बांका : अप्रैल की शुरुआत में ही […]

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चैत में जेठ की दोपहरी का एहसास

गरमी ने मजबूती से धमक दी है. प्रारंभिक दिनों में ही तापमान 49 डिग्री सेल्सियस जा पहुंचा है. यह लगातार बढ़ रहा है. वहीं उमड़ते-घुमड़ते बादल देख किसान परेशान हैं. गरमी के साथ उमस से बीमारियों में भी वृद्धि हुई है.
बांका : अप्रैल की शुरुआत में ही रिकॉर्ड गरमी ने जन जीवन को प्रभावित कर दिया है. पिछल चार-पांच दिनों तक बादलों की आंख मिचौनी, जहां – तहां बारिश और तेज हवा के झोकों ने जो खुशनुमा माहौल बनाया था, वह मंगलवार को पूरी तरह बदल गया. इस दिन तेज धूप के साथ गर्म हवा के झोके ने जेठ की दोपहरी की याद दिला दी. लोग चर्चा करने लगे हैं कि जब चैत में यह हाल है तो सचमुच जेठ में क्या स्थिति होगी. मंगलवार को इस क्षेत्र में अधिकतम तापमान 39 डिग्री तथा न्यूनतम 24 डिग्री सें.
रहा. हवा की आर्द्रता 65 प्रतिशत रही. सुबह हालांकि आसमान में मंडराते बादलों के साथ हुई. वातावरण में कोहरा भी रहा. लेकिन दिन चढ़ते जाने के साथ ही माहौल गर्म होता चला गया. सोमवार को भी कमोबेश यही स्थिति रही थी. बुधवार को भी तापमान मंगलवार की तरह कायम रहने की उम्मीद व्यक्त की गयी है. मौसम विभाग के सूत्रों के मुताबिक मंगलवार से लेकर शुक्रवार तक अधिकतम तापमान 39 से 40 डिग्री तथा न्यूनतम 23 से 25 डिग्री तक रहने की उम्मीद है. इस दौरान आसमान में बादल भी आते जाते रहेंगे. जहां तहां बारिश भी होने का अनुमान व्यक्त किया गया है. मौसम के बनते बिगड़ते स्वरूप को लेकर एक ओर जहां जन जीवन प्रभावित होने लगा है, वहीं किसान अपनी रबी फसल के भविष्य को लेकर चिंतित हैं. जिन किसानों की फसल कटकर घर या खलियान पर पहुंच चुकी है वे यथा संभव जल्दी से इनकी तैयारी करने में लगे हैं. बांका नगर पंचायत के विजयनगर निवासी किसान परमानंद झा ने बताया कि बारिश में भींगने से फसल में नमी के कारण अंकुर हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो फसल पूरी तरह बर्बाद हो जायेगी. उधर जो फसल खेतों में हैं, किसान उन्हें काटने से कतरा रहे हैं. किसान इन स्थितियों में दोहरी परेशानियों का सामना करने पर विवश है.
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