बिना इ-वे बिल के झारखंड से बांका पहुंच रहा माल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Apr 2018 5:51 AM (IST)
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जिले में प्रतिदिन लाखों की टैक्स चोरी धड़ल्ले से बांका : केंद्र सरकार ने टैक्स चोरी पर लगाम लगाने के लिए हाइटेक व्यवस्था के तहत ई-वे बिल बीते एक अप्रैल से लागू कर दिया. परंतु सरकार की आंख में धूल झोंक कर प्रतिदिन लाखों की टैक्स चोरी धड़ल्ले से हो रही है. यही नहीं टैक्स […]
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जिले में प्रतिदिन लाखों की टैक्स चोरी धड़ल्ले से
बांका : केंद्र सरकार ने टैक्स चोरी पर लगाम लगाने के लिए हाइटेक व्यवस्था के तहत ई-वे बिल बीते एक अप्रैल से लागू कर दिया. परंतु सरकार की आंख में धूल झोंक कर प्रतिदिन लाखों की टैक्स चोरी धड़ल्ले से हो रही है. यही नहीं टैक्स चोरी की रफ्तार प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. एक जानकारी के मुताबिक इ-वे बिल लागू होने से 30-40 फीसदी टैक्स में गिरावट आयी है. कारण यह है कि बिना इ-वे बिल लिए माल का प्रेषण हो रहा है. जांच नहीं होने की सूरत में माफियाओं में रत्ती भर डर नहीं है. जिले की मौजूदा स्थिति की बात करें, तो प्रतिदिन लाखों रुपये की टैक्स की चोरी जारी है. जानकारी के मुताबिक बिना इ-वे बिल जेनरेट किये झारखंड से ज्यादातर थोक खाद्यान्न की आपूर्ति की जा रही है.
इंटर स्टेट माल पर चुकाना होता है इ-वे बिल : इ-वे बिल नियम के तहत दूसरे राज्य से अगर व्यवसायी 50 हजार से अधिक माल लेकर आते हैं, तो उन्हें इ-वे बिल हर हाल में चुकाना होगा. जबकि राज्य के अंदर किसी जिले में सामग्री का आयात-निर्यात किया जाता है तो दो लाख से ऊपर वाले सामग्री का इ-वे बिल जेनरेट करना होता है. परंतु दोनों ही प्रणाली में सरकार को काफी नुकसान हो रहा है.
देवघर व दुमका मंडी से लाया जा रहा है चोरी का माल
सूत्र के मुताबिक यहां के थोक व खुदरा विक्रेता झारखंड राज्य के गोड्डा व दुमका से प्रमुख रूप से दलहन, तिलहन व अन्य खाद्यान्न थोक मात्रा में खरीदते हैं. ऐसे व्यवसायियों का मंडी के कुछ लोगों से सांठ-गांठ भी रहता है. लिहाजा, वे वहां से माल लेकर बेधड़क सीमा पार कर जाते हैं.
जीएसटी व इ-वे बिल के तहत टैक्स का जो स्लैब तय हुआ है. उसके अनुसार व्यवसायी को ई-वे बिल जेनरेट करना ही होगा. अगर सड़क पर टैक्स चोरी करते वाहन पकड़ी गयी तो वाहन व सामग्री जब्त करने के साथ ही संबंधित व्यवसायी पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जायेगी. टैक्स चोरी की शिकायत मिल रही है. जल्द ही ठोस कार्रवाई तय की जायेगी.
योगेंद्र शर्मा, वाणिज्य कर पदाधिकारी, भागलपुर
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