नहरों में रोटेशन सिस्टम से छोड़ा जा रहा पानी, नवीनगर, अंबा और हसपुरा क्षेत्र में बढ़ेगी जलापूर्ति

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बैठक में शामिल अधिकारी  | Prabhat Khabar Network

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किसानों को धान रोपनी के मौसम में पर्याप्त सिंचाई सुविधा मिले, इसके लिए जिलाधिकारी ने सिंचाई विभाग के साथ बैठक की. नहरों में जल की कमी के कारण रोटेशन प्रणाली अपनाई गई है, जिससे सभी क्षेत्रों के किसानों को लाभ मिलेगा.

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Aurangabad News : औरंगाबाद शहर. धान रोपनी के मौसम में किसानों को पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने गुरुवार को समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की. बैठक में विभिन्न नहर प्रमंडलों के तहत जलापूर्ति की स्थिति की समीक्षा करते हुए डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसी भी किसान को सिंचाई के लिए परेशानी नहीं हो और सभी क्षेत्रों में समय पर पानी उपलब्ध कराया जाए.

सिंचाई व्यवस्था में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने विभिन्न नहर प्रणालियों के माध्यम से जलापूर्ति की प्रगति की जानकारी ली. उन्होंने कहा कि किसानों का हित सर्वोपरि है और सिंचाई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी. सभी अधिकारियों को नहरों में नियमित निगरानी रखने तथा तकनीकी या प्रशासनिक समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया.

मदनपुर में शुरू हुई जलापूर्ति

सोन उच्च स्तरीय नहर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि बैराज पर आवश्यक मैकेनिकल पुर्जों के प्रतिस्थापन का कार्य पूरा होने के बाद नहरों में सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जा रहा है. उन्होंने बताया कि मदनपुर प्रखंड की ओर जलापूर्ति शुरू कर दी गई है. उपलब्ध जलराशि के अनुसार रोटेशन (टर्न सिस्टम) के आधार पर चरणबद्ध तरीके से विभिन्न नहरों में पानी छोड़ा जा रहा है, ताकि सभी क्षेत्रों के किसानों को समान रूप से लाभ मिल सके.

तीन-चार दिनों में अन्य प्रखंडों तक पहुंचेगा पानी

कृषि विभाग ने बताया कि नवीनगर, अंबा, हसपुरा सहित अन्य प्रखंडों में धान रोपनी के लिए पर्याप्त सिंचाई जल की आवश्यकता है. इस पर नहर प्रमंडल के अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि अगले तीन से चार दिनों के भीतर इन क्षेत्रों में भी पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध करा दिया जाएगा.

कम जलराशि के कारण अपनाई गई रोटेशन प्रणाली

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि झारखंड द्वारा बाणसागर डैम से प्रतिदिन लगभग 2700 क्यूसेक पानी छोड़े जाने का प्रावधान है, लेकिन वर्तमान में करीब 2100 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जा रहा है. बिहार की सीमा तक पहुंचते-पहुंचते यह जलराशि घटकर लगभग 1200 क्यूसेक रह जाती है. इसी कारण उपलब्ध पानी के अनुसार रोटेशन प्रणाली लागू कर विभिन्न नहरों के माध्यम से सिंचाई जल उपलब्ध कराया जा रहा है. बैठक में जिला कृषि पदाधिकारी, सिंचाई विभाग के सभी संबंधित कार्यपालक अभियंता तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे.


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Sudhir Kumar Singh

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By Sudhir Kumar Singh

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