औरंगाबाद: बारिश की बेरुखी से धान रोपाई पर संकट, सबमर्सिबल के सहारे खेतों में उतरे किसान

Author Ambuj kumar|Edited by Vikash Jha
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गीत गाते हुए रोपनी करती महिलाएं

गीत गाते हुए रोपनी करती महिलाएं

औरंगाबाद जिले के कुटुंबा प्रखंड में खरीफ मौसम की शुरुआत में ही बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. नहरों में पानी न होने से धान रोपाई पर संकट मंडरा रहा है. ऐसे में साधन-संपन्न किसान सबमर्सिबल बोरिंग के सहारे खेती शुरू कर रहे हैं.

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Aurangabad News: औरंगाबाद जिले के कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र में खरीफ मौसम की शुरुआत में ही बारिश की बेरुखी ने अन्नदाताओं की चिंता को बेहद बढ़ा दिया है. इलाके में लंबे अवधि वाले धान की समयबद्ध रोपनी का महत्वपूर्ण समय अब तेजी से बीत रहा है. पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से पूरे क्षेत्र में मानसून की बारिश नहीं होने के कारण अधिकांश कृषि योग्य खेत पूरी तरह सूखे पड़े हैं.

नहर में पानी नहीं होने से आफत

औरंगाबाद के इस कृषि बेल्ट में सिंचाई के मुख्य साधन माने जाने वाले उत्तर कोयल नहर के बसडीहा कैनाल में भी सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा गया है. नहर के पूरी तरह सूखे रहने से किसानों के सामने पानी की भारी किल्लत खड़ी हो गई है. ऐसे विपरीत हालात में क्षेत्र के केवल साधन-संपन्न किसान ही सबमर्सिबल बोरिंग के सहारे खेतों में पानी भरकर किसी तरह धान की रोपनी शुरू कर पा रहे हैं.

पहली धान रोपनी का हुआ आगाज

औरंगाबाद जिले के कुटुंबा प्रखंड अंतर्गत रसलपुर गांव में मंगलवार को इस चालू खरीफ मौसम की पहली धान रोपनी का औपचारिक आगाज किया गया. मौसम की बेरुखी और भीषण उमस के बीच महिला मजदूर पारंपरिक कजरी और सावन के गीत गाकर खेतों में रोपनी के कार्य में जुटी दिखाई दीं. वहीं पुरुष मजदूर खेतों से धान का बिचड़ा (मोरी) उखाड़ने के काम में तत्पर दिखे.

किसान शिवनाथ पांडेय ने बयां की पीड़ा

औरंगाबाद के रसलपुर गांव के प्रगतिशील किसान शिवनाथ पांडेय ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए बताया कि कई दिनों से क्षेत्र में एक बूंद बारिश नहीं हुई है. दूसरी ओर सरकारी बसडीहा कैनाल में भी प्रशासन द्वारा सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ा जा रहा है. ऐसे संकट के समय में अब केवल सबमर्सिबल ही एकमात्र सहारा बन गया है जिसके दम पर खेती शुरू की गई है.

खेती का चक्र बचाने की कवायद

औरंगाबाद के किसानों ने बताया कि भारी आर्थिक लागत के बावजूद वे धीरे-धीरे रोपाई का कार्य आगे बढ़ा रहे हैं, ताकि उनका सालाना खेती का चक्र किसी भी स्थिति में प्रभावित न हो. किसानों का दर्द है कि अब खेती पूरी तरह से केवल मौसम के भरोसे नहीं रह गयी है. हर वर्ष कभी सुखाड़ तो कभी अतिवृष्टि जैसी भयानक विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है.

बढ़ रही है लगातार सिंचाई लागत

औरंगाबाद ग्रामीण इलाके के किसानों का कहना है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद पुश्तैनी खेती को छोड़ना उनके लिए किसी भी सूरत में संभव नहीं है. सबमर्सिबल से खेतों को भरने में बिजली और डीजल का भारी खर्च आ रहा है जिससे सिंचाई लागत दोगुनी हो गई है. इससे आने वाले दिनों में किसानों की आर्थिक स्थिति और बदहाल होने की आशंका है.

समय पर रोपनी नहीं तो उपज घटेगी

औरंगाबाद के कृषि जानकारों के अनुसार धान की बेहतर पैदावार और समयबद्ध रोपनी के लिए जुलाई का महीना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल्द ही इलाके में अच्छी बारिश नहीं हुई और नहरों में पानी उपलब्ध नहीं कराया गया, तो धान की रोपनी बुरी तरह प्रभावित होने के साथ-साथ खरीफ उत्पादन पर भी इसका बेहद प्रतिकूल असर पड़ेगा.

नहर में पानी छोड़ने की पुरजोर मांग

औरंगाबाद कुटुंबा क्षेत्र के प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन और संबंधित सिंचाई विभाग के वरीय अधिकारियों से उत्तर कोयल नहर के बसडीहा कैनाल में शीघ्र पानी छोड़ने की मांग की है. किसानों ने कहा कि सरकार सिंचाई की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करे ताकि समय रहते धान की रोपाई पूरी हो सके और आर्थिक मंदी से जूझ रहे आम किसानों को बड़ी राहत मिल सके.

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