बांका में बर्न यूनिट नहीं, आग से झुलसे मरीज हो रहे रेफर

Published at :29 Mar 2018 6:09 AM (IST)
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बांका में बर्न यूनिट नहीं, आग से झुलसे मरीज हो रहे रेफर

बांका : आजादी के सात दशक बीत जाने के बावजूद जिले के सबसे बड़े अस्पताल सदर अस्पताल में बर्न यूनिट की स्थापना नहीं हो पायी है. जिसकी वजह से आग से झुलसे मरीज का इलाज यहां नहीं हो पाता है. लिहाजा जब भी ऐसे मरीज अस्पताल में भर्ती के लिए आते हैं, तो उन्हें सीधे […]

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बांका : आजादी के सात दशक बीत जाने के बावजूद जिले के सबसे बड़े अस्पताल सदर अस्पताल में बर्न यूनिट की स्थापना नहीं हो पायी है. जिसकी वजह से आग से झुलसे मरीज का इलाज यहां नहीं हो पाता है. लिहाजा जब भी ऐसे मरीज अस्पताल में भर्ती के लिए आते हैं, तो उन्हें सीधे रेफर कर दिया जाता है. करीब 25 लाख आबादी को पार कर चुके जिले में एक बर्न यूनिट की स्थापना न हो पाना दुर्भाग्य है. विडंबना यह है कि जनप्रतिनिधि भी इस विषय पर किसी प्रकार की भी जवाबदेही नहीं ले रहे हैं.

लिहाजा आर्थिक तंगी से गुजर रहे झुलसे मरीज जब बाहर नहीं जा पाते हैं, तो उन्हें घर पर ही तड़पना पड़ता है. ऐसा ही एक मामला 24 मार्च को अस्पताल में देखने को मिला. आग से झुलसी युवती को अस्पताल से रेफर कर दिया. फिर भागलपुर से मरीज को पटना रेफर कर दिया. आर्थिक तंगी से उसके पिता पटना न ले जा सके और वापस बांका अस्पताल में भर्ती करने की गुहार लगायी, पर यहां मरीज को भर्ती नहीं किया. अंत: मरीज कराहते हुए अपने गांव लौट गये. जाहिर है यह तो मात्र एक बानगी है. प्रत्येक वर्ष ऐसे ही दर्जनों आग से झुलसे मरीज सदर अस्पताल पहुंचते हैं, जहां से चिकित्सक सीधे भागलपुर रेफर कर देते हैं.

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लंबे समय से बर्न यूनिट की जरूरत की जा रही महसूस
सदर अस्पताल में बर्न यूनिट की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है. अलग से यूनिट नहीं होने की वजह से कई बार प्राथमिक उपचार के बाद आग से झुलसे मरीज को सामान्य वार्ड में ही भर्ती कर लिया जाता है. जिससे काफी परेशानी होती है. साथ ही इंफेक्शन फैलने का भी डर बना रहता है.
24 मार्च को आग से झुलसी युवती को अस्पताल में भर्ती कराने आये थे परिजन
बाराहाट थाना क्षेत्र अंतर्गत खड़हारा गांव की फुलिया कुमारी आग से झुलस गयी. आनन-फानन में परिजन जख्मी हालत में उसे लेकर सदर अस्पताल पहुंचे. जहां से जख्मी को सीधे भागलपुर रेफर कर दिया गया. भागलपुर पहुंचते-पहुंचते पीड़िता की हालत और भी नाजुक हो गयी. लिहाजा, भागलपुर से भी पटना रेफर कर दिया गया. परंतु आर्थिक तंगी की वजह से परिजन पीड़िता को लेकर फिर से वापस सदर अस्पताल पहुंच गये. लेकिन सदर अस्पताल ने उसे भर्ती लेने से इंकार कर दिया. चूंकि सदर अस्पताल में बर्न यूनिट नहीं है. इसलिए चिकित्सकों ने साफ मनाही कर दी. हारकर जिंदगी व मौत से जंग लड़ रही फुलिया को परिजन लेकर घर चले गये.
आइसीयू के साथ बर्न यूनिट व ब्लड बैंक की मांग
जिलेवासी सदर अस्पताल में आइसीयू के साथ बर्न यूनिट के साथ ब्लड बैंक की मांग कर रहे हैं. ताकि मरीज को अन्य शहर की दौड़ लगाने से छुटकारा मिल सके. शहरवासी मुकेश कुमार, कुमार अनुज सहित अन्य ने कहा कि सूबे की सरकार व जिला प्रशासन को इसके लिए प्रयास करना चाहिए.
आइसीयू एवं ब्लड बैंक की स्थापना को लेकर विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है. राज्य से मिली जानकारी के अनुसार जून-जुलाई तक बांका सदर अस्पताल में दोनों यूनिट लगने की संभावना है. साथ ही उक्त यूनिट की संचालन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक की मांग भी की गयी है. आइसीयू लग जाने के बाद बर्न के केस में मरीजों को रेफर नहीं किया जायेगा.
सुधीर कुमार महतो, सिविल सर्जन, बांका
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