एक भाई ने सरहद पर ली अंतिम सांस दूसरे ने भी थाम लिया देश का झंडा
Updated at : 02 Mar 2019 7:24 AM (IST)
विज्ञापन

बांका : फौजियों की बस्ती में कुर्मा के बाद बात करते हैं रमचुआ की. रमचुआ गांव में भी देश के प्रति अजब सी दीवानगी है. ग्रामीण अक्षय सिंह के मुताबिक 13 सितंबर 2015 को सुबोध सिंह का बड़ा पुत्र सिंटू सिंह लेह लद्दाख में तैनाती के दौरान बर्फ में दब गये और गंभीर रुप से […]
विज्ञापन
बांका : फौजियों की बस्ती में कुर्मा के बाद बात करते हैं रमचुआ की. रमचुआ गांव में भी देश के प्रति अजब सी दीवानगी है. ग्रामीण अक्षय सिंह के मुताबिक 13 सितंबर 2015 को सुबोध सिंह का बड़ा पुत्र सिंटू सिंह लेह लद्दाख में तैनाती के दौरान बर्फ में दब गये और गंभीर रुप से बीमार पड़ गये और इलाज के दौरान ही मृत्यु हो गयी. बड़े पुत्र की अर्थी निकलने के बाद परिवार के उपर दुखों का पहाड़ टूट गया था. इस बीच दिवंग सिंटू सिंह का दूसरा भाई भी मंटू सिंह बेधड़क होकर आर्मी की वर्दी पहने और अभी भी अपना कर्तव्य निभा रहे हैं.
जबकि तीसरा भाई भी सेना में जाने के लिए जी-तौड़ तैयारी में जुटे हुए हैं. इस गांव के दो दर्जन से अधिक युवा सरहद व देश के अन्य हिस्सों में तैनात हैं. इस गांव ने दर्जनों जवान देने के साथ सेना को बिग्रेडियर रैंक के अफसर भी दिये हैं. लेफ्टिनेंट अभिमन्यु, बिग्रेडियर राजीव सिंह, आर्मी मंटू सिंह, आजाद सिंह, धर्मेंद्र सिंह, रुपेश सिंह, अमित सिंह, आलोक कुमार सिंह सहित अन्य वीर जवानों का मानना है कि देश का प्यार उनके लिए शक्ति है और इसी के बूते वह देश की रक्षा के लिए मर-मिटने को तैयार रहते हैं.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




