औरंगाबाद में डिजिटल दौर में भी नेटवर्क से दूर गांव, पेड़ और पहाड़ बने मोबाइल टावर

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पहाड़ों के बीच बस लंगूराही गांव, जहां अब भी ''''नो नेटवर्क की दुनिया''''

लँगूराही गाव में बने कच्चा का मकान

डिजिटल युग में भी औरंगाबाद का लंगूराही गांव बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। मोबाइल नेटवर्क की कमी के कारण ग्रामीण पेड़ों और पहाड़ों पर चढ़कर फोन करने को मजबूर हैं। यह स्थिति आपातकालीन सेवाओं और सरकारी योजनाओं के लाभ तक पहुंचने में बड़ी बाधा बन रही है।

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औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित लंगूराही गांव आज भी कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. डिजिटल युग में जहां मोबाइल और इंटरनेट लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं, वहीं इस गांव में मोबाइल नेटवर्क की सुविधा लगभग न के बराबर है.

नेटवर्क की कमी के कारण ग्रामीण न तो आसानी से फोन पर बातचीत कर पाते हैं और न ही इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाते हैं. इसका सीधा असर सरकारी योजनाओं की जानकारी और उनके लाभ तक पहुंचने पर भी पड़ रहा है.

नेटवर्क के लिए पेड़ों और पहाड़ों पर चढ़ते हैं ग्रामीण

लंगूराही गांव में मोबाइल नेटवर्क की स्थिति इतनी खराब है कि ग्रामीणों को फोन करने के लिए पेड़ों या पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता है. कई बार एक जरूरी कॉल करने के लिए भी घंटों इंतजार करना पड़ता है.

ग्रामीणों का कहना है कि जहां देश डिजिटल सुविधाओं की ओर तेजी से बढ़ रहा है, वहीं उनके गांव में मोबाइल की घंटियां तक ठीक से नहीं बजतीं.

आपात स्थिति में बढ़ जाती है परेशानी

मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से सबसे बड़ी समस्या आपातकालीन परिस्थितियों में होती है. एंबुलेंस बुलाने, डॉक्टर से संपर्क करने या पुलिस को सूचना देने में ग्रामीणों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

पहाड़ी इलाका होने के कारण यहां सांप-बिच्छू के काटने जैसी घटनाएं भी होती रहती हैं. ऐसे समय में समय पर इलाज नहीं मिलने से परेशानी और बढ़ जाती है. कई बार लोगों को रातभर मदद का इंतजार करना पड़ता है.

कुछ जगहों पर ही मिलता है नेटवर्क, ग्रामीणों ने बनाए ठिकाने

ग्रामीणों ने बताया कि गांव में कुछ चुनिंदा स्थानों पर ही थोड़ा बहुत नेटवर्क आता है. लोगों ने उन जगहों को चिन्हित कर लिया है और जरूरत पड़ने पर वहीं जाकर फोन करते हैं.

कॉल के दौरान नेटवर्क गायब होना और बातचीत बीच में कट जाना यहां आम समस्या बन चुकी है.

बीमार और गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी

ग्रामीण राजकुमार सिंह भोक्ता, तूफानी सिंह भोक्ता, अखिलेश सिंह भोक्ता, महेश सिंह भोक्ता सहित अन्य लोगों ने बताया कि नेटवर्क की कमी का सबसे ज्यादा असर बीमार लोगों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है.

उन्होंने कहा कि एंबुलेंस बुलाना मुश्किल हो जाता है. इसके अलावा गांव तक पहुंचने वाली कच्ची सड़क के कारण प्रखंड मुख्यालय जाने में भी एक से दो घंटे का समय लग जाता है.

मोबाइल टावर और पक्की सड़क की मांग

ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि लंगूराही गांव में मोबाइल टावर लगाया जाए और सड़क को पक्का कराया जाए, ताकि उन्हें भी डिजिटल सुविधाओं का लाभ मिल सके.

डिजिटल इंडिया की पहुंच पर उठे सवाल

लंगूराही गांव की स्थिति डिजिटल इंडिया अभियान की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक नेटवर्क और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तब तक डिजिटल विकास का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाएगा.


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Vinay Singh

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By Vinay Singh

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