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छह माह से मौत का कुआं बन गया है सूइया-बोडवा मुख्य मार्ग का पुल

Updated at : 14 Nov 2019 8:32 AM (IST)
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छह माह से मौत का कुआं बन गया है सूइया-बोडवा मुख्य मार्ग का पुल

निरंजन, बांका : चांदन प्रखंड क्षेत्र के सूईया-बोडवा मुख्य मार्ग में आका गांव के समीप एक पुल छह माह से मौत का कुंआ बना हुआ है. जिस पर अबतक किसी विभागीय अधिकारी का ध्यान नहीं गया है. उक्त मार्ग से गुरजने वाले अबतक दर्जनों राहगीर दुर्घटना का शिकार बन चुके हैं. हालात यही रही तो […]

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निरंजन, बांका : चांदन प्रखंड क्षेत्र के सूईया-बोडवा मुख्य मार्ग में आका गांव के समीप एक पुल छह माह से मौत का कुंआ बना हुआ है. जिस पर अबतक किसी विभागीय अधिकारी का ध्यान नहीं गया है. उक्त मार्ग से गुरजने वाले अबतक दर्जनों राहगीर दुर्घटना का शिकार बन चुके हैं. हालात यही रही तो आने वाले दिनों में और भी राहगीर दुर्घटना के शिकार होंगे. उक्त मार्ग से चार पहिया वाहन नहीं गुजरता है, जबकि इस मार्ग से तीन दर्जन से अधिक गांवों का आवाजाही होता है.

मार्ग से जुड़े गांवों में यदि कोई बीमार पड़ता है, तो चारपाई के सहारे मरीज को ध्वस्त पुल से पार करने के बाद ही चार पहिया वाहन की सुविधा नसीब होती है. मार्ग से जुड़े गांवों में यदि किसी के यहां शादी होती है, तो दुल्हा पक्ष वाले को पुल टूटने की सूचना पूर्व में ही दे दी जाती है, और एक वैकल्पिक कच्ची मार्ग का एड्रेस दिया जाता है. जो मार्ग करीब चार-पांच किलो मीटर घुमाऊदार है. अब ऐसे में बराती तो किसी तरह गंतव्य स्थान तक पहुंच जाते हैं.
लेकिन मरीज परिजन को वैकल्पिक मार्ग में अधिक समय लगने का डर सताता है, और परिजन टूटा हुआ पुल से चारपाई के माध्यम से मरीज को पार करते हैं, जहां से चार पहिया वाहन की सुविधा मरीजों को मिल पाती है. पुल का छत इस कदर बीचों-बीच गिरा है, जहां तेज गति से आने वाले दो पहिया वाहनों का दुर्घटनाग्रस्त होने की शतप्रतिशत संभावना है.
कहते हैं ग्रामीण
सूईया- बोडवा मार्ग में दर्जनों गांव अवस्थित है. आका गांव के समीप पुल के टूट जाने से गांव के उस पार अवस्थित दो दर्जन से अधिक गांवों में चारपहिया वाहन सीधे तौर पर नहीं पहुंच पाता है. पुल के टूट जाने से पेशराहा, बजरा, लीलावरण, फटोरिया, चतराहन, फुलहरा, ताराकुरा सहित अन्य गांवों में सीधे तौर पर चारपहिया वाहन नहीं पहुंचता है.
इस बावत पड़ोस के शिक्षक डॉ मुकेश कुमार सहित आसपास के ग्रामीण उमेश यादव, भीम यादव, नारायण मरांडी, विपीन तुरी, हेमलाल सोरेन आदि ने बताया है कि पुल टूट जाने से उनलोगों को काफी परेशानियां होती है. खासकर गांव में एंबुलेंस नहीं पहुंच पाता है. आसपास के गांवों के गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में परेशानियां होती है. एक वैकल्पिक कच्ची मार्ग है, जो बारिश के दिनों में कीचड़मय हो जाता है.
वहीं शादी में बारातियों को गांव पहुंचने में कठिनाईयां होती है. ध्वस्त पुल में करीब दो दर्जन अधिक लोग दुर्घटना के शिकार हो चुके हैं. इस दिशा में क्षेत्र के जनप्रतनिधियों को कई बार ध्यानाकृष्ट किया गया है. लेकिन अबतक पुल नहीं बन पाया है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस दिशा में पहल की मांग की है.
सूइया- बोडवा मुख्य मार्ग में आका गांव के समीप बीचोंबीच पुल ध्वस्त हो जाने का मामला अभी संज्ञान में आया है. संबंधित विभाग के अधिकारी को इस दिशा में पत्र लिखा जायेगा. कोशिश रहेगी की उक्त मार्ग का पुल जल्द से जल्द निर्माण हो जाये.
दुर्गा शंकर, बीडीओ, चांदन
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