शहीद स्मृति मेला. बोले वक्ता, किसानों को मिले शत-प्रतिशत सब्सीडी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :20 Mar 2016 6:24 AM (IST)
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जारी रहेगी हक की मांग कटोरिया के बंगालगढ़ में आयोजित शहीद स्मृति मेला के दूसरे दिन वक्ताओं ने कहा जमीन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार हमें मिले तभी जनवाद है़ जंगल से जेएनयू तक इस देश की जनता अपना हक मांगेगी. कटोरिया : जातिवाद, सांप्रदायिकता, सामंतवाद, दबंगई का हम विरोध करेंगे़ यह जब तक रहेगा, तो किसी […]
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जारी रहेगी हक की मांग
कटोरिया के बंगालगढ़ में आयोजित शहीद स्मृति मेला के दूसरे दिन वक्ताओं ने कहा जमीन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार हमें मिले तभी जनवाद है़ जंगल से जेएनयू तक इस देश की जनता अपना हक मांगेगी.
कटोरिया : जातिवाद, सांप्रदायिकता, सामंतवाद, दबंगई का हम विरोध करेंगे़ यह जब तक रहेगा, तो किसी झंडे का नाम जनवाद नहीं हो सकता़ हमारा हक जमीन, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार है़ ये हमें मिले तभी जनवाद है़ जंगल से जेएनयू तक इस देश की जनता अपना हक मांगेगी़ विदेशी कंपनियों का विरोध भी जारी रहेगा़ उक्त बातें जनतरंग के प्रबंधक अशोक कुमार ने शनिवार को कटोरिया के बंगालगढ़ में आयोजित शहीद स्मृति मेला के दूसरे दिन सभा को संबोधित करते हुए कही़ उन्होंने कहा कि अपना पिछड़ापन दूर करें व विदेशी निर्भरता दूर करें,
कृषि पर आधारित औद्योगिक विकास हों, खेती करने वाले किसानों को जमीन उपलब्ध कराये जायें, जंगलों में रहने वाले आदिवासियों व पुझार जाति के लोगों को जमीन पर दखल दिलायी जाय, किसानों को शत-प्रतिशत सब्सीडी मिले़ समान शिक्षा पद्धति लागू हो़ अमीरों के बच्चों की तरह गरीब बच्चों को भी शिक्षा व ईलाज की गारंटी मिले़ श्रीकांत ने कहा जेएनयू को बंद एवं भगवाकरण करने की साजिश बंद हो़ जंगलों में रहने वाले आदिवासियों व गरीबों की झोपडि़यों को दबंग पुलिस व वन विभाग के गठजोड़ से उजाड़ा, जलाया व लूटा जा रहा है़ दबंगों द्वारा महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की जा रही है़
इन दमनात्मक कार्रवाई पर तत्काल रोक लगे़ जंगल की रक्षा की जिम्मेवारी आदिवासियों को मिले़ माफियाओं से जंगल को बचाया जाय, आदिवासी व दलित इलाकों में शुद्ध पेयजल व स्वास्थ्य सेवा मुहैया करायी जाय, बीड़ी मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी का भुगतान हो़ बढ़ती बेरोजगारी व महंगाई के लिए भारत सरकार की आर्थिक नीति जिम्मेवार है़
विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन
बंगालगढ़ में आयोजित शहीद स्मृति मेला के दूसरे दिन शनिवार को सौ मीटर दौड़, धनुष-तीर व गुलेल निशानेबाजी प्रतियोगिता एवं फुटबॉल मैचों का आयोजन किया गया़ प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले युवकों व टीमों को पुरस्कृत भी किया गया़ अभिनय रंगमंच के कलाकारों द्वारा नाटक की भी प्रस्तुति हुई़ कार्यक्रम में जनवादी कविता पाठ भी किया गया़ इसमें पुर्नअभियान सांस्कृतिक संस्था के कवि प्रकाश रमण, गीत-गजलकार आदित्य कमल, श्रम मुक्ति संगठन के जयप्रकाश आदि ने भी कविताओं के माध्यम से अपने विचारों को रखा़
जनवादी कार्टूनों की प्रदर्शनी
शहीद स्मृति मेला परिसर में लगे कला-प्रदर्शनी में कार्टूनिस्ट गोपाल शून्य के दर्जनों कार्टून लगाये गये हैं. आयोजन में आर्ट इन्साइड के सचिव वीरचंद कुमार, जनवादी महिला की रीता, कोल आदिवासी महासभा बुंदेलखंड के उमेश कोल, खैरा लोकमंच बिहार के सन्नू खैरा, प्रगतिशील दलित संघर्ष मंच के नंदकिशोर, जनजाति अधिकार रक्षा मंच के मदन मुर्मू, बीड़ी मजदूर यूनियन की कमली बहन, प्रगतिशील महिला मंच की हीरामणि हेंब्रम, बिहार किसान समिति के नागा प्रसाद, बीएसए के रामपुकार आदि शामिल थे.
‘दाहड़’ और ‘दहाड़’ की दोहरी मार दिखने लगा शिवहर का हाड़
छोटे से शिवहर को इस उम्मीद में जिला बना दिया गया कि इसका तेजी से विकास होगा. हालांिक शिवहर का पिछड़ापन पूरी तरह से दूर तो नहीं हो पाया है लेकिन जिला बनने के बाद िपछले 10 सालों में यहां कई बदलाव हुए हैं. अगर यह बदलाव नहीं हुआ होता तो िजले के हालात अौर बदतर होते. हालांकि प्रति व्यक्ति आय के मामले में शिवहर देश में सबसे पीछे है. यहां के लोग साल भर में औसतन महज 7092 रुपये कमाते हैं. स्थानीय लोग जहां हर साल आने वाली बाढ़ को पिछड़ेपन का कारण बताते हैं, वहीं डीएम का मानना है कि मनोरंजन के साधनों की कमी के कारण भी यहां का अपेक्षित विकास नहीं हुआ है.
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