कुटुंबा के दक्षिणी क्षेत्र में शुरू हुई धान की रोपनी

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कुटुंबा के दक्षिणी क्षेत्र में शुरू हुई धान की रोपनी

अगात धान की फसल लगाने से अच्छी होगी उपज

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अगात धान की फसल लगाने से अच्छी होगी उपज कुटुंबा. मॉनसून के दस्तक के बाद से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बारिश की दौर जारी है. इस बार झारखंड के सीमावर्ती एरिया के आहर पोखर में भी पानी दिखने लगा है. कुटुंबा के दक्षिणी क्षेत्र में धान की रोपनी शुरू हो गयी है. वर्षा के पानी के बदौलत खेतो की जुताई-कोड़ाई करने के लिए किसान खेत में उतर आये है. ऐसे भी जिन किसानों की नर्सरी तैयार हो गयी है वे नलकूप की बदौलत धान की रोपनी कराने में जुटे है. पोला गांव के किसान टूटू सिंह ने मंगलवार को अपने 15 बीघे जमीन में धान की रोपनी करायी. इस गांव के बधार में फसल गीत सुनाई पड़ी. किसान ने बताया कि अगात रोपनी से धान की अच्छी उपज होती है. खरपतवार भी कम उगता है और कीट व्याधि का खतरा नहीं रहता है. उन्होंने बताया कि धान की फसल लगाने के लिए अब चार बीघे जमीन में शेष रह गये हैं. दो दिनों के अंदर दो पूरा कर लिया जायेगा. प्रखंड के विभिन्न पंचायतों से मिली जानकारी अनुसार शायद टूटू प्रखंड के पहले किसान हैंं जिन्होंने धान की रोपनी संपन्न करने का प्रयास जारी रखा है. घाघ कवि की कहावत समय से पहले चेत किसान उन्होंने चरितार्थ कर दिया है. ज्ञात हो कि पोला गांव उत्तर कोयल नहर से तीन किलोमीटर दक्षिण की ओर स्थित है. वहां सिंचाई का कोई स्थायी स्रोत नहीं है. असिंचित एरिया में धान की रोपनी शुरू होना बड़ी बात है. अनुभवी व्यक्ति का मानना है कि कृषि कार्य के समय को बखूबी पहचानने वाला किसान को निश्चित रूप से सफलता मिलती है. गौरतलब है कि कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र में 20 हजार हेक्टेयर भूमि में धान रोपने का लक्ष्य निर्धारित है. इसके लिए 2000 हजार हेक्टेयर भूमि में धान के बिचड़े गिराया जाना है, जिसमें अब तक किसान 1620 हेक्टेयर में धान का बिचड़ा गिराया गया है.

क्या बताते हैं कृषि विशेषज्ञ

मौसम वैज्ञानिक डॉ अनूप कुमार चौबे ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को देखते हुए अब किसानों को कृषि कार्य के समय को परखना होगा. अगर किसान समय की पहचान कर सही समय पर फसल को लगायेंगे तो बेहतर उत्पादन होगा. पिछले 20 वर्षों से मौसम में आया बदलाव तथा बढ़ते प्रदूषण के दौर ने एक तरफ पर्यावरण संकट उत्पन्न किया है तो दूसरी ओर हमारे कृषि भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. इस बार मौसम खरीफ फसल के अनुरूप है. किसान ससमय धान की रोपाई करने का प्रयास करें.

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Sujit Kumar

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