औरंगाबाद: चेक बाउंस मामलों के निपटारे के लिए 18 जुलाई को विशेष लोक अदालत, 1200 पक्षकारों को नोटिस जारी

प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल | Prabhat Khabar Network
औरंगाबाद जिले में चेक बाउंस मामलों के त्वरित समाधान के लिए 18 जुलाई को विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जा रहा है. इस आयोजन का उद्देश्य वर्षों से लंबित मामलों का आपसी समझौते से निपटारा करना है. लगभग 1200 पक्षकारों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं, जिससे समय और धन की बचत होगी.
Aurangabad News: औरंगाबाद जिले के व्यवहार न्यायालय में चेक बाउंस के मामलों में वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहे पक्षकारों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर आई है. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर आगामी 18 जुलाई को व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद में चेक बाउंस मामलों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण निष्पादन के लिए विशेष लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा. यह आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष सह प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न होगा.
बारह सौ लोगों को नोटिस
औरंगाबाद जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल ने बताया कि इस विशेष लोक अदालत को लेकर सभी प्रशासनिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. न्यायालयों में लंबित अधिकाधिक मामलों के त्वरित निष्पादन के उद्देश्य से अब तक करीब 1200 संबंधित पक्षकारों को आधिकारिक नोटिस भेजे जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि चेक बाउंस से जुड़े मामलों का शीघ्र और आपसी सहमति से निस्तारण व्यापारिक एवं वित्तीय लेन-देन में लोगों का आपसी विश्वास कायम रखने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.
समय और पैसे की बचत
औरंगाबाद की सचिव तान्या पटेल ने बताया कि इस विशेष लोक अदालत के माध्यम से दोनों पक्ष बिना किसी लंबी कानूनी प्रक्रिया के समझौते के आधार पर अपने विवाद का स्थायी और शांतिपूर्ण समाधान प्राप्त कर सकते हैं. इससे जहां एक तरफ न्यायालयों में वर्षों से लंबित मामलों का बोझ काफी कम होगा, वहीं दूसरी तरफ गरीब और मध्यम वर्ग के पक्षकारों के कीमती समय, धन और अनावश्यक मुकदमेबाजी के बड़े खर्च की भी पूरी बचत होगी जो समाज के हित में है.
न्यायालय की डिक्री सी मान्यता
औरंगाबाद के वैसे लोग जिनके मामले नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत लंबित हैं, वे इस अदालत का सीधा लाभ उठा सकते हैं. सचिव ने बताया कि लोक अदालत में आपसी समझौते के आधार पर पारित होने वाले निर्णय को सामान्य न्यायालय की डिक्री के समान ही पूर्ण कानूनी मान्यता प्राप्त होती है और यह निर्णय अंतिम तथा सभी पक्षों पर समान रूप से बाध्यकारी होता है. प्राधिकार ने सभी अधिवक्ताओं, बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों से नियत समय पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने की अपील की है.
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