मधुमक्खी पालन में आत्मनिर्भर बनेगा बांका

Published at :05 Aug 2017 4:17 AM (IST)
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मधुमक्खी पालन में आत्मनिर्भर बनेगा बांका

50 फीसदी अनुदानित दर पर मिलेगा लाभ उद्यान विभाग में जमा होगा किसानों का आवेदन बांका : मधुमक्खी पालन में जल्द ही बांका आत्मनिर्भरता की लंबी छलांग लगायेगा. जी हां, उद्यान विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपते हुए मधुमक्खी पालन के प्रति लोगों को जागरुक करने के साथ ही संबंधित योजना का शत प्रतिशत लाभ नियमानुसार […]

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50 फीसदी अनुदानित दर पर मिलेगा लाभ

उद्यान विभाग में जमा होगा किसानों का आवेदन
बांका : मधुमक्खी पालन में जल्द ही बांका आत्मनिर्भरता की लंबी छलांग लगायेगा. जी हां, उद्यान विभाग को इसकी जिम्मेदारी सौंपते हुए मधुमक्खी पालन के प्रति लोगों को जागरुक करने के साथ ही संबंधित योजना का शत प्रतिशत लाभ नियमानुसार किसानों को देने का निर्देश दिया है. मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय वर्ष 2017-18 में कुल 400 मधुमक्खी पालन बक्से को अनुदानित दर पर किसानों को उपलब्ध करायेगी. जानकारी के मुताबिक सामान्य वर्ग के लिए 50 फीसदी अनुदानित लाभ बक्से का लाभ मिलेगा. एक बक्से का अनुमानित लागत आठ हजार रुपया है. किसानों को 50 फीसदी अनुदानित राशि में छूट पर मात्र 4000 हजार रुपये खर्च करने हैं.
मधुमक्खी बक्से के साथ ही रानी मधुमक्खी सहित अन्य जरुरी सामग्री भी उपलब्ध कराने की योजना है. मधुमक्खी बक्से का लाभ लेने के लिए किसानों आवेदन कार्यालय में जमा लिया जायेगा. विभाग आरक्षण रोस्टर के मुताबिक मधुमक्खी पालन के लिए बक्से का लाभ देगी. विभागीय जानकारी के मुताबकि किसान यूनिट के अनुसार मधुक्मखी को स्वरोजगार के रुप में अपना सकते हैं. अगर किसान पहले आते हैं तो उन्हें दस बक्से का लाभ भी मिल सकता है.
100 मधुमक्खी निष्कासन यंत्र भी 50 फीसदी अनुदानित दर पर
मधुमक्खी पालन को सुलभ बनाने के लिए उद्यान विभाग 100 मधुमक्खी निष्कासन यंत्र का वितरण भी करेगी. बाजार में मधुमक्खी निष्कासन यंत्र की कीमत 20000 के आसपास है. जबकि किसानों को 50 फीसदी लाभ पर मात्र 10 हजार रुपये में यंत्र उपलब्ध करायेगी. यह यंत्र मधुमक्खी के बक्से से शहद आसानी से निकाल सकते हैं. विभाग का प्रयास है कि मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के साथ ही इसके उत्पादन में भी वृद्धि हो. इसलिए चरणबद्ध तरीके से किसानों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है.
तीन किमी में होगा काम
मधुमक्खी पालन के लिए किसानों को प्रशिक्षित भी किया जायेगा. जानकारी के मुताबिक एक मधुमक्खी तीन किलोमीटर परिक्षेत्र में भ्रमण कर फल का रस चूसेगी. जबकि मधुमक्खी का पालन ऐसे स्थानों पर करने पर बल दिया जायेगा, जहां सूर्यमुखी, फूल, गन्ना सहित अन्य फलदार वृद्धि आसपास पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हो.
कहते हैं अधिकारी
जिले में मधुमक्खी पालन के लिए चार सौ बक्से का आवंटन आया है. किसानों को 50 फीसदी अनुदानित दर पर इसका लाभ दिया जायेगा. मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए विभाग संकल्पित है.
पंकज कुमार, प्रखंड उद्यान पदाधिकारी, बांका
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