सूर्यकुंड में आस्था की डुबकी लगाकर नवदंपतियों ने मांगा सुखद जीवन का आशीर्वाद

Published by :SUJIT KUMAR
Published at :03 May 2026 4:48 PM (IST)
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सूर्यकुंड में आस्था की डुबकी लगाकर नवदंपतियों ने मांगा सुखद जीवन का आशीर्वाद

गया, रोहतास, अरवल, कैमूर, नवादा, जहानाबाद व झारखंड से पहुंचे हजारों श्रद्धालु

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देव सूर्य मंदिर में उमड़ा जन सैलाब, जेठ के पहले रविवार को हजारों ने टेका मत्था

त्रिमूर्ति स्वरूप के दर्शन को पहुंचे कई जिलों के श्रद्धालु, सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

गया, रोहतास, अरवल, कैमूर, नवादा, जहानाबाद व झारखंड से पहुंचे हजारों श्रद्धालु फोटो नंबर-3-पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु. 3ए-पूजन कराते पुजारी

प्रतिनिधि, देव

जेठ महीने के पहले रविवार को पौराणिक सूर्य मंदिर देव में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. भक्तों ने श्रद्धाभाव से सूर्य मंदिर की चौखट पर शीश झुकाकर मंगलकामना की. तेज धूप के बावजूद भक्तों ने सूर्यकुंड में डुबकी लगाने के बाद माला-फूल और नारियल प्रसाद लेकर मंदिर की ओर प्रस्थान किया. मंदिर की सीढ़ियों पर मत्था टेकने के बाद श्रद्धालु कतारबद्ध हुए और जयकारे के साथ गर्भगृह पहुंचकर भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश आदि देवताओं का विधिवत दर्शन-पूजन किया.

नवदंपतियों की बढ़ी संख्या:

खासकर लगन के इस मौसम में दर्शन-पूजन करने वाले लोगों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है. हर दिन दर्जनों नवदंपती भगवान का आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं. रविवार को हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान का दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की. मान्यता है कि शादी के बाद दर्शन-पूजन करने वाले नवदंपती का जीवन सुखमयी होता है. मंदिर में सुबह से ही लंबी कतार लगी रही. घंटा-घड़ियाल, शंखनाद व जयकारे से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा. मंदिर की परिक्रमा के लिए भी भक्तों का तांता लगा रहा.

कड़े सुरक्षा घेरे में हुआ दर्शन

सूर्य मंदिर में उमड़ी भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए देव थानाध्यक्ष के नेतृत्व में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये थे. पुरुष व महिला सिपाही सुरक्षा में तैनात रहे. श्रद्धालुओं ने अलग-अलग कतारों में लगकर दर्शन किया. औरंगाबाद के अलावा गया, रोहतास, अरवल, कैमूर, नवादा, जहानाबाद व झारखंड के पलामू सहित अन्य जिलों से श्रद्धालु यहां पहुंचे. मंदिर में भगवान सूर्य तीन रूपों में विराजमान हैं. ऐसी मान्यता है कि इन तीन स्वरूपों के दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

भगवान की मिलती है विशेष कृपा

प्रधान पुजारी राजेश पाठक, मृत्युंजय पाठक व सुभाष पाठक ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार जेठ माह में ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिमूर्ति) की पूजा का विशेष महत्व है. त्रिविक्रम रूप की पूजा से जाने-अनजाने में किये गये पाप नष्ट होते हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तत्पर है समिति

न्यास समिति के सचिव विश्वजीत राय, कोषाध्यक्ष सुधीर सिंह, सदस्य लक्ष्मण गुप्ता व योगेंद्र सिंह ने कहा कि रविवार को सुबह से ही भक्तों की कतार लगी रही. मंदिर प्रशासन श्रद्धालुओं को किसी भी तरह का कष्ट न हो, इसके लिए हमेशा तत्पर रहता है.

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