चांदन-कटोरिया में 40 किमी में बनेगा वेजीटेबल कलस्टर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Jan 2018 6:25 AM (IST)
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डीएम की अध्यक्षता में सब्जी उत्पादक किसान की बैठक बैठक में आइआइटी मुंबई के इंजीनियर ने की शिरकत बांका : सब्जी की खेती में बांका आत्मनिर्भर बनेगा. यहां से उत्पादित सब्जी अन्य प्रांत में भेजी जायेगी. साथ ही कृषक की मजबूती के साथ स्वरोजगार का नया द्वार खोला जायेगा. जी हां, सब्जी उत्पादन के रूप […]
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डीएम की अध्यक्षता में सब्जी उत्पादक किसान की बैठक
बैठक में आइआइटी मुंबई के इंजीनियर ने की शिरकत
बांका : सब्जी की खेती में बांका आत्मनिर्भर बनेगा. यहां से उत्पादित सब्जी अन्य प्रांत में भेजी जायेगी. साथ ही कृषक की मजबूती के साथ स्वरोजगार का नया द्वार खोला जायेगा. जी हां, सब्जी उत्पादन के रूप में जिले की पहचान स्थापित करने के लिए महत्वाकांक्षी प्रयास जल्द ही शुरू किया जायेगा. कटोरिया व चांदन प्रखंड क्षेत्र के 40 किलोमीटर में वेजीटेबल कलस्टर का निर्माण किया जायेगा. इसी निमित्त डीएम कुंदन कुमार की अध्यक्षता में सब्जी उत्पादक किसान के साथ एक आवश्यक बैठक समाहरणालय सभागार में बुधवार को हुई.
इस अवसर पर आइआइटी मुंबई के इंजीनियर विकास कुमार झा ने शिरकत किया. बैठक को संबोधित करते हुए डीएम ने कहा कि जिला कृषि प्रधान है. यहां सब्जी उत्पादन की प्रबल संभावना है. जरूरी है नयी तकनीक की. इसीलिए प्राथमिकता के तौर पर विभिन्न योजनाओं पर संकल्पित रूप से कार्यक्रम तय की गयी है. इंजीनियर विकास किसान से सब्जी उत्पादन के दौरान हो रही समस्याओं से अवगत हुए. इस दौरान कटोरिया केरवार गांव के किसान मेघलाल यादव ने बतया उनके यहां 100 एकड़ से अधिक भूमि में मटर की खेती होती है. परंतु भंडारण की व्यवस्था नहीं होने की सूरत में टमाटर को जल्दबाजी में कम मूल्य पर ही बिक्री कर दी जाती है. पलनिया के किसान भूदेव यादव के मुताबिक टमाटर की खेती के लिए नयी तकनीक की जरूरत है. इंजीनियर ने कहा कि टमाटर व अन्य सब्जिजयों की खेती के बाद अधिक समय तक सुरक्षित रखने के लिए नई तकनीक डिजाइन की गयी है. वे चयनित कृषकों से कूल चेंबर का निर्माण करायेंगे. इस तकनीक को विकसित करने में महज छह हजार रुपये का खर्च आता है. बिजली एवं डीजल के बगैर पैर के सहायता से ट्रेडल पम्प से उत्पादन को सुरक्षित रखा जा सकता है. ट्रेडल पम्प के साथ एक एकड़ भूमि में लगाये जाने बाले ड्रीप सिंचाई प्रणाली पर कुल नौ हजार रुपया व्यय होगा. इस तकनीक से सिंचाई की भी बचत होगी. बैठक में डीएओ सुदामा महतो, केवीके वैज्ञानिक सुनिता कुशवाहा, डीटीओ अरविंद मंडल, जिला गोपनिय प्रभारी आदित्य कुमार, डीपीआरओ दिलीप सरकार सहित अन्य प्रमुख रूप से मौजूद थे.
खेसर में तैयार होगा स्ट्राबैरी कलस्टर : फुल्लीडुमर प्रखंड अन्तर्गत खेसर वननवर्षा के किसान सुधीर रजक ने बताया कि वे ब्रोकली व स्ट्राबैरी की खेती सफतापूर्वक करते हैं. इससे काफी मुनाफा भी हासिल हो रहा है. डीएम ने कहा कि खेसर अंतर्गत क्षेत्र में स्ट्राबैरी कलस्टर स्थापित कर इस फसल की उत्पादकता में वृद्धि कर किसानों के हाथ मजबूत किये जाएंगे. जिले में लगभग 46 हजार हेक्टेयर बंजर भूमि है. इस भूमि पर सुगंधित एवं औषधीय खेती का प्रयास जारी है.
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