कोई प्रश्नोत्तर अमूल्यांकित न रह जाएं, स्टेप वाइज मार्किंग करें परीक्षक

Aurangabad News :डीपीओ ने इंटर व मैट्रिक के मूल्यांकन कार्यो का लिया जायजा, एमपीपी व परीक्षकों को दिया निर्देश
एक दिन में कम से कम 45 और अधिकतम 55 कॉपी जांच करने का है प्रावधान
फोटो नंबर-11- आरएलएसवाइ कॉलेज के मूल्यांकन केंद्र में मुआयना करने पहुंचे डीपीओ. औरंगाबाद/कुटुंबा मैट्रिक और इंटर परीक्षा का परिणाम छात्र जीवन का प्रथम सोपान है. यहीं से बच्चों का भविष्य निर्धारण होता है. ये बातें माध्यमिक शिक्षा डीपीओ दयाशकंर सिंह ने कहीं. वे सोमवार को शहर के विभिन्न केंद्रों पर घूम-घूम कर मूल्यांकन कार्यो का जायजा ले रहे थे. उन्होंने बताया कि मैट्रिक व इंटर बोर्ड का मूल्यांकन सरकार के शिक्षा विभाग का महत्वपूर्ण कार्य है. मूल्यांकन के क्रम में पूरी तरह से सावधानी बरतनी होगी. उत्तरपुस्तिका में कोई भी प्रश्नोत्तर अमूल्यांकित न रह जाए, इसके प्रति विशेष ध्यान देने की जरूरत है. परीक्षा में पूछे गये प्रश्नो के अनुरूप स्टेप वाइज स्टेप मार्किंग करने का प्रयास करना है. कतई लापरवाही नहीं बरतनी है. सभी कर्मी शांति का माहौल कायम रखें, चूंकि बच्चों के भविष्य का सवाल है. इस क्रम में डीपीओ ने आरएलएसवाइ कॉलेज सेंटर वन के डायरेक्टर मो अख्तर आलम व टू के डायरेक्टर प्रभात कुमार, धनंजय कुमार के साथ-साथ मूल्यांकन में लगे को-ऑर्डिनेटर, प्रवीण कुमार सिन्हा, एसटी हक, साजीद गुरफान, व्रजभूषण कुमार व सत्येंद्र शर्मा व परीक्षक, प्रधान परीक्षक, एमपीपी, मेकर व चेकर के साथ सुपरवाइजर व अन्य कर्मियों को निर्देश दिये.प्रश्नोत्तर में अधिक या कम मार्किंग करना कानूनन अपराध
डीपीओ ने बताया कि मूल्यांकन कार्य में समय की पाबंदी है. निर्धारित समय तक बोर्ड को ऑनलाइन मार्क्स उपलब्ध करा देना है. मूल्यांकन के पश्चात तुरंत ही बोर्ड को सील पैकेट में अवार्ड सीट व मार्क्स फाइल समर्पित किया जाना है. उन्होंने बताया कि प्रधान परीक्षक हर हाल में मूल्यांकित उत्तरपुस्तिकाओं का 10 प्रतिशत पुर्नमूल्यांकन करेंगे. परीक्षा में पूछे गये प्रश्नों के अनुरूप लिखित प्रश्नोत्तर में अधिक या कम मार्किंग करना कानूनन अपराध है. उन्होंने बताया कि एमपीपी मार्क्स फाइल और अवार्ड सीट पर बने गोले को बारिकी से कलर करेंगे.केंद्र के अंदर अनाधिकृत व्यक्ति का प्रवेश वर्जित:
डीपीओ ने बताया कि मूल्यांकन केंद्र के अंदर अनाधिकृत व्यक्ति का प्रवेश वर्जित रखा गया है. जिला प्रशासन की ओर से केंद्र के इर्द-गिर्द में 200 गज की परिधि में 144 धारा लागू की गयी है. डीपीओ ने बताया कि मूल्यांकन बीएसइबी के परीक्षा विभाग को अति गोपनीय कार्य है. गोपनीयता भंग करने वालों के विरुद्ध सख्ती से कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने बताया कि जल्दी बाजी में गलती नहीं करनी है. एक परीक्षक एक दिन में न्यूनतम 45 और अधिकत्तम 55 उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन करेंगे. डीपीओ ने आरएलएसवाइ कॉलेज में जारी मूल्यांकन कार्य को देखकर संतोष जताया. कहां कि यहां बेहतर ढंग से काम चल रहा है. इस दौरान डीपीओ के साथ परीक्षा विभाग के सहायक अमरेंद्र कुमार भी मौजूद थे.शहर के 10 केंद्रो पर मूल्यांकन जारी
बिहार बोर्ड के निर्देशानुसार, 27 फरवरी से इंटर का और एक मार्च से मैट्रिक का मूल्यांकन शुरू हो गया है. इसके लिए बोर्ड ने संबधित विषय के अनुभवी शिक्षकों को मूल्यांकन कार्य के लिए परीक्षक प्रतिनियुक्त किया है. इधर, रविवार से शहर के 10 शिक्षण संस्थानों में लगातार मूल्यांकन जारी है. इसके लिए 1000 से अधिक कर्मी लगाये गये है.शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, केएसएम कॉलेज सेंटर वन और सिंहा कॉलेज व आरएलएसवाइ कॉलेज सेंटर वन तथा टू पर इटंर की उत्तरपुस्तिकाएं जांची जा रही हैं. इधर गेट स्कूल, राजर्षि विद्या मंदिर, किशोरी सिन्हा हाइस्कूल नदी घाटी व टाउन इंटर स्कूल में मैट्रिक के मूल्यांकन के लिए एक-एक सेंटर बनाया गया है. वहीं, अनुग्रह गर्ल्स हाइस्कूल औरंगाबाद में मैट्रिक के मूल्यांकन के लिए दो सेंटर बनाये गये हैं. अधिकारियो ने बताया कि सभी केंद्रो पर अनवरत मूल्यांकन कार्य जारी है. विदित हो कि परीक्षार्थी आरटीआइ के तहत्त मूल्यांकन का हकीकत जानने का प्रयास करते है. ऐसे में मूल्यांकन के दौरान बरती गयी लापरवाही का खमियाजा परीक्षको को बाद में भुगतना पड़ता है.
पैरवी की गुंजाइश नहीं, ठगों से रहें दूरमैट्रिक और इंटर की उत्तरपुस्तिकाएं पूरी तरह से वारकोडेड हैं. मूल्यांकन के दौरान या बाद में भी किसी की पैरवी की गुंजाइश नहीं रहती है. यहां तक कि किस परीक्षार्थी की उत्तरपुस्तिका है, इसकी भनक मूल्यांकन कार्य से जुड़े कर्मियों को भी नहीं लगती है. इसके प्रति बिहार बोर्ड पूरी तरह से सख्त है. प्रभात खबर ने परीक्षार्थियों और उनके अभिभावको को ठगों से सावधान रहने का सुझाव दिया है. बताया है कि बेहतर रिजल्ट के लिए अगर परीक्षार्थी को कोई ठग फोन करता है, तो उसके झांसे में न आएं. डीइओ सुरेंद्र कुमार ने बताया कि बिहार बोर्ड किसी भी परीक्षार्थी को कभी भी फोन नहीं करता है. अगर किसी के पास पैरवी और रिजल्ट के लिए इस तरह का फोन आता है, तो देर न करें, तुरंत प्रशासन को सूचना देने का प्रयास करें.
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By Prabhat Khabar News Desk
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