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मेदिनीनगर में काव्य संग्रह ‘करुण पुकार’ का लोकार्पण

Updated at : 13 Oct 2025 3:36 PM (IST)
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मेदिनीनगर में काव्य संग्रह ‘करुण पुकार’ का लोकार्पण

AURANGABAD NEWS.मेदिनीनगर के एक होटल में हिंदी साहित्य भारती, पलामू के तत्वावधान में कवयित्री रीना प्रेम दूबे के काव्य संग्रह ‘करुण पुकार’ का लोकार्पण किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रथम विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी थे.

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कवयित्री रीना प्रेम दूबे की है काव्य संग्रह प्रतिनिधि, औरंगाबाद ग्रामीण. मेदिनीनगर के एक होटल में हिंदी साहित्य भारती, पलामू के तत्वावधान में कवयित्री रीना प्रेम दूबे के काव्य संग्रह ‘करुण पुकार’ का लोकार्पण किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रथम विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी थे. मंच पर समकालीन जवाबदेही के संपादक डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्र, पलामू के जिला शिक्षा अधीक्षक संदीप कुमार, औरंगाबाद के शिक्षाविद शंभुनाथ पांडेय, सिद्धेश्वर विद्यार्थी, डॉ रामाधार सिंह, छंद शास्त्री श्रीधर प्रसाद द्विवेदी, कुमार मनीष अरविंद, सुरेंद्र कुमार मिश्र, प्रेम प्रकाश भसीन, धनंजय जयपुरी और बलराम पाठक मौजूद थे. समारोह की अध्यक्षता श्रीधर प्रसाद द्विवेदी ने की, जबकि संचालन कवि राकेश कुमार ने किया. मुख्य अतिथि इंदरसिंह नामधारी ने कहा कि अंधकार वहीं होता है, जहां आदित्य नहीं होता. जिस देश में साहित्य नहीं, वह देश मुर्दा है. उन्होंने कवयित्री रीना प्रेम दूबे की कविताओं की सराहना करते हुए उनके एक गीत का पाठ किया. कहा कि पलामू में नियमित साहित्य सृजन होना इस बात का प्रमाण है कि यह क्षेत्र साहित्य के क्षेत्र में अग्रणी और जीवंत है. विशिष्ट अतिथि डॉ सुरेंद्र प्रसाद मिश्र ने कहा कि साहित्य के माध्यम से व्यक्ति मानव बनता है. ‘करुण पुकार’ की रचनाओं को पढ़ने से स्पष्ट होता है कि कवयित्री ने समाज के दर्द को गहराई से महसूस किया है और उसे प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया है. जिला शिक्षा अधीक्षक संदीप कुमार ने कहा कि एक शिक्षिका द्वारा इतनी उत्कृष्ट काव्य रचना किया जाना गर्व की बात है. संवेदनाओं का पुट और भाषा का प्रवाह इस कृति को पठनीय और सार्थक बनाता है. साहित्यकार कुमार मनीष अरविंद ने कहा कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी हिंदी का राष्ट्रभाषा न होना चिंतन का विषय है. हमें अपनी भाषा के शुद्ध रूप का प्रयोग करना चाहिए. शिक्षाविद शंभुनाथ पांडेय ने कहा कि साहित्य समाज का मार्गदर्शन करता है. इसलिए अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी साहित्य से जोड़ना चाहिए, ताकि समाज के हर वर्ग तक साहित्य पहुंच सके. साहित्यकार सुरेंद्र कुमार मिश्र ने कहा कि रीना प्रेम दूबे की रचनाओं में भावों की गहराई है और ‘करुण पुकार’ में करुणा की बौछार दिखती है. समारोह को प्रेम प्रकाश भसीन, धनंजय जयपुरी, बलराम पाठक, उमेश कुमार पाठक रेणु, प्रभात मिश्र सुमन, सुरेश विद्यार्थी, अनुज कुमार पाठक, नीरज कुमार पाठक और डॉ. नीरज कुमार द्विवेदी ने भी संबोधित किया. सभी ने कवयित्री को बधाई दी और काव्य संग्रह की सराहना की. कार्यक्रम की शुरुआत डॉ रामप्रवेश पंडित की सरस्वती वंदना से हुई. अतिथियों का स्वागत सत्येंद्र चौबे ‘सुमन’ ने किया. पुस्तक का परिचय परशुराम तिवारी ने कराया और कहा कि ‘करुण पुकार’ में केवल करुण पुकार ही नहीं बल्कि करुणा की धार भी प्रवाहित होती है. धन्यवाद ज्ञापन रमेश कुमार सिंह ने किया. कार्यक्रम में रामलखन दूबे, विनोद तिवारी, लालदेव प्रसाद, धनंजय पाठक, प्रेम प्रकाश दूबे, प्रियरंजन पाठक समर्पण, प्रेमकांत तिवारी, उदयभानु तिवारी, पीयूष राज, रिशु प्रिया, एम जे अज़हर, अमीन रहबर, गणेश पांडेय, मनीष मिश्र नंदन, पंकज श्रीवास्तव, शीला श्रीवास्तव, सरोज देवी, माया देवी, सुकृति, बॉबी, आर एन झा, ममता झा, रमेश पांडेय, अनुपमा तिवारी, वंदना श्रीवास्तव सहित कई साहित्यकार और साहित्यप्रेमी उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUJIT KUMAR

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