बंगाल में मतदान से पहले बढ़ी ईडी की सख्ती, सुजीत बोस को तीसरी बार नोटिस

Author Ashish jha
Updated:
विज्ञापन

ईडी कार्यालय

ED Raid in Bengal: जहां विपक्ष इन कार्रवाइयों को भ्रष्टाचार के खिलाफ जरूरी कदम बता रहा है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के रूप में पेश कर रही है.

विज्ञापन

ED Raid in Bengal: कोलकाता. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की सक्रियता तेज हो गयी है. नगरपालिकाओं में नियुक्तियों के घोटाले मामले में राज्य के दमकल मंत्री और तृणमूल कांग्रेस नेता सुजीत बोस को तीसरी बार नोटिस भेजा गया है. उन्हें एक सप्ताह के भीतर केंद्रीय जांच एजेंसी के कार्यालय में हाजिर होने को कहा गया है. इस बार ईडी ने साफ संकेत दिया है कि अगर वह पूछताछ के लिए पेश नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

विज्ञापन

चुनाव बाद पेश होने की उम्मीद

ईडी सूत्रों के अनुसार, सुजीत बोस को पहले भी दो बार पूछताछ के लिए तलब किया गया था, लेकिन उन्होंने चुनावी व्यस्तता का हवाला देते हुए उपस्थित होने से परहेज किया. उन्होंने एजेंसी को सूचित किया था कि वह चुनाव के बाद मई महीने में पेश हो सकते हैं. हालांकि, इस बार ईडी ने उनके इस तर्क को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और सख्त रुख अपनाते हुए तीसरी बार समन जारी कर दिया है. उन्हें कोलकाता के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में निर्धारित तारीख पर उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है.

तृणमूल के कई नेता ईडी के रडार पर

इस मामले में केवल सुजीत बोस ही नहीं, बल्कि तृणमूल के अन्य नेताओं पर भी ईडी का शिकंजा कसता नजर आ रहा है. जमीन से जुड़े एक अन्य मामले में खाद्य मंत्री रथीन घोष को भी तलब किया गया है. उन्हें हाल ही में पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह भी निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हुए. इसके बाद जांच एजेंसी का रुख और कड़ा हो गया है. इसी क्रम में रासबिहारी विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार देबाशीष कुमार को भी जमीन से जुड़े मामले में समन भेजा गया है.

ईडी की कार्रवाई पर जताया एतराज

लगातार कई नेताओं को तलब किए जाने से राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है. सुजीत बोस ने ईडी की इस कार्रवाई पर कड़ा एतराज जताया है. उन्होंने लिखित रूप से एजेंसी को शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार में व्यस्त होने की जानकारी देने के बावजूद उन्हें बार-बार नोटिस भेजकर ‘हैरान’ किया जा रहा है. उनका कहना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है. दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले ईडी की लगातार कार्रवाई सत्तारूढ़ दल पर दबाव बनाने का काम कर रही है.

पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

राज्य की राजनीति में नया विवाद

हाल के दिनों में विभिन्न जगहों पर छापेमारी और नकदी बरामदगी की घटनाओं ने इस धारणा को और मजबूत किया है. हालांकि, इस बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्यों ज्यादातर मामलों में सत्ताधारी दल के नेताओं को ही निशाना बनाया जा रहा है. इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है. जहां विपक्ष इन कार्रवाइयों को भ्रष्टाचार के खिलाफ जरूरी कदम बता रहा है, वहीं तृणमूल कांग्रेस इसे केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के रूप में पेश कर रही है. चुनावी माहौल में ईडी की यह सक्रियता आने वाले दिनों में और राजनीतिक टकराव को जन्म दे सकती है.

Also Read: राशन घोटाला मामले में ईडी फिर से सक्रिय, बंगाल के 12 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola