औरंगाबाद: सदर अस्पताल में जीविका के जिम्मे वाली सफाई व्यवस्था बेपटरी, उपाधीक्षक ने सिविल सर्जन को भेजा पत्र

सिविल सर्जन को उपाधीक्षक द्वारा लिखा गया पत्र | Prabhat Khabar Network
औरंगाबाद सदर अस्पताल में सफाई की व्यवस्था चरमरा गई है, जिससे मरीजों और परिजनों को परेशानी हो रही है. अस्पताल प्रशासन ने सफाई का जिम्मा संभालने वाली जीविका संस्था को कड़ी चेतावनी जारी की है.
Aurangabad News: औरंगाबाद जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल की साफ-सफाई व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है. अस्पताल परिसर के भीतर और बाहर चारों तरफ गंदगी का अंबार लगा हुआ है, जिससे यहाँ इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस अव्यवस्था के कारण स्वास्थ्य विभाग की लगातार किरकिरी हो रही है. ज्ञात हो कि कुछ ही दिनों पहले अस्पताल प्रशासन ने आउटसोर्सिंग एजेंसी की सेवा समाप्त कर जीविका दीदियों की संस्था को सदर अस्पताल की संपूर्ण सफाई व्यवस्था की कमान सौंपी थी.
जीविका संस्था को कड़ी चेतावनी
सदर अस्पताल की साफ-सफाई व्यवस्था में लगातार मिल रही गंभीर शिकायतों को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने अंततः जीविका संस्था को कड़ी चेतावनी जारी की है. यह आधिकारिक पत्र बीते 13 जुलाई को अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. आशुतोष कुमार सिंह की ओर से जिला स्वास्थ्य समिति के सिविल सर्जन-सह-सदस्य सचिव को भेजा गया है. पत्र के माध्यम से साफ-सफाई के निर्धारित मानकों की खुलेआम अनदेखी किए जाने और लापरवाही बरतने की बात उजागर की गई है.
मानकों के अनुरूप नहीं हो रहा कार्य
अस्पताल उपाधीक्षक द्वारा भेजे गए पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि सदर अस्पताल परिसर की आंतरिक एवं बाह्य साफ-सफाई का पूरा जिम्मा जीविका संस्था के पास है. इसके तहत सभी वार्ड, ओपीडी, इमरजेंसी, गैलरी, कार्यालय और मुख्य परिसर की नियमित सफाई सुनिश्चित करनी है. हालांकि, निरीक्षण के दौरान पाया गया कि कई महत्वपूर्ण स्थानों पर निर्धारित मानक के अनुरूप कार्य नहीं हो रहा है. कई संवेदनशील जगहों पर गीला पोछा लगाने के बजाय केवल झाड़ू लगाकर रस्म अदायगी कर दी जाती है.
संक्रमण फैलने का बढ़ा खतरा
इस लचर कार्यप्रणाली के कारण अस्पताल में संक्रमण नियंत्रण के दावों के साथ-साथ बुनियादी स्वच्छता व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है. अस्पताल के विभिन्न वार्डों में समय पर कचरे का निस्तारण नहीं किया जा रहा है तथा शौचालयों एवं अन्य सार्वजनिक स्थलों की स्थिति भी काफी दयनीय पाई गई है. पत्र में कहा गया है कि जीविका कर्मियों को पूर्व में कई बार मौखिक रूप से आवश्यक सुधार के निर्देश दिए गए थे, लेकिन बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद धरातल पर कोई अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिला.
सिविल सर्जन ने बीपीएम को लिखा पत्र
सफाई कार्य में लगातार बरती जा रही यह लापरवाही अस्पताल की छवि और मरीजों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है. इस मामले के सामने आने के बाद औरंगाबाद के सिविल सर्जन डॉ. कृष्णा प्रसाद ने भी त्वरित कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने जीविका के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (बीपीएम) को एक आधिकारिक पत्र लिखकर अस्पताल की ध्वस्त हो चुकी सफाई व्यवस्था पर उनका सीधा ध्यान आकृष्ट कराया है. सीएस ने बीपीएम को अपने स्तर से कर्मियों को जल्द निर्देशित कर व्यवस्था सुधारने को कहा है.
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