औरंगाबाद: लाखों की लागत से बना पशु चिकित्सालय बना शोपीस, वर्षों बाद भी शुरू नहीं हुआ इलाज; पशुपालक परेशान
Sundarganj Veterinary Hospital: औरंगाबाद के बारूण प्रखंड स्थित सुंदरगंज में लाखों रुपये की लागत से बना प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय वर्षों बाद भी शुरू नहीं हो सका. भवन बदहाल है और परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग रहा है.
Sundarganj Veterinary Hospital: (अंबुज पांडेय) औरंगाबाद जिले के बारूण प्रखंड के सुंदरगंज में लाखों रुपये की लागत से निर्मित प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय भवन वर्षों बाद भी अपने मूल उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रहा है. पशुपालकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए बनाए गए इस अस्पताल में आज तक नियमित चिकित्सा सेवा शुरू नहीं हो सकी है. नतीजतन भवन उपयोग के अभाव में बदहाल होता जा रहा है और परिसर असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है.
झाड़ियों से घिरा अस्पताल, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा
अस्पताल भवन के चारों ओर बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं. अस्पताल तक जाने वाला रास्ता भी घास और झाड़ियों से पट गया है, जिससे आवागमन मुश्किल हो गया है. परिसर में नशीले पदार्थों के खाली रैपर, शराब की बोतलें और अन्य कचरा बिखरा पड़ा रहता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम होते ही यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगता है, जिससे आसपास के लोगों में असुरक्षा की भावना बनी रहती है.
जनता दरबार में शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
मोक्तारपुर गांव निवासी शिवम कुमार ने इस मामले की शिकायत जनता दरबार में की थी. उन्होंने बताया कि पशुपालकों की सुविधा के लिए वर्षों पहले आधुनिक पशु चिकित्सालय भवन बनाया गया, लेकिन आज तक इसमें इलाज शुरू नहीं हो सका. शिकायत के बाद उप विकास आयुक्त ने पशुपालन विभाग और भवन निर्माण विभाग को संयुक्त जांच कर आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया. अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण कर अपनी जांच रिपोर्ट भी सौंप दी है.
समविकास भवन के तीन कमरों में चल रहा अस्पताल
पशुपालन विभाग के अनुसार प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय सुंदरगंज में चार कर्मी और एक पशुधन सहायक पदस्थापित हैं. चिकित्सक का पद रिक्त होने के कारण दूसरे अस्पताल के डॉक्टर को सप्ताह में तीन दिन प्रतिनियुक्ति पर सेवा देने के लिए लगाया गया है. फिलहाल अस्पताल का संचालन सुंदरगंज स्थित समविकास भवन के तीन कमरों से किया जा रहा है. इन कमरों में पर्याप्त जगह और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं का अभाव है.
2021 में विभाग को सौंपा गया था भवन
जानकारी के अनुसार भवन निर्माण विभाग ने अस्पताल का निर्माण पूरा करने के बाद वर्ष 2021 में इसे विधिवत पशुपालन विभाग को हस्तांतरित कर दिया था. इसके बावजूद करीब पांच वर्ष बाद भी नए भवन में अस्पताल का संचालन शुरू नहीं हो सका है.
रखरखाव के अभाव में क्षतिग्रस्त हो रहा भवन
लंबे समय से उपयोग नहीं होने और रखरखाव के अभाव में भवन की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है. दरवाजे, खिड़कियां और सीढ़ियों की रेलिंग कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि असामाजिक तत्वों ने भी भवन को नुकसान पहुंचाया है. परिसर में फैली गंदगी और झाड़ियों के कारण भवन की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं.
पशुपालकों ने नए भवन में अस्पताल शुरू करने की उठाई मांग
क्षेत्र के पशुपालकों ने जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग से जल्द से जल्द नए भवन में अस्पताल का संचालन शुरू कराने, परिसर की साफ-सफाई कराने तथा सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि लाखों रुपये की लागत से बने भवन का सदुपयोग हो सके और पशुओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके.
भवन हस्तांतरण पर अधिकारियों के अलग-अलग दावे
जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. श्याम किशोर ने बताया कि अस्पताल भवन का निर्माण मानक के अनुरूप नहीं कराया गया था और भवन विभाग से इसे विधिवत हस्तांतरित नहीं किया गया है. हालांकि उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार भवन निर्माण विभाग वर्ष 2021 में ही भवन पशुपालन विभाग को हस्तांतरित कर चुका है. 13 जुलाई 2021 को जिला पशुपालन पदाधिकारी द्वारा जारी पत्र संख्या 1575 में भी भवन हस्तगत किए जाने का उल्लेख है. ऐसे में भवन हस्तांतरण को लेकर दोनों पक्षों के दावों में विरोधाभास सामने आ रहा है.
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By Vivek Pandey
विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.
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