पंचायतों में नसे सिरे से परिसीमन पर आर-पार के मूड में मुखिया संघ

Published by :SUJIT KUMAR
Published at :08 Jan 2026 6:55 PM (IST)
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पंचायतों में नसे सिरे से परिसीमन पर आर-पार के मूड में मुखिया संघ

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प्रदेश अध्यक्ष ने प्रेसवार्ता कर परिसीमन करने की बुलंद की आवाज

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प्रदेश अध्यक्ष ने प्रेसवार्ता कर परिसीमन करने की बुलंद की आवाज

औरंगाबाद नगर दाउदनगर. पंचायत चुनाव से पहले पंचायतों का नये सिरे से परिसीमन कराने की मांग को लेकर पंचायत प्रतिनिधि एकजुट होकर आवाज बुलंद कर रहे हैं. गुरुवार को जिला पर्षद सभागार में आयोजित बिहार प्रदेश मुखिया महासंघ व अन्य पंचायत प्रतिनिधि संगठनों की जिला स्तरीय कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से पंचायतों के पुनः परिसीमन का प्रस्ताव पारित किया गया. बैठक में निर्णय लिया गया कि यदि सरकार द्वारा मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो पटना उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जायेगा. संघ के प्रदेश अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय ने कहा कि बिहार में वर्ष 2001 में 1991 की जनगणना के आधार पर पंचायतों का परिसीमन किया गया था, जबकि वर्तमान में पंचायतों की आबादी लगभग ढाई गुना बढ़ चुकी है. इसके बावजूद अब तक परिसीमन नहीं किया जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि राज्य के कई जिलों और प्रखंडों में कुछ पंचायतों का क्षेत्रफल 10 किलोमीटर से अधिक रेडियस में फैला हुआ है, जिससे विकास कार्य बाधित हो रहे हैं और प्रशासनिक उपेक्षा बढ़ रही है. कई पंचायतों की जनसंख्या अब 20 हजार के पार पहुंच चुकी है और उनका भौगोलिक क्षेत्रफल भी काफी बढ़ गया है. एक मुखिया के लिए इतनी बड़ी आबादी और विस्तृत क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करना मुश्किल हो गया है. श्री राय ने कहा कि नगर निकायों के गठन और उनके क्षेत्र विस्तार के कारण कई पंचायतों का विखंडन और पुनर्गठन अव्यवस्थित ढंग से किया गया है, जिससे गंभीर विसंगतियां उत्पन्न हुई हैं. पंचायतों का आकार छोटा होना चाहिए ताकि विकास कार्य जमीन तक पहुंच सकें और चुनाव लड़ने के इच्छुक आम लोगों को भी अवसर मिल सके. बैठक में मनरेगा से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा की गयी. प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मनरेगा के सामग्री मद का बकाया रहने से पंचायतों के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं. बकाया राशि का भुगतान प्राथमिकता के आधार पर एक माह के भीतर शत-प्रतिशत किया जाना चाहिए. मनरेगा में प्रशासनिक स्वीकृति का बढ़ा हुआ दायरा 10 लाख रुपये को अविलंब लागू किया जाये. साथ ही पंचायतों को मनरेगा की 20 योजनाओं के प्रतिबंध से मुक्त किया जाए और एनएमएमएस को दिन में केवल एक बार लागू किया जाये. बैठक में बिहार जिला परिषद संघ के प्रदेश सचिव इ सुबोध कुमार सिंह, जिप अध्यक्ष प्रतिनिधि शैलेश यादव, जिला पार्षद शंकर यादव, विकास कुमार, जिला पार्षद प्रतिनिधि संजय यादव, औरंगाबाद मुखिया संघ के अध्यक्ष सुजीत सिंह, मुखिया बृजमोहन यादव सहित कई जिलों के प्रतिनिधि उपस्थित थे.

परिसीमन नहीं होने से विकास बाधित

उधर, दाउदनगर प्रखंड कार्यालय सभागार में बिहार प्रदेश मुखिया संघ के अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय ने त्रिस्तरीय पंचायती राज जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद किया. बताया गया कि पंचायतों का परिसीमन कराने और मनरेगा के लंबित भुगतान से संबंधित मांगों के समर्थन में चलाये जा रहे हस्ताक्षर अभियान के तहत वे यहां पहुंचे थे. संवाद की अध्यक्षता गोरडीहां पंचायत के मुखिया नागेंद्र सिंह यादव ने की. इस दौरान बिहार में पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन कराने की आवश्यकता पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गयी. मौके पर जिला पार्षद अमरेंद्र उर्फ अरविंद यादव, प्रखंड प्रमुख विपुल कुमार, मुखिया कौशल्या देवी, संध्या देवी, अमृता देवी, विरेंद्र पासवान, रमेश प्रसाद, शशिभूषण सिंह, राजकुमार पासवान, अंजुम आरा, गोह प्रखंड मुखिया संघ के अध्यक्ष ईश्वर दयाल सिंह, दाउदनगर पंचायत समिति सदस्य विनय राम, प्रज्ञा प्रीतम सहित अनिल यादव, रघुवंश सिंह समेत अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे.

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